प्रवर्तन निदेशालय ने एसोसिएटेड जर्नल्स को पंचकुला में आबंटित जमीन किया कुर्क

नई दिल्ली:

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एसोसिएटेड जर्नल्स लि. (एजेएल) को पंचकुला में आबंटित भूखंड कुर्क कर लिया है। हरियाणा सरकार ने एजेएल को यह जमीन एक बार निरस्त करने के बाद पुन: 2005 में आबंटित की थी जिसपर कथित रूप से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का नियंत्रण है। जांच एजेंसी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

एजेंसी ने सोमवार को जारी एक बयान में बताया कि एक दिसंबर को मनी लांड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया गया। सीबीआई ने उसी दिन गलत तरीके से एजेएल को भूमि आबंटित करने को लेकर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। ईडी के अनुसार चूंकि गलत तरीकों से आवंटित इस भूखंड का मूल्य ‘‘ अपराध से अर्जित धन/सम्पत्ति के समान है, लिहाजा ईडी ने पीएमएलए कानून के तहत भूखंड को कुर्क कर लिया है।’’

 


 

बयान के मुताबिक तत्कालीन मुख्यमंत्री हुड्डा ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए गलत तरीके से भूखंड का आबंटन एजेएल को किया। यह आबंटन 1982 की दर (91 रुपये प्रति वर्ग मीटर) पर ब्याज के साथ किया गया। हालांकि, इस भूखंड को एजेएल को आवंटित करने के बाद आवंटन को निरस्त कर दिया गया था। भूखंड आवंटन निरस्त होने का काम पूरा हो चुका था ऐसे में कानूनन इसे पुन: आवंटित नहीं किया जा सकता था। ईडी ने कहा कि 2005 में भूखंड का पुन: आबंटन होने से एजेएल को अनुचित लाभ हुआ।

एजेंसी के अनुसार जांच में पाया गया कि मेसर्स एजेएल को उक्त भूखंड पर निर्माण कार्य के लिये तीन बार अनुचित विस्तार दिया गया। बाद में इस जमीन को गिरवी रखकर बैंक से समय-समय पर कर्ज भी लिये गये। सीबीआई ने एक दिसंबर को पंचकुला अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। इसमें गलत तरीके से जमीन एजेएल को आबंटित करने को लेकर हुड्डा समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोती लाल वोरा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किये।

ईडी ने कांग्रेस के दो नेताओं से मामले में पूछताछ भी की है। सीबीआई ने आरोप लगाया कि पंचुकला के सेक्टर-6 स्थित आबंटित भूखंड संख्या सी-17 के पुन:आबंटन से सरकारी खजाने को 67 लाख रुपये का नुकसान हुआ।

यह मामला एजेएल को पंचकुला में 1982 में आबंटित भूखंड से जुड़ा है। यह जमीन हिंदी समाचारपत्र नवजीवन के प्रकाशन के लिये आवंटित की गई थी जिस पर 1992 तक कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। उसके बाद हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने भूखंड को अपने कब्जे में ले लिया। ईडी ने सीबीआई एफआईआर के आधार पर पीएमएलए के तहत मामला 2016 में दर्ज किया था। हरियाणा की भाजपा सरकार के आग्रह पर सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की। मामले में हरियाणा सतर्कता ब्यूरो ने आपराधिक एफआईआर दर्ज की।

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