नीतिगत ब्याज दर में फिर 0.25% की कटौती, होम लोन हो सकता है सस्ता

आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने का लक्ष्य

मुंबई:

आर्थिक वृद्धि दर में नरमी के बीच रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को अपनी मुख्य नीतिगत ब्याज दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की कटौती की और साथ ही आगे के लिए नीतिगत रुख को ‘तटस्थ’ से ‘नरम’ कर दिया।

एमपीसी के सभी छह सदस्यों ने रेपो रेट में कटौती का समर्थन किया। वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जीडीपी विकास दर अनुमान को 7.2 फीसदी से घटाकर सात फीसदी कर दिया गया है। छह सदस्यीय एमपीसी की बैठक की अध्यक्षता आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने की। नई मौद्रिक नीति के तहत रिवर्स रीपो रेट घटकर 5.50 प्रतिशत, जबकि बैंक रेट 6 प्रतिशत पर आ गया है। हालांकि सीआआर में कोई कटौती नहीं की गई है।

इस साल यह लगातार तीसरा मौका है जब केंद्रीय बैंक ने बैंकों के लिए सस्ता धन सुलभ कराने के लिए अपनी नीतिगत दर में कटौती की गयी है। इन तीनों मौकों को मिला कर रपो दर में कुल 0.75 प्रतिशत की कटौती हो चुकी है। रेपो दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को उनकी तत्काल की जरूरत के लिए एक दिन के लिए धन उधार देता है।

जीडीपी वृद्धि दर अनुमान घटाया

केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिये सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर के पूर्व के 7.2 प्रतिशत के अनुमान को घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। वृद्धि दर के अनुमान में कमी का कारण कमजोर वैश्विक परिदृश्य तथा निजी खपत में कमी है।

रेपो दर में इस कटौती के साथ यह 5.7 प्रतिशत पर आ गयी है। रेपो दर वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक बैंकों को कर्ज देता है।

बैंक भी घटा सकते हैं लोन पर ब्याज दर

रीपो रेट घटने से बैंकों को आरबीआई से सस्ती फंडिंग प्राप्त हो सकेगी, इसलिए बैंक भी अब कम ब्याज दर पर होम लोन, कार लोन सहित अन्य लोन ऑफर कर पाएंगे। इससे नया लोन सस्ता हो जाएगा, जबकि लोन ले चुके लोगों को या तो ईएमआई में या रीपेमेंट पीरियड में कटौती का फायदा मिल सकता है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक आरबीआई के फैसले का फायदा आम ग्राहकों तक पहुंचाते हैं या नहीं। क्योंकि पिछले दो रेट कट का फायदा आम ग्राहकों को अभी तक नहीं मिल पाया है।

महंगाई दर अनुमान

रिजर्व बैंक ने 2019-20 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) के दौरान मुद्रास्फीति 3-3.10 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया। पिछली समीक्षा में यह अनुमान 2.90-3.0 प्रतिशत का था। वहीं 2019-20 की दूसरी छमाही के लिए मुद्रास्फीति 3.4-3.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। यह सरकार द्वारा निर्धारित 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में है।

मौद्रिक नीति घोषणा में कहा गया है, ‘‘मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) इस बात पर गौर करती है कि आर्थिक वृद्धि दर उल्लेखनीय रूप से कमजोर पड़ी है…निवेश गतिविधियों में तीव्र गिरावट के साथ निजी खपत वृद्धि में नरमी चिंता की बात है।’’

रिजर्व बैंक की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा 5 से 7 अगस्त 2019 को की जाएगी।

मौद्रिक नीति की प्रमुख बातें –

  • रेपो दर में लगातार तीसरी बार 0.25 प्रतिशत की कटौती। रेपो दर अब 5.75 प्रतिशत।
  • रिवर्स रेपो 5.50 प्रतिशत, उधार की सीमांत स्थायी सुविधा पर ब्याज दर छह प्रतिशत।
  • रिजर्व बैंक का ननीतिगत रुख ‘तटस्थ’ से हुआ ‘नरम’।
  • वर्ष 2019-20 में जीडीपी की वृद्धि का पूर्वानुमान 7.20 प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत किया गया।
  • खुदरा मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान बढ़ाकर अप्रैल-सितंबर के लिये 3.0-3.1 प्रतिशत और अक्टूबर-मार्च के लिये 3.40-3.70 प्रतिशत किया गया।
  • निकट भविष्य में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने का अनुमान।
  • मानसून की अनिश्चितता, सब्जियों की कीमतों में बेमौसम तेजी, कच्चा तेल की बढ़ती कीमतें, वित्तीय बाजार का उथल-पुथल और राजकोषीय परिदृश्य के कारण मुद्रास्फीति बढ़ने का जोखिम।
  • डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिये आरटीजीएस और एनईएफटी पर शुल्क समाप्त।
  • एटीएम शुल्क, बैंकों द्वारा लिये जाने वाले शुल्क की समीक्षा के लिये समिति का गठन।
  • छोटे वित्तीय बैंकों के लिये सदासुलभ लाइसेंसिंग पर दिशानिर्देशों का प्रस्ताव अगस्त तक।
  • निवेश में तेज गिरावट और निजी खपत की वृद्धि हल्की होने पर चिंता।
  • मौद्रिक नीति समिति के सभी छह सदस्यों ने रेपो दर 0.25 प्रतिशत घटाने का पक्ष लिया।
  • जून की शुरुआत में बैंकिंग प्रणाली में तरलता (नकद/नकद समतुल्य धन) का औसत दैनिक अतिरेक 66 हजार करोड़ रुपये था।
  • विदेशी मुद्रा विनिमय भंडार 31 मई 2019 को 421.90 अरब डॉलर था।
  • मौद्रिक नीति समिति की अगली समीक्षा बैठक के निष्कर्षों की घोषणा सात अगस्त को।

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