चेहरा पहचानने की तकनीक स्कूलों को बना सकती है कई गुना अधिक सुरक्षित

नई दिल्ली:

 

हाल में हुए अहमदाबाद स्कूल और गुरुग्राम स्कूल कि घटनाओं ने पूरे देश के जनमानस को हिला दिया है और आम तौर पर स्कूलों को सुरक्षित जगह मान बैठने की सोच को भारी झटका लगा। बच्चों को स्कूल भेजने से पहले हर अभिभावक को ज़ाहिर है कई बार सोचने को मजबूर होना पड़ रहा है। लेकिन अब भी ऐसा नहीं है कि अभिभावक स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर मन में बैठे आशंकाओं से मुक्त गए हों। यही नहीं स्कूल कैंपस के अंदर रैगिंग और बुल्लयिंग (डरा, धमकाकर अपने काम करवाने) की घटनाओं में काफी इजाफा हुआ है। यूजीसी द्वारा बनाए गए नियमों के बावजूद 2017 में 917 केस दर्ज़ किए गए जो कि 2016 के 515 दर्ज केसों से कई ज्यादा है – जबकि इनमें रिपोर्ट न किये गए मामलों का आंकड़ा शामिल नही हैं। ऐसे में नई फेस रिकगनिशन तकनीक (चेहरा पहचानने की तकनीक) काफी हद तक स्कूल प्रबंधकों और अभिभावकों की चिंता दूर कर सकता है और बच्चों को स्कूल में सुरक्षित माहौल दे सकता है।

 

क्या है Face Recognition Technic ?

 

दरअसल चेहरा पहचानने की तकनीक एक सॉफ्टवेयर है जिसकी मदद से हम आने जाने वाले चेहरों को डिटेक्ट कर सकते हैं और अनजान चेहरों को डिटेक्ट करने के साथ ही अलार्म बजा कर सबको अलर्ट कर सकते हैं। स्कूलों के पास मौजूदा सीसीटीवी कैमरे में फेस रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर लग जाता है और आने जाने वालें लोगों के चेहरे डिटेक्ट करके अपने डेटा बेस से मैच करता है और पहचान करने पर उनकी ऑटोमैटिक अटेंडेंस कर सकता है, साथ ही साथ उनके अभिभावकों, क्लास, सेक्शन, उम्र तथा अन्य जानकारी भी दिखा सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ये सॉफ्टवेयर हर दिन छात्रों, अध्यापकों, और कर्मचारियों के चेहरे पढ़ कर सुरक्षा प्रणाली को और पक्का कर लेता है जिससे किसी भी घुसपैठिये या ख़तरे की भनक लगने से पहले डिटेक्ट कर मैनेजमेंट को सूचित कर देता है।

 

स्कूलप्रोटेक्ट स्कूल के प्लेग्राउंड, गैलरीज़, क्लास रूम्स, बस, छत, और उन तमाम जगहों को सिक्योर कर सकता है जहाँ की मॉनिटरिंग करना हर समय मुमकिन न हो। जानकार और न जानने वाले लोगों के अलावा इसका इंटेलीजेंट अलार्म सिस्टम किसी भी घटना से पहले बजकर उसे रोक सकता है – जैसे किसी घुसपैठिये का बिना किसी वज़ह से स्कूल के अंदर होना, बार-बार स्कूल के आसपास चक्कर लगाना, ड्रग्स जैसी खतरनाक चीजों को स्कूल के बच्चों को बेचना या उन्हें इसके लिए उकसाना, किसी वजह से सस्पेंड किये गए या पुराने छात्रों का प्रेमिसेस में घूमने वालों को पहचानना, एग्जाम पेपर्स / रिजल्ट्स या किसी सिक्योर एरिया पर किसी अनाधिकृत व्यक्ति का होना, स्कूल बस के अंदर किसी झग़डे का होना, आदि।

 

इस सोलुशन की सबसे खास बात ये है कि ये सामान्य कैमरों पर भी काफी अच्छा काम करता है।

 

 

दिल्ली एनसीआर में भी जाहिर है इस तकनीक पर आधारित सुरक्षा के ऐसे विकल्पों को तैयार करने की दिशा में कई लोग और संस्थाएं कार्य कर रही हैं। ऐसे ही एक स्कूल प्रोटेक्ट प्रोडक्ड को तैयार करने वाली संस्था शेपहर्ट्ज (ShepHertz) एंटरप्राइजस से न्यूज़ क्रोम ने भी बात की। डिजिटाइजेशन में मदद करने वाला गुरुग्राम स्थित स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित – ‘स्कूलप्रोटेक्ट’ नाम का एक ऐसा सोलुशन तैयार किया है जो फेस रिकॉगनिशन तकनीक के ज़रिए स्कूलों में मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को कई गुना बढ़ा सकता है और स्कूल में घटने वाली अनहोनी घटनाओं को रोकने में मदद कर सकता है।

 

शेपहर्ट्ज के फाउंडर और सीईओ सिद्धार्थ चंदुरकर, अपनी इस प्रोडक्ट के बारे में बताते हैं, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ रिसर्च लैब और मूवीज़ तक ही सीमित नही है। आने वाले वक़्त में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव लोगों के जीवन मे वैसा ही होगा जैसा कि अभी इंटरनेट का है। स्कूलप्रोटेक्ट के ज़रिए हमारी कोशिश है कि बच्चे न सिर्फ स्कूल में बल्कि वहाँ से आते-जाते हुए भी खुद को सुरक्षित समझे। ये तकनीक अभिभावकों और स्कूल मैनेजमेंट को कंट्रोल और बेहतर सुरक्षा मुहैया करवायेगी,”।

 

सिद्धार्थ अपनी इस प्रोडक्ट को दुनिया को और बेहतर और सुरक्षित बनाने की दिशा में अपनी ओर से बहुत छोटा सा योगदान बताते हैं। सिद्धार्थ बताते हैं, “शेपहर्ट्ज एंटरप्राइज एक ऐसा प्लेटफार्म देता है जो उनके ग्राहकों की जरूरतों और अपेक्षाओं को देखते हुए नए फ़ीचर्स और कैंपेन महीनों की जग़ह कुछ दिनों में लांच करने में मदद करता है, वो भी बगैर किसी टेक्निकल टीम की निर्भरता के। शेपहर्ट्ज पर दुनिया के 150 से भी ज्यादा देश के 70,000+ ग्राहक भरोसा करते हैं। Kotak Securities, Edelweiss, Spencer’s, L&T Realty जैसी जानी-मानी कंपनियां भी इसकी सर्विसेज से लाभ उठा रही हैं”।

 

ऐसा नहीं है कि Face Recognition तकनीक स्कूलों में सिर्फ बच्चों को सुरक्षा देने तक ही सीमित है। आने वाले वक्त में इस सोलुशन से बच्चों के हावभाव और इमोशन को पढ़ कर बच्चों के व्यवहार का भी विश्लेषण किया जा सकता है। इससे किसी तकलीफ़ में होने वालों छात्रों, कम समझ में आने वाले सब्जेक्ट्स या क्लास में अटेंटीव न होने वालों छात्रों को कॉउंसलिंग या अन्य तरीकों से उनपर सुधार किया जा सकता है।

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