चीन ने भारत-अमेरिका टू प्लस टू वार्ता का स्वागत किया, रक्षा करार पर साधी चुप्पी

बीजिंग: 

चीन ने शुक्रवार को भारत और अमेरिका की पहली टू प्लस टू वार्ता का स्वागत किया लेकिन उस ऐतिहासिक रक्षा करार पर चुप्पी साध ली जिसके तहत भारतीय सेना को महत्वपूर्ण और एन्क्रिप्टिड (कूट रूप से सुरक्षित) अमेरिकी रक्षा प्रौद्योगिकियां मिलेंगी।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की गुरूवार को अमेरिकी विदेश मंत्री माइकल पोम्पिओ तथा रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के साथ पहली टू प्लस टू वार्ता के बाद दोनों देशों ने ‘संचार, संगतता और सुरक्षा समझौते’ (कॉमकासा) पर हस्ताक्षर किये।

कॉमकासा के लागू होने से भारत को अमेरिका से अत्याधुनिक सैन्य संचार उपकरण मिलेंगे। उसे अमेरिका से समय पर कूट रूप में सूचनाएं भी मिल जाएंगी।

भारत-अमेरिका वार्ता और कॉमकासा करार पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, ‘‘भारत और अमेरिका के बीच टू प्लस टू वार्ता के बारे में हमने खबर देखी है। चीन, अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों का सामान्य विकास देखकर खुश हैं और उम्मीद करता है कि द्विपक्षीय संबंधों के विकास की प्रक्रिया में वे क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता में योगदान देने के लिए और अधिक काम करेंगे।’’

हालांकि उन्होंने कॉमकासा के सवाल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

भारत-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री स्वतंत्रता के लिए भारत-अमेरिका के आह्वान के संदर्भ में हुआ ने कहा, ‘‘समुद्र में सुरक्षा नौवहन के बारे में हम अंतरराष्ट्रीय कानून में उल्लेखित कानूनी अधिकारों को कायम रखेंगे और हम यह उम्मीद भी करते हैं कि नौवहन स्वतंत्रता के लिए पक्ष वास्तविक काम करें।’’

टू प्लस टू वार्ता के दौरान भारत और अमेरिका ने स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के विकास की दिशा में आपस में मिलकर काम करने और अन्य साझेदारों के साथ तालमेल कायम करने की कटिबद्धता का प्रदर्शन किया।

टू प्लस टू वार्ता ऐेसे समय में हुई है जब चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी हिंद प्रशांत क्षेत्र में जोर आजमाइश कर रही है। चीन संसाधनों से समृद्ध पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है। वियतनाम, फिलीपीन, मलेशिया, ब्रुनेई और ताईवान भी इस क्षेत्र पर अपना अपना दावा करते हैं।

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