आसान नहीं था ज्योतिर्मयी के लिए पर्यावरण अनुकूल कपड़ों का स्टार्टअप खड़ा करना

चेन्नई:

अपने ख्वाब को हकीकत बनाने का सफर आंध्रप्रदेश की ज्योतिर्मयी दक्कुमल्ला के लिए आसान तो बिल्कुल नहीं था। अपनी भारी-भरकम पैकेज वाली नौकरी छोड़ने का फैसला और फिर एक स्टार्टअप शुरू करने का रपटीला सफर जिसका मकसद 2020 तक 25 करोड़ रुपये की आय करना है, ज्योतिर्मयी के लिए बेहद कठीन रहा।

मध्यम परिवार से आने वाली दक्कुमल्ला देश को पर्यावरण अनुकूल कपड़ों का एक स्रोत केंद्र बनाना चाहती हैं और इसके लिए उन्होंने ‘फैब्रिक मोंड’ शुरू किया है। इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद दक्कुमल्ला ने एक सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी में कनिष्क कार्यकारी के तौर पर काम करना शुरू किया। उसके बाद नौकरी छोड़ अपने सपनों की उड़ान भरने के लिए उन्होंने भारतीय प्रबंधन संस्थान-लखनऊ से एमबीए की डिग्री ली और जल्द ही 21 लाख रुपये वार्षिक के पैकेज पर उन्हें किसी और बड़ी आईटी कंपनी में नौकरी मिल गई।

लेकिन बड़े सपनों को छोटी राहें अच्छी नहीं लगती। इसलिए 30 वर्ष से कम की आयु में उन्होंने अपनी यह नौकरी भी छोड़ दी और खुद की स्टार्टअप कंपनी शुरू की। दक्कुमल्ला कहती हैं, ‘‘यह एक कठिन फैसला था। मेरा परिवार चाहता था कि मैं नौकरी करती रहूं। छह महीने तक उनसे बातचीत करने और उन्हें तैयार करने के बाद मैंने अपनी कंपनी बनाने का फैसला किया और नौकरी छोड़ दी। इस तरह फैब्रिक मोंड 2016 में शुरू हुई।’’

उन्होंने बताया कि स्टार्टअप के अपने विचार को उन्होंने कई संस्थानों को भेजा, लेकिन इसे सहारा मिला आईआईएम-बेंगलुरू से जिसने उन्हें 15 लाख रुपये की शुरूआती वित्तीय मदद दी। उन्होंने कहा, ‘‘पहले इसे बनाया, फिर साथ में और लोग जुड़ते गए। तब आठ लोगों के हमारे समूह ने बेंगलुरू में अपना कार्यालय खोला और काम करना शुरू किया।’’

अभी फैब्रिक मोंड के सदस्यों की संख्या 20 है। इसमें काम करने वालों में आईआईटी, आईआईएम और राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) के स्नातक हैं। कंपनी के ग्राहकों की संख्या 50 तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी योजना 2020 तक अपने ग्राहकों की संख्या 50 से 350 करने और 25 करोड़ रुपये तक आय करने का है।’’

उन्होंने कहा कि उनकी योजना भारत को पर्यावरण अनुकूल कपड़े का एक प्रमुख केंद्र बनाना है। ऐसे कपड़ों के उत्पादन का प्रमुख केंद्र जिनके उत्पादन में पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो।