कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कड़कनाथ खाइए कोहली जी फिर देखिए कमाल !

  • झाबुआ स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने टीम इंडिया को भेजा पत्र

  • कृषि वैज्ञानिकों की सलाह को मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री का भी समर्थन

  • मशहूर चिकन वैरायटी कड़कनाथ के सेवन की सलाह दी

  • झाबुआ का कड़कनाथ चिकन बेहद मशहूर और महंगी वैरायटी

  • पोषण संबंधी खुबियों के कारण कड़कनाथ की भारी मांग

  • कड़कनाथ में अन्य मुर्गा प्रजातियों के मांस के मुकाबले चर्बी और कोलेस्ट्रॉल काफी कम होता है

  • प्रोटीन और आयरन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है।

इंदौर/झाबुआ:

पिछले दिनों मध्यप्रदेश के झाबुआ स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ने विराट कोहली की अगुवाई वाली भारतीय क्रिकेट टीम को सलाह दी कि वह पोषण की जरूरतें पूरी करने के लिये अपने आहार में मशहूर कड़कनाथ चिकन को शामिल करे। टीम इंडिया के लिए केवीके के इस “पौष्टिक” मशविरे को बृहस्पतिवार को प्रदेश के कृषि मंत्री सचिन यादव के समर्थन से भी बल मिला।

यादव ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा, “कड़कनाथ चिकन को लेकर केवीके की बात सुनी जानी चाहिये। अगर भारतीय क्रिकेट टीम को कड़कनाथ चिकन से पोषण संबंधी फायदा हो सकता है, तो केवीके के सुझाव पर विचार करने में किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिये।” उन्होंने कहा कि कड़कनाथ चिकन को बढ़ावा दिये जाने से झाबुआ में इस पारंपरिक प्रजाति के मुर्गे पालने वाले लोगों को भी फायदा होगा।


केवीके ने बीसीसीआई को लिखा पत्र – टीम इंडिया के आहार में कड़कनाथ को करें शामिल

केवीके की ओर से बुधवार को पत्र लिखकर भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के साथ बीसीसीआई को सलाह दी गयी है कि भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के आहार में कड़कनाथ चिकन शामिल किया जाना चाहिये। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस पत्र में कड़कनाथ चिकन की खूबियां गिनाते हुए कहा गया है कि इसमें दूसरी मुर्गा प्रजातियों के मांस के मुकाबले चर्बी और कोलेस्ट्रॉल काफी कम होता है, जबकि प्रोटीन और आयरन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है।

झाबुआ की मशहूर चिकन वैरायटी है कड़कनाथ

देश की जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स रजिस्ट्री ने “मांस उत्पाद तथा पोल्ट्री एवं पोल्ट्री मीट” की श्रेणी में गत 30 जुलाई को कड़कनाथ चिकन के नाम भौगोलिक पहचान (जीआई) का चिन्ह पंजीकृत किया था। झाबुआ मूल के कड़कनाथ मुर्गे को स्थानीय जुबान में “कालामासी” कहा जाता है। इसकी त्वचा और पंखों से लेकर मांस तक का रंग काला होता है।

जानकारों के मुताबिक, कड़कनाथ चिकन की मांग इसलिये भी बढ़ती जा रही है, क्योंकि इसमें अलग स्वाद के साथ औषधीय गुण भी होते हैं। इन्हीं वजहों से कड़कनाथ प्रजाति के जीवित पक्षी, इसके अंडे और इसका मांस दूसरी कुक्कुट प्रजातियों के मुकाबले काफी महंगी दरों पर बिकता है।

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