मनीषा कुलश्रेष्ठ के उपन्यास ‘स्वप्नपाश’ को बिहारी पुरस्कार

नई दिल्ली:

के.के बिरला फाउंडेशन ने वर्ष 2018 के ‘बिहारी पुरस्कार’ के लिए राजस्थान की लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ के 2016 में प्रकाशित हिन्दी उपन्यास ‘स्वप्नपाश’ को चुने जाने की बृहस्पतिवार को घोषणा की।

इस पुस्तक का प्रकाशन वर्ष 2016 है। राजस्थान के जोधपुर में 26 अगस्त 1967 में जन्मीं श्रीमती कुलश्रेष्ठ को पुरस्कार स्वरुप ढाई लाख रुपये की राशि, एक प्रशस्ति पत्र और एक प्रतीक चिन्ह प्रदान किया जाएगा।

फाउंडेशन ने यहां जारी एक विज्ञप्ति में कहा है कि वर्ष 2008-2017 की अवधि में प्रकाशित पुस्तकों पर विचार करने के बाद 2018 के बिहारी पुरस्कार के लिए जयपुर की प्रसिद्ध लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ के हिन्दी उपन्यास ‘स्वप्नपाश’ को चुना गया है।

‘स्वप्नपाश’ मनीषा कुलश्रेष्ठ के पिछले उपन्यासों से एकदम अलग किस्म का उपन्यास है जिसकी नायिका शिजोफ्रेनिया की शिकार है। श्रीमति कुलश्रेष्ठ के कई कहानी संग्रह और उपन्यास छप चुके हैं। हाल ही उनका उपन्यास ‘मल्लिका’ काफी चर्चित हुआ है।

पुरस्कार की शुरूआत 1991 में की गई थी। यह पुरस्कार राजस्थान में जन्में किसी लेखक को दिया जाता है। अब तक नंद किशोर आचार्य, नंद चतुर्वेदी, प्रभा खेतान, विजय दानदेथा, गिरधर राठी आदि को मिल चुका है।

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