देवघर: स्थापित हो गया भोलेनाथ का ‘पंचशूल’, महाशिवरात्री में होगा “शिव-शक्ति” का मिलन

उत्तम आनंद वत्स की रिपोर्ट

बैधनाथधाम देवघर (झारखंड) :

देवों की नगरी देवघर को परंपराओं की नगरी भी कहा जाता है। यही वजह है कि, महाशिवरात्री के दौरान यहां की परंपरा विश्वभर में न सिर्फ अनोखी है बल्कि, अनूठी भी है। शिवरात्री के दौरान यहां होने शिव और शक्ति का मिलन भी बड़े ही रोचक तरीके से होता है।

इसी पौराणिक परंपरा के अनुरूप महाशिवरात्री के पूर्व रविवार को वैद्मंयनाथ धाम के शिव मंदिर के गुंबद पंचशूल को उतार कर महाशिवरात्री पूजा की विधि-विधान से शुरुआत कर दी गई। तमाम विधि-विधान के साथ दोबारा भोलेनाथ के पंचशूल को मंदिर के ऊपर स्थापित कर दिया गया है। अब, सोमवार यानि, शिवरात्री के दिन माता पार्वती और महादेव का चारो प्रहर का विवाह संपन्न होगा।

#बैद्यनाथधामदेवघरस्थापित हो गया भोलेनाथ का #पंचशूल#सोमवार यनि, #शिवरात्री के रोज होगा "शिव-शक्ति" का मिलन#Report: #UttamAnandVats

Posted by News Chrome on Sunday, March 3, 2019

क्या है भोलेनाथ के पंचशूल का महत्व?

देवाधिदेव महादेव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग ही एक मात्र ऐसी जगह है जहां मंदिर के शीर्ष पर त्रिशूल नहीं बल्कि, पंचशूल विराजमान हैं। बाकी सभी शिवालयों में बाबा के शीर्ष पर त्रिशूल होता है लेकिन देवघर बाबा मंदिर में पंचशूल है।

बैधनाथधाम मंदिर में महाशिवरात्री के पूर्व पंचशूल पूजा करते तीर्थपुरोहित

कहा जाता है कि अगर किसी कारणवश आप ज्योतिर्लिंग के दर्शन नहीं कर पाते हैं तो आप पंचशूल के दर्शन कर लीजिए आपको भोले बाबा का आशीर्वाद मिल जाएगा। शिवरात्रि के 2 दिन पहले पंचशूल उतारने की अनूठी परंपरा रही है।

#बैधनाथधामदेवघर : #शिवविवाह और #महाशिवरात्री का #पंचशूल से क्या है संबंध ?#देवघर में #त्रिशूल क्यों नहीं, पंचशूल क्यों ? क्या है महिमा ?बता रहे हैं देवघर के तीर्थपुरोहित#Report: #UttamAnandVats

Posted by News Chrome on Sunday, March 3, 2019

साल में सिर्फ इसी दिन मंत्रोच्चारण और विधि पूर्वक पंचशुल उतारा जाता है उसके बाद कई तरह के पूजन विधि के बाद इसे फिर से बाबा मंदिर के शीर्ष पर चढ़ा दिया जाता है। आज पंचशुल उतारा गया और इसे स्पर्श करने और इसके दर्शन ओर स्पर्श के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है।

#बैधनाथधामदेवघर : भोलेनाथ के #पंचशूल का आज #वेदोक्त और #तंत्रोक्त पूजा संपन्न कराते #तीर्थपुरोहित#Report – #UttamAnandVats

Posted by News Chrome on Sunday, March 3, 2019

पंचशूल लगने के बाद होगा शिव-पार्वती का गठबंधन

पौराणिक मान्यताओं को मुताबिक, शिवरात्री के पहले मंदिर के शीर्ष पर लगे पंचशूल के उतरते ही भगवान भोलेनाथ और पांर्वती की शादी को लेकर विधि-विधान की शुरूआत हो जाती है। और फिर दूसरे दिन वैदिक और तंत्र विधि से पंचशूल शीर्ष पर लगा दिया जाता है लेकिन, भोले के भक्त माता सती और भगवान शिव के बीच गठबंधन शिवरात्री के बाद ही कर सकते हैं। यह एक अनूठी परंपरा है जो सदियों से निभाई जा रही है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *