राज्यवार अल्पसंख्यकों की परिभाषा तय करे सरकार : संत समिति

वाराणसी:

अखिल भारतीय संत समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश के विभिन्न राज्यों में रह रहे अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए एक स्पष्ट नीति की घोषणा करने और राज्यवार अल्पसंख्यकों की परिभाषा तय करने की मांग की है। अखिल भारतीय संत समिति हिन्दू धर्म की 127 संप्रदायों का अखिल भारतीय प्रतिनिधि संगठन है।

उल्लेखनीय है कि रमजान के दौरान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के साढ़े पांच करोड़ अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं के लिए छात्रवृति की घोषणा की थी। केंद्र के इस फैसले का स्वागत करते हुए संत समिति ने यह मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक पहले केंद्र सरकार को राज्यवार अल्पसंख्यकों की स्थिति निर्धारित करे उसके बाद इस तरह के किसी पहल की घोषणा की जाए।

संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र को मीडिया को जारी किया। पीएम मोदी को लिखे पत्र में समिति ने कहा है कि देश के आठ राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं। उनकी स्थिति दयनीय है। उन राज्यों में हिन्दू भी अल्पसंख्यक होने के कारण दीन हीन, अपमानित और अपेक्षित महसूस करता है। ऐसे में देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति राष्ट्रीय स्तर पर न तय होकर राज्य स्तर पर तय की जाने चाहिए और उसके हिसाब से उनके लिए कल्याणकारी योजनाओं को लागू किया जाना चाहिए।

समिति ने अपने पत्र में मुसलमानों को देश में अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने पर भी प्रश्न खड़े किए हैं। समिति ने कहा है कि दुनिया भर के देशों में तीन से पांच फीसदी आबादी जो अलग धर्म का पालन करती है उसे अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाता है। उससे अधिक की आबादी को बहुसंख्यक आबादी के साथ मूल समाज का हिस्सा मान लिया जाता है।

ऐसी स्थिति का हवाला देते हुए संत समिति ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के 2002 के निर्देश के मद्देनजर केंद्र सरकार को अल्पसंख्यकों से संबंधित 1993 के शासनादेश को रद्द करते हुए नए सिरे से राज्यवार अल्पसंख्यक शब्द को परिभाषित किया जाए।

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