2019 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर क्या कहते हैं अमेरिकी ज्योतिषी !

पांच राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद अब सबकी निगाहें—2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव यानी फाइनल पर टिकी हुई हैं। इन राज्यों में चौंकाने वाले नतीजे आए हैं– एक तरफ मरणासन्न कांग्रेस के लिए ये संजीवनी साबित हुआ है तो वहीं बीजेपी को अब नए सिरे से अपनी राजनीति और रणनीति बनानी होगी —ये सब कहना है पोल पंडितों का—इसके इतर ज्योतिष के जानकार भी 2019 में होने वाले चुनाव और खासतौर पर प्रधानमंत्री के भविष्य को लेकर ग्रहों की चाल और गणना के आधार पर भविष्यवाणी कर रहे हैं। अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के ज्योतिषी अतुल सहाय ने भी अगामी लोकसभा चुनाव और प्रधानमंत्री मोदी के ग्रहों की दशा और उनके भविष्य का आकलन किया है।

पढ़िए क्या कहती है अतुल की कलम —–

हिंदुस्तान में चुनाव की स्थिति एक बार फिर है— और अनिश्चितता का वातावरण भी एक बार फिर है ! यह सर्वविदित है कि ईश्वर से शक्तिशाली कोई नहीं है – और कोई भी ज्योतिर्विद किसी का भाग्य नहीं परिवर्तित करता है – हाँ – ग्रहों की दशाएं – अनुकूल और प्रतिकूल होने के कारण – मानव जीवन में उतार चढाव आते हैं – किसी विशेष प्रश्नों – या फिर जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति के आधार पर – ज्योतिर्विद या ज्योतिष शास्त्र का अध्ययन करने वाले – एक “संभावित फल” का विश्लेषण करते हैं ! ग्रहों की दशाएं अगर अच्छी ना हों तो मानवजीवन कष्टमय हो जाता है–

मेरे अनुज और ज्योतिष में रुचि रखने वाले कुन्दन श्रीवास्तव ने मुझसे अगामी लोकसभा चुनाव और प्रधानमंत्री मोदी के भविष्य को लेकर प्रश्न पूछा था—उनका प्रश्न था कि क्या नरेंद्र मोदी एक बार फिर भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे ? अपने अनुज के कौतुहल और हिन्दुस्तान में चुनावी हलचल को देखते हुए – मैंने ग्रहों की दशा और नरेंद्र मोदी की कुंडली का एक बार फिर से अध्ययन किया है—क्या है ग्रहों की चाल और क्या कहती है गणना उससे पहले एक बार मैं आपको बताता चलूं कि 22 अप्रैल 2014 को सर्वप्रथम एक मित्र के आग्रह पर मैंने पहली बार किसी भी राजनैतिक विषय का विश्लेषण किया था – और कुछ मित्रों ने नरेंद्र मोदी के जन्म तारीख– समय– स्थान की जानकारी भेजी थी। 2014 में मैंने गणना उसी आधार पर की थी।

 

नरेंद्री मोदी अभी चन्द्रमा की महादशा से गुजर रहे हैं जो 2020 में समाप्त होगी और फिर उनके लग्न और राशि – यानी “मंगल” की महादशा अगले 7 वर्षों तक चलेगी – जो की अपने आप में बहुत मजबूत है – चुनाव के समय में राशि और लग्न का स्वामी – मंगल – जिसे ग्रहों में “सेनापति” का स्थान प्राप्त है – वो भी अपने उच्च स्थान पर होगा!

 

ईश्वर का आभारी हूं कि उस समय की गई गणना सटीक हुई थी और लिहाजा मैं एक बार फिर उसी विवरण के आधार पर विश्लेषण कर रहा हूं। हां एक महत्तवपूर्ण बात यह भी है कि मेरी गणना का आधार ‘’प्रश्नकाल और प्रश्नकुंडली’’ भी होता है। यह ज्योतिष विज्ञान का बहुत ही महत्तवपूर्ण अंग है और साथ ही साथ “पांच पक्षी शास्त्र’’ पर आधारित है !

  • नरेंद्र मोदी की कुंडली में गजकेसरी योग, रूचक योग, वोशि योग, भेरी योग, चंद्र मंगल योग, नीच भंग राज योग, कालह योग, शंख योग जैसी कई शुभ योग बने हुए हैं, और इन्ही विशिष्ट शुभ ग्रहों के प्रभाव के फलस्वरूप ही नरेंद्र मोदी को अपनी पार्टी में एक वरिष्ठ पद पर पहुंचने का मौका मिला।

  • नरेंद्र मोदी की राशि और लग्न दोनों ही वृश्चिक है और 27 / 28 अक्टूबर 2017 से अपनी उतरते साढ़े साती से गुजर रहे हैं और 23 / 24 जनवरी 2020 को उनकी साढ़े साती समाप्त हो जायेगी !अप्रैल 2014 के आंकलन के आधार पर मैंने यह स्पष्ट किया था की जब शनि मध्य साढ़े साती में होगा और जब उतरता हुआ होगा तो नरेंद्र मोदी को विरोध का सामना करना होगा और यहां तक की कुछ अवसरवादी उन्हें छोड़ कर दूसरे राजनीतिक पार्टी के साथ चले जाएंगे।

  • ग्रहों की दशा की अनुकूल होने के कारण नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बन सकते हैं। हालांकि यह भी सत्य है कि उन्हें 2014 जैसी आपार सफलता नहीं मिलेगी

  • अभी – सूर्य – शनि – बुध की युति है और जैसे ही शनि और सूर्य अलग हो जाएंगे – स्थति बदलती नजर आएगी , प्रतिद्वंदी पक्ष के प्रभावशाली लोग भी नरेंद्र मोदी के साथ हो जाएंगे।

  • गणना के अनुसार – नरेंद्री मोदी अभी चन्द्रमा की महादशा से गुजर रहे हैं जो 2020 में समाप्त होगी और फिर उनके लग्न और राशि – यानी “मंगल” की महादशा अगले 7 वर्षों तक चलेगी – जो की अपने आप में बहुत मजबूत है – चुनाव के समय में राशि और लग्न का स्वामी – मंगल – जिसे ग्रहों में “सेनापति” का स्थान प्राप्त है – वो भी अपने उच्च स्थान पर होगा!

  • अप्रैल 2019 में गुरु भी अपने मित्र शनि के साथ युति करेगा।

  • लग्न कुंडली – के दशम स्थान में शनि और शुक्र की युति अपने आप में एक प्रभावशाली युति है।

ग्रहों के विश्लेषण के अनुसार – 2029 तक नरेंद्र मोदी के ग्रह प्रभावशाली रहेंगे और उन्हें दुबारा “प्रधानमन्त्री” पद मिल सकता है – हाँ 2024 में – मंगल की महादशा में एक बार उन्हें किसी गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ सकता है

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