महिलाओ के लिए वरदान है “गर्भासन ” !

प्रवीण झा

“गर्भासन ” में शरीर का बनावट गर्भ में पल रहे बच्चे की आकृति के जैसे हो जाती है इसलिए इस आसन को गर्भासन कहा जाता है।

गर्भासन करने की सही विधि :-

सबसे पहले हम पद्मासन लगा कर बैठे । फिर दोनों जन्धा और पिंडलियों के बीच से बारी- बारी कर के अपनी दोनों हाथों को बाहर निकाले जब तक की कोहनी तक के भाग बाहर ना आ जाय । जब कोहनी तक का भाग बाहर आ जाए तो अपनी शरीर को संतुलित करते हुए सांस बाहर की ओर छोड़े और फिर एक – एक कर के हाथों से दोनों कानो को पकड़े। अंतिम स्थिति में 30 सेकेंड से लेकर पांच मिनट तक अपनी क्षमतानुसार बने रहे। फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिती में आ जाए। यह आपका एक चक्र पूरा हुआ। इस क्रिया को 3 से 5 बार रोजना किया जा सकता है।

गर्भासन के लाभ :-

● यह आसन को करने मात्र से शरीर का हर अंग का व्यायाम हो जाता है !
● शरीर में ऊर्जा का संचार होता है थकान दूर होता है
● शरीर में हल्कापन का एहसास होता है
● रक्त का बहाव पूरे शरीर में सुचारु रूप से चलता है जिससे हमारी शरीर में विजयता द्रव इकठ्ठा नही होता
● रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी को भी रोकता हैं !
● सभी प्रकार के चर्म रोग को भी रोकने का काम करता है
● शरीर बलशाली होता है, रीढ़ की हड्डीयो को मजबूती मिलती है
● यह आसन महिलाओ के लिए बहुत ही लाभप्रद है
● 12 वर्ष की लडकिया अगर इस आसन का अभ्यास करे तो उसे जीवन में कभी भी गर्भाशय जनित बिमारियों का सामना नही करना पड़ेगा
● नियमित रूप से यह आसन करने से महिलाओ को शिशु जन्म के समय ज्यादा दर्द का समाना नही करना पड़ेगा
● महिला शिशु जन्म के 40 दिन बाद इस आसन का अभ्यास आरम्भ करें, तो उसके शरीर मे आए कमी को जल्दी से दूर करने में मददगार साबित होता है
● दम्पति जीवन में हर प्रकार की कमियो दूर करता है
● बुढ़ापा को भी रोकता है यह आसन
● चेहरे पर आ रही झुरिया को भी रोकता हैं !
● मन को शान्त रखता हैं , उत्तेजित नही होने देता
● मन की एकाग्रता और ध्यान शक्ति को बढता है

गर्भासन में सावधानियाँ :-

● उच्च रक्तरक्तचाप वाले व्यक्ति ना करे ये आसन
● कमर , कन्धे या घुटने दर्द वाले व्यक्ति को इस आसन का अभ्यास नही करना चाहिए
● गर्भ धारण की हुई महिलओ को यह आसन वर्जित हैं !
● इस आसन का अभ्यास शिशु जन्म के 40 दिन बाद किया जा सकता हैं

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