राष्ट्रपति शी के साथ हुई ‘बेहद सार्थक’ मुलाकात: पीएम मोदी

बिश्केक:

किर्गिजस्तान की राजधानी बिश्केक में चल रहे शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिंनफिंग ने बृहस्पतिवार को मुलाकात कर भारत – चीन द्वीपक्षीय संबंधों पर चर्चा की।

मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने यहां एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से अत्यंत सार्थक मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण आयाम पर उनसे चर्चा की।

उन्होंने आर्थिक एवं सांस्कृतिक संबंधों में सुधार के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। पिछले महीने लोकसभा चुनाव में जीत के उपरांत मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद दोनों नेताओं की बृहस्पतिवार को पहली मुलाकात हुई।

संयुक्त राष्ट्र की ओर से जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के एक महीने बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाकात हुई है। चीन ने लंबे समय से भारत के इस मांग पर अपनी ओर से तकनीकी रोक लगाता रहा था।

राष्ट्रपति शी के साथ अत्यंत सार्थक मुलाकात : पीएम मोदी

राष्ट्रपति शी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के बाद मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ अत्यंत सार्थक मुलाकात की। हमारी बातचीत में भारत-चीन संबंध पूरे विस्तार से शामिल थे। हम अपने बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को सुधारने में मिलकर काम करते रहेंगे।’’

बैठक की शुरूआत में राष्ट्रपति शी ने प्रधानमंत्री मोदी को उनकी चुनावी विजय पर बधाई दी। प्रधानमंत्री ने जवाब में कहा, ‘‘भारत में चुनाव परिणाम के बाद मुझे आपका संदेश मिला और आज एक बार फिर आप जीत पर मुझे बधाई दे रहे हैं। मैं इसके लिए आपका बहुत आभारी हूं।’’ शी ने पिछले महीने आम चुनाव जीतने पर मोदी को बधाई दी थी। परिणामों की आधिकारिक घोषणा से पहले ही चीनी राष्ट्रपति का बधाई संदेश किसी विदेशी नेता के लिहाज से दुर्लभ ही था।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने 15 जून को 66 वर्ष के होने जा रहे शी को बधाई देते हुए उनसे कहा, ‘‘सभी भारतीयों की ओर से मैं आपके जन्मदिन पर बहुत सारी शुभकामनाएं देता हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि आपने कहा, आने वाले दिनों में हम दोनों कई विषयों पर आगे बढ़ सकते हैं। हम दोनों को और अधिक काम करने के लिए एक साथ कार्यकाल मिला है।’’

मोदी ने अपने प्रारंभिक उद्बोधन में शी से कहा, ‘‘वुहान में हमारी मुलाकात के बाद हमने अपने सबंधों में नयी रफ्तार और स्थिरता देखी है। दोनों पक्षों में रणनीतिक संवाद में तेज प्रगति हुई है, जिसकी वजह से दोनों एक दूसरे की चिंताओं और हितों को लेकर अधिक संवेदनशील हुए हैं। और उसके बाद से सहयोग बढ़ाने के नये क्षेत्र बने हैं।’’

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी की 2018 में वुहान में हुई मुलाकात को 73 दिन तक चले डोकलाम गतिरोध की वजह से तनावपूर्ण हुए रिश्तों में सहजता लाने का श्रेय दिया जाता है। वुहान वार्ता के बाद दोनों देशों ने सैन्य संबंधों समेत विभिन्न क्षेत्रों में रिश्तों को सुधारने के प्रयास तेज कर दिये थे। दोनों नेता पिछले पांच साल में 10 बार से ज्यादा मिल चुके हैं।

राष्ट्रपति शी अगली अनौपचारिक वार्ता के लिए इस साल आएंगे भारत : विदेश सचिव गोखले

दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से राष्ट्रपति शी से अपनी बात कही और उन्होंने सहमति जताई कि दोनों पक्षों को संबंधों से अपेक्षाएं बढ़ाने की जरूरत है। राष्ट्रपति शी ने इस साल भारत में अपनी अगली अनौपचारिक वार्ता के लिए आने की पुष्टि की।

गोखले ने कहा कि दोनों पक्षों ने अपने कूटनीतिक संबंधों के 70 साल पूरे होने के मौके को उचित तरीके से मनाने पर सहमति जताई। दोनों देश 35-35 समारोह आयोजित करेंगे। मोदी और शी ने कहा कि उन्हें जून में जापान के ओसाका में जी20 सम्मेलन समेत बहुपक्षीय सम्मेलनों में मुलाकात के और अवसर मिलेंगे।

बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति शी ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि भारत और चीन को मतभेदों को सही से संभालकर सहयोग को गहन करना चाहिए। शी ने कहा कि दोनों देशों को आपसी विश्वास को गहरा करना चाहिए, सहयोग पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए तथा मतभेदों को सही तरीके से संभालना चाहिए।

जटिल सीमा मुद्दे पर उन्होंने कहा, ‘‘हमें सीमा मुद्दे तथा अन्य प्रणालियों पर विशेष प्रतिनिधियों की मुलाकात का सही इस्तेमाल करने की तथा विश्वास निर्माण के कदमों को मजबूत करने एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायित्व बनाये रखने की जरूरत है।’’

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