हलासन: महिलाओं में जनन संबंधी समस्याओं को दूर करने में सहायक

विजय झा

हलासन संस्कृत के दो शब्दों हल और आसन के मेल से मिलकर बना है। हलासन एक ऐसा आसन है जिसे करते समय हल के समान एक आकृति बनती है। इसीलिए इसे हलासन कहते हैं। इस आसन को करने से स्वास्थ्य को कई बड़े फायदे होते हैं लेकिन विशेषरूप से महिलाओं में जनन संबंधी समस्याओं को दूर करने में यह आसन बहुत उपयोगी माना जाता है।

हलासन विधि और तरीका

पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों हाथों को भी बिल्कुल आराम की मुद्रा में जमीन पर सीधे रखें। धीरे-धीरे लंबी सांस लेते हुए पेट की मांसपेशियों के सहारे अपने पैरों को मोड़े बगैर पहले 30 डिग्री पर, फिर 60 डिग्री पर और उसके बाद 90 डिग्री पर उठाएं। सांस बाहर छोड़ते हुए अब अपने पैरों को सिर के ऊपर से ले जाते हुए 180 डिग्री के कोण पर मोड़े जब तक कि आपके पैरों की उंगलियां छू से नहीं छू जाती हैं। अंतिम स्थिति में पहुंचने पर धीरे धीरे सांस लें और धीरे धीरे सांस छोड़े। एक मिनट से लेकर पांच मिनट तक इस अवस्था में रह सकते है। लेकिन शुरूआत में अपनी क्षमतानुसार इसे करे।

आसन को करते वक्त किसी तरह से जोर जबरदस्ती न करे नही तो मांसपेशियों में खिचांव आ सकता है और लेने के देने पड़ सकता है। इसलिए सावधानी जरूर बरते। अब आहिस्ता आहिस्ता अपने शुरूआती अवस्था में आ जाए। एक चक्र या राउंड पूरा हुआ। इसे आप 3-5 बार दोहरा सकते है।

हलासन से पहले करने वाले आसन

हलासन से पूर्व सर्वांगासन

सेतु बंधासन

हलासन के लाभ —

पेट की चर्बी कम करने में:

इस आसन के नियमित अभ्यास से आप अपने पेट की चर्बी को कम कर सकते हैं।

थयरॉइड के लिए:

यह थयरॉइड एवं पारा थयरॉइड ग्रंथि के लिए बहुत ही मुफीद योगाभ्यास है। यह मेटाबोलिज्म को कण्ट्रोल करता है और शरीर के वजन पर नियंत्रित रखते हुए आपको बहुत सारी परेशानियों से बचाता है।

अपच और कब्ज, मधुमेह, बवासीर, गले के विकारों, सिर दर्द में लाभकारी है।

गर्दन, कंधे और पीठ की मांसपेशियां मजबूत होगीं।

पेट की मांसपेशियों के लिए भी अच्छा होता है। पेट के अंदरूनी अंगों और थॉयराइड की ग्रंथियों उत्तेजित होती है।

इम्यून सिस्टम को भी ठीक रखता है। तनाव और थकान की समस्या भी कम होती है।

आसन महिलाओं में मेनोपॉज के लक्षणों से भी राहत प्रदान करता है।

पाचन क्षमता बढ़ती है और भूख की परेशानी से छुटकारा मिलता है।

ब्लड ग्लूकोज का स्तर सामान्य रहता है और यह आंतरिक अंगों को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए भी उत्तेजित करता है।

यह आसन प्रजनन अंगों को उत्तेजित करने के लिए भी अच्छा माना जाता है।

पैर की मांसपेशियों को बल और लचीलापन मिलता है।

हलासन करते समय बरतें सावधानियां

अगर आप हॉर्निया, साटिका, ह्रदय रोग, अर्थराइटिस और गर्दन के दर्द, श्वसन से जुड़ी कोई बीमारी, अस्थमा, उच्च रक्तचाप, डायरिया से पीड़ित हैं तो यह आसन नहीं करना चाहिए। साथ ही गर्भवती महिलाओं, सर्वाइकल स्पॉण्डिलाइटिस से पीड़ित व्यक्तियों, पीरियड के दौरान महिलाओं और पीठ के दर्द के रोगी यह आसन नहीं करना चाहिए।

हलासन के बाद भुजंगासन करने से ज्यादा लाभ मिलते है।

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