पत्नी की हत्या के मामले में पूर्व टीवी एंकर सुहैब इलियासी बरी

नई दिल्ली:

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पूर्व टीवी एंकर एवं निर्माता सुहैब इलियासी को उनकी पत्नी की हत्या के 18 साल पुराने मामले में शुक्रवार को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन का मामला प्रमाणित नहीं किया जा सका।

न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने 52 वर्षीय इलियासी की अपील मंजूर कर ली। इलियासी ने अपनी पत्नी अंजू की हत्या के मामले में अपनी दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को चुनौती दी थी।

पीठ ने कहा कि इस बारे में कोई सबूत नहीं है कि इलियासी ने जानबूझ कर अपनी पत्नी को चिकित्सीय सहायता पहुंचाने में देर की थी, जिन्हें पहले तो एक निजी अस्पताल में ले जाया गया और फिर एम्स ले जाया गया था। एम्स में अंजू को मृत घोषित कर दिया गया था।

क्या हुआ था अंजू इलियासी के साथ 10-11 जनवरी 2000 की रात को

गौरतलब है कि यह घटना 10-11 जनवरी 2000 की दरमियानी रात की है, जब अंजू को चाकुओं के घाव को लेकर एक अस्पताल ले जाया गया। ये घाव उन्हें उनके पूर्वी दिल्ली स्थित आवास में लगे थे।

निचली अदालत ने सुनाई थी आजीवन कारावास की सजा

एक निचली अदालत ने अंजू की चाकू मार कर हत्या करने के आरोप में 20 दिसंबर 2017 को इलियासी को आजीवन करावास की सजा सुनाई थी और कहा था कि उन्होंने हत्या की और इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की। निचली अदालत ने इलियासी पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था और मुआवजा के तौर पर अंजू के माता-पिता को 10 लाख रुपये देने को कहा था।

पीठ ने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया और कहा कि अभियोजन हत्या के अपराध में उनके दोष को साबित करने में नाकाम रहा है। इसलिए कुछ अन्य मामले में उनके वांछित नहीं रहने पर उन्हें रिहा किया जाएगा।

इंडियाज मोस्ट वांटेड से सुर्खियों में आए थे इलियासी

इलियासी अपराध पर आधारित कार्यक्रम ‘इंडियाज मोस्ट वांटेड’ से सुर्खियों में आए थे।

अदालत के फैसला सुनाए जाने के वक्त वहां मौजूद इलियासी की बेटी आलिया ने इस फैसले पर खुशी जताई और कहा कि उसे हमेशा से अपने पिता पर भरोसा था।

फैसला सुनाने से पहले पीठ ने सवाल किया, ‘‘क्या अपील करने वाले ने अपनी पत्नी की हत्या की थी, या यह आत्महत्या का मामला था? ’’

पीठ ने कहा कि निचली अदालत ने कहा था कि इलियासी ने हत्या की। ‘‘हालांकि, हम ऐसा नहीं सोचते।’’

पीठ ने अपने 112 पृष्ठों के फैसले में कहा कि परिस्थितियों की श्रृंखला में शामिल एक अहम कड़ी को अभियोजन साबित नहीं कर सका।

अदालत ने कहा कि फोरेंसिक साक्ष्य भी आरोपी को हत्या से उस तरीके से नहीं जोड़ता है, जैसा अभियोजन ने दावा किया था। अपराध का मकसद भी साबित नहीं पो पाया।

इलियासी ने अपने वकील राजीव मोहन के जरिए दायर अपील में दावा किया कि घटना के बाद पुलिस ने तीन महीने में कोई भी चीज एकत्र नहीं की और हत्या के अपराध के लिए उनपर आरोप लगाने के लिए कोई सबूत नहीं था।

इलियासी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 304 बी (दहेज हत्या) सहित हल्के प्रावधानों के तहत आरोप लगाये गये थे।

अंजू की मां रूकमा सिंह और बहन रश्मि सिंह ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसने अगस्त 2014 में आदेश दिया कि पूर्व टीवी निर्माता के खिलाफ हत्या के अपराध के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मुकदमा चलाया जाए।

इलियासी को 28 मार्च 2000 को गिरफ्तार किया गया था।

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