बिहार में चमकी बुखार से 110 बच्चों की मौत, केंद्र ने दिया मदद का भरोसा

पटना/मुजफ्फरपुर:

बिहार में चमकी बुखार अपने विकराल रुप में सामने आया है। राज्य में पिछले पंद्रह दिनों में चमकी बुखार से 110 बच्चों की मौत हो चुकी है। रविवार को पंद्रह और बच्‍चों की मौत हो गई है। इसमें नौ बच्‍चों की मौत केवल मुजफ्फरपुर में हुई है। इनमें दो बच्‍ची की मौत तो रविवार को मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्‍ण मेडिकल कॉलेज व अस्‍पताल (एसकेएमसीएच) में केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के निरीक्षण के दौरान ही हो गई।

एसकेएमसीएच में रविवार को आठ और केजरीवाल अस्पताल में एक यानी कुल नौ और बच्चों की मौत हो गई, जबकि दोनों जगह 49 नए मरीजों को भर्ती किया गया। इसमें एसकेएमसीएच में 28 व केजरीवाल में 21 बच्चे हैं। शनिवार को 18 बच्चों की मौत हो गई थी।

राज्य के अन्य इलाकों में भी पांव पसारने लगा चमकी बुखार

मुजफ्फरपुर के बाद अब एईस एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से राज्य के कई और भी जिले प्रभावित हो रहे हैं। रविवार को मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण और वैशाली के अलावा अब एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) का दायरा सिवान तक पहुंच गया है।

पूर्वी चम्पारण जिले में चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ती ही जा रही है। जिले के अब तक एईएस के 36 बच्चे नए मामले सामने आ चुके हैं। इन सभी बच्चों का इलाज मुजफ्फरपुर और पूर्वी चम्पारण के विभिन्न निजी अस्पतालों में किया जा रहा है। इन पीड़ित बच्चों में सबसे अधिक 16 बच्चे चकिया प्रखंड के गांवों के है। जिनमें पांच की मौत हो चुकी है। आज जिले में 18 नए मरीजों की शिनाख्त हो सकी है जबकि मोतिहारी के सदर अस्पताल में तीन बच्चों का इलाज किया जा रहा है जिसमें एक की एईएस से पीड़ित होने की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने किया है।

केंद्र ने दिया हरसंभव मदद का भरोसा

इस दौरान हालात का जायजा लेने मुजफ्फरपुर श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन ने इस समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से राज्य को सभी संभव तकनीक और आर्थिक मदद का आश्वासन दिया ।

हर्षवर्द्धन ने मेडिकल कालेज का जायजा लेने के बाद पत्रकारों से कहा “मैं इस क्षेत्र के लोगों, विशेष रूप से प्रभावित परिवारों को विश्वास दिलाता हूं कि समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकार को सभी संभव आर्थिक और तकनीकी सहयोग देगी ।”

उन्होंने इस रोग के कारण इस इलाके में पिछले कई वर्षों से हो रही बच्चों की मौत के मद्देनजर मुजफ्फरपुर श्रीकृष्ण मेडिकल कालेज अस्पताल में बीमार बच्चों के लिए वर्तमान व्यवस्था को अपर्याप्त मानते हुए कहा कि यहां कम से कम सौ बिस्तरों वाला बच्चों का अलग से गहन चिकित्सा कक्ष बनना चाहिए ।

हर्षवर्द्धन ने कहा कि उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री को अगले साल तक युद्ध स्तर पर इसे तैयार कर लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि बिहार में चार—पांच जगहों पर स्टेट आफ दी आर्ट वाईरोलोजी प्रयोगशाला कुछ ही महीनों में पूरा कर लिया जाएगा। हर्षवर्द्धन ने कहा, “इस रोग के इलाज के लिए शिशु रोग विशेषज्ञों के अलावा न्यूरोलोजिस्ट का होना आवश्यक है । इस अस्पताल में निर्माणाधीन सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक का काम अगले छह महीने के भीतर पूरा करने के लिए कहा गया है ।”

मंत्री ने कहा कि मुजफ्फरपुर स्थित भारतीय मौसम विभाग के वेधशाला को उन्नत किया जाएगा ताकि इस रोग का अर्द्रता और तापमान के बढ़ने के साथ संभावित संबंध की जानकारी लोगों को मिल सके ।

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