पूर्व छात्रों ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिख कर आईआईएमसी में फीस वृद्धि की निंदा की

नई दिल्ली:

भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के पूर्व विद्यार्थियों ने दस साल के अंदर ही फीस में 100 फीसदी की वृद्धि की आलोचना करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखा है और इस बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की है।

आईआईएमसी में विद्यार्थियों ने फीसवृद्धि को लेकर पिछले सप्ताह आंदोलन शुरू किया था। संस्थान के 120 पूर्व विद्यार्थियों ने प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव को पत्र लिखा है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव आईआईएमसी सोसायटी के अध्यक्ष भी हैं। यही सोसायटी संस्थान का संचालन करती है। इस चिट्ठी की एक प्रति संस्थान के महानिदेशक को भी भेजी गयी है।

पूर्व विद्यार्थियों ने पत्र में लिखा है कि एक दशक में ही पत्रकारिता पाठ्यक्रमों और क्षेत्रीय भाषा पाठ्यक्रमों की फीस में शत प्रतिशत वृद्धि भारत में सरकार संचालित किसी भी संस्थान के मापदंड पर खरा नहीं उतर रहा है।

आईआईएमसी ने आठ दिसंबर को एक बयान जारी कर कहा था कि यह वित्त पोषित संस्थान नहीं है लेकिन उसकी वेबसाइट कहती है कि यह ऐसा ही संस्थान है।

पूर्व विद्यार्थियों ने कहा कि यह बड़ा स्तब्धकारी है कि आईआईएमसी सरकार द्वारा वित्तपोषित संस्थान से एक ऐसे संस्थान में तब्दील हो गया है जिसे फंड का एक तिहाई अपने अंदरूनी राजस्व से जुटाना होगा।

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