कैंसर थेरेपी के लिए अमेरिकी जेम्स एलीसन और जापानी तासुकु होन्जो को चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार

स्टॉकहोम:

दो प्रतिरक्षा वैज्ञानिकों (इम्यूनोलाजिस्ट) अमेरिका के जेम्स एलीसन और जापान के तासुकु होन्जो को कैंसर थेरेपी की खोज के लिए चिकित्सा के क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की गई है। ज्यूरी ने सोमवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि एलीसन और होन्जो ने शोध किया है कि कैसे शरीर का स्वाभाविक सुरक्षा तंत्र कैंसर से लड़ सकता है।

कैंसर के ज्यादातर पारंपरिक उपचार में सीधे कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाने पर बल दिया जाता है लेकिन इसके विपरीत एलीसन और होन्जो ने यह पता किया कि कैसे मरीज की अपनी ही प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर से मजबूती से निपटने में मदद पहुंचाई जा सकती है।

नोबेल एसेंबली ने कहा,‘‘जेम्स एलिसन और तासुकु होन्जो को “ऋणात्मक प्रतिरक्षा विनियमन के अवरोध से कैंसर थेरेपी की खोज के लिए” इस सम्मान से नवाजे जाने की घोषणा की गई है। एसेंबली ने स्टॉकहोम में इस पुरस्कार की घोषणा के बाद कहा कि थेरेपी “अब कैंसर के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव कर चुकी है और मूल रूप से जिस तरह सेहम देखते हैं कि कैसे कैंसर का मुकाबला किया जा सकता है।’’

इन दोनों वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज के लिए ऐसी थेरपी विकसित की है जिसमें प्रतिरक्षा अवरोधक थेरेपी कुछ कैंसर कोशिकाओं के साथ साथ इम्यून सिस्टम से बने प्रोटिनों को निशाना बनाती है।

एलीसन टेक्सास विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैं और होन्जो क्योतो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैं। इन दोनों को 2014 में उनके अनुसंधान के लिए अन्य पुरस्कार दिया जा चुका है ।

इन दोनों को नोबेल पुरस्कार के तहत लगभग 10.1 लाख अमेरिकी डॉलर मिलेंगे।

एलीसन और होन्जो को 10 दिसम्बर को स्टॉकहोम में एक औपचारिक समारोह में ये पुरस्कार प्रदान किये जायेंगे।

एलीसन ने कहा कि वह ‘‘इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाकर गौरवान्वित है।’’ उन्होंने कहा,‘‘मैंने ऐसा सपना कभी नहीं देखा था कि मेरा शोध इस दिशा में जायेगा।’’

होन्जो (76) ने क्योतो विश्वविद्यालय में पत्रकारों से कहा,‘‘मैं अपना शोध जारी रखना चाहता हूं ताकि यह प्रतिरक्षा थेरेपी अधिक से अधिक कैंसर रोगियों कीजान बचा सके।’’ उन्होंने कहा,‘‘शीर्ष पर हूं कि मुझे इस तरह का पुरस्कार मिल रहा है। मुझे सच में लगता है कि मैं एक भाग्यशाली व्यक्ति हूं।’’

नोबेल ज्यूरी ने कहा कि 100 से अधिक वर्षों के लिए, वैज्ञानिकों ने कैंसर के खिलाफ लड़ाई में प्रतिरक्षा प्रणाली को शामिल करने का प्रयास किया।’’

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