बालासन या शिशु आसन क्यों, कब और कैसे ?

विजय झा

बालासन योग का एक आसान है। आप इसे बाल + आसन भी बोल सकते है। यह शब्द संस्कृत से लिया गया है | इस आसन की सबसे खास बात यह है कि इस आसन को करते समय आपकी स्थिति माँ के गर्भ में होने वाले बच्चे की तरह हो जाती है। कहते है कि मां के गर्भ में बच्चे को बेहद शांति और सुकून मिलता है और इससे ज्यादा आराम दिलानेवाली अच्छी जगह कोई जगह नही हो सकती। यही कारण है कि इसको बालासन कहते हैऔर अंग्रेजी में चाइल्ड पोज़। यह एक आराम की मुद्रा है मतलब रेस्टिंग पोज़। यह शरीर को राहत प्रदान करता है और थकान को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा इस आसन के दौरान सांस लेने और छोड़ने की क्रिया से एक तरह की शांति मिलती है। बालासन का अभ्यास सही तरीके से करने से यह शरीर के कई विकारों को दूर करने में मदद करता है।

बालासन योग करने की विधि :-

सबसे पहले वज्रासन की स्थिति में बैठ जाए। अगर आपको दिक्कत हो रही हो तो पैरों के बीच में थोड़ा सा अंतर बना ले। अंतर ज्यादा नही होना चाहिए। इसके बाद भी अगर आप इसे नही कर पा रहे है और अपनी एड़ियों पर बैठने में तकलीफ हो रही है तो पंजों पर बैठे और एड़ी और पंजों के बीच में कोई मोटा सा तकिया रख ले। अब सांस लेते हुए दोनों हाथों को सर से सीधा ऊपर की ओर उठाएं। इसके बाद श्वास को धीमी गति से छोड़ते हुए आगे की ओर झुके और अपने माथे को जमीन से लगाने का प्रयास करें। अगर वजन या पेट बीच में आ रहा हो तो कोई छोटी टेबल या छोटी सी कुर्सी पर अपने सर को रख सकते है। इसके स्थान पर तकियों का प्रयोग भी किया जा सकता है। अब आराम से छाती से जांधों पर दबाब दे। कुछ देर तक इस स्थिति में रहे। गहरी सांसे ले और छोड़े। इस मुद्रा में 45 सेकेंड से 1 मिनट तक बने रहें और धीरे-धीरे लगातार सांस लेते रहें। इस दौरान कम से कम 4 से 12 बार सांस लेने औऱ छोड़ने का अभ्यास करते रहें और मन में विचार लाएं कि आपके मस्तिष्क एवं शरीर से विकार बाहर निकल रहे हैं। एक बात का ध्यान दे सांसों को रोकें नही और आराम से श्वास का प्रवाह होने दे। तभी आप इसको सही तरीकों से कर पाएंगे और आपको इसका लाभ मिल पाएगा। अब धीरे धीरे ऊपर उठे और वज्रासन की स्थिति में लौट आए। अगर पैरों में दर्द महसूस हो रहा हो तो पैरों को सीधी कर ले अन्यथा कम से कम तीन बार इस आसन की प्रक्रिया को दोहराएं।

बालासन के लाभ

थकान, तनाव दूर करता है। खून के प्रवाह के लय को बनाने में प्रभावी है। तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है। कब्ज में फायदेमंद है। मन को शांत करने में अहम रोल अदा करता है। कूल्हों के लिए लाभाकारी है। विशेष रुप से कमर दर्द राहत प्रदान करनेवाला आसन है। इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर का ऊपरी हिस्सा जमीन की ओर झुकता है इसलिए यह आसन कमर, पीठ और रीढ़ की हड्डी के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। इसके अलावा चक्कर आने की समस्या और रक्त के प्रवाह को भी ठीक रखने में यह आसन सहायक होता है। सर, चिड़चिड़ाहट और मन को शांत रखने में मदद करता है। इसके साथ ही यह पेट के अंगों का मसाज करने एवं उन्हें टोन करने के साथ ही पाचन को बढ़ाने में भी मदद करता है। नियमित रूप से अभ्यास करने से मेरूदंड लचीला व मजबूत बनता है जिससे बुढ़ापे में भी व्यक्ति तनकर चलता है और उसकी रीढ़ की हड्डी झुकती नहीं है। तनाव कम करने और मानसिक तनाव से मुक्ति पाने के लिए इस आसन का अभ्यास करना बहुत ही जरूरी है।

चिकित्सा शास्त्र में तनाव का कारण मस्तिष्क में सिरोटोनीन, नार-एड्रीनलीन तथा डोपामिन आदि न्यूरो ट्रांसमीटर की कमी मानता है। रक्त मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। आपके पूरे शरीर में न्यूट्रिएंट्स, इलेक्ट्रोलाइट्स, हार्मोन्स, हीट और ऑक्सीजन पहुंचाने का काम रक्त ही करता है। यह रक्त के प्रवाह को बनाए रखता है। इस आसन के अभ्यास से पूरा शरीर फिट और सक्रिय रहता है और व्यक्ति काम से थकता भी नही है। स्वास्थ्य का अर्थ विभिन्न लोगों के लिए अलग-अलग होता है। मधुमेह उस चयापचय बीमारी को कहा जाता है, जिसमे व्यक्ति के खून में शुगर (रक्त शर्करा) की मात्रा जरुरत से ज्यादा हो जाती है। यह उसे कम करता है। इसके अलावा यह कंधे और गर्दन के तनाव को दूर करता है और इसको नियमित और सही रूप से करने से महिलाओं को मासिक धर्म में होने वाले दर्द से निजात मिलती है।

बालासन करते समय सावधानियां

पीठ में दर्द हो या घुटने का ऑपरेशन की स्थिति में अभ्यास न करें। गर्भवती महिलाएं शिशु आसन का अभ्यास ना करें। दस्त से परेशान हो या हाल ही में ठीक हुए हो तो यह आसन न करें। कोई व्यक्ति डायरिया से पीड़ित हो तो न करें। उच्च रक्तचाप वाले चिकित्सक से परामर्श लेने के बाद इस आसन को करें। हमेसा ये योग खाली पेट करें। अगर ये पोस्ट आपको पसंद आती है तो आप इसे शेयर अवस्य करें और अपने दुसरे भाइयों और बहनों की मदद करें।

(पेशे से पत्रकार विजय झा, योग को लेकर भी बेहद आग्रही हैं। फिलहाल डीडी न्यूज़ से संबंद्ध हैं।)

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