कैसे एक कुत्ते ने दुनिया पर खिलाफ़त के सपने को मिट्टी में मिला दिया

गोविंद पराशर

वर्षों से अमेरिकी खुफिया तन्त्र और #आईएसआईएस के सरगना #अबूबकरअलबगदादी के बीच लुकाछिपी का खेल चल रहा था। कई बार #बग़दादी के मारे जाने और घायल होने की ख़बरें हवा में उड़ी लेकिन बगदादी दुनिया के सामने फिर से प्रकट हो कर इन ख़बरों की हवा निकाल देता। बगदादी के सर पर रखा गया ईनाम एक करोड़ डॉलर से बढ़ाकर ढाई करोड़ डॉलर कर दिया गया।

आसमानी आँख की विफलता के बाद इंसानी मुखबिरी ही काम आयी

निगरानी उपग्रह, कम्यूनिकेशन इंटरसेप्शन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित सभी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग करने के बावजूद एजेंसियों को कामयाबी नहीं मिल पा रही थी क्योंकि बगदादी ने मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप जैसी किसी भी चीज़ का प्रयोग करना बंद कर दिया था। आखिरकार सफलता मिली मुखबिरी के उसी पारंपरिक तरीक़े से जिसका प्रयोग कर अमेरिका ने पाकिस्तान के एबटाबाद में अलक़ायदा के सरगना और बगदादी के बॉस ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप सहयोगियों के साथ बगदादी के खिलाफ अभियान की निगरानी करते हुए
फोटो : व्हाइट हाउस

आसमानी आँख की विफलता के बाद इंसानी मुखबिरी ही काम आयी। पिछले वर्ष अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने बगदादी के एक निकट सहयोगी इस्माईल-अल-इथावी को गिरफ़्तार किया। उसके कुछ दिनों बाद इराक़ की सीमा से बगदादी के एक निकट सहयोगी की पत्नी और एक कुरियर को पकड़ा गया। उनसे बगदादी के ठिकानों की पुख़्ता जानकारी हासिल की गई। उस जानकारी के आधार पर #CIA सहित इराक़ी और कुर्द इंटेलिजेंस अधिकारियों ने बगदादी के ठिकानों और आवाजाही के रास्तों पर एजेंट तैनात किए। बगदादी पर फंदा कसता गया। प्रत्येक ठिकाने और आवाजाही के रास्तों की रेकी की गई। पाँच महीने तक पल पल की निगरानी कर मैपिंग की गई ।इसी दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने बगदादी के इनर सर्किल में सेंध लगा दी।

पांच महीने तक पल पल निगरानी के बाद अंजाम तक पहुंचाने की तैयारी हुई शुरु

अब बगदादी को अंजाम तक पहुँचाने की तैयारियां शुरू हो गई। टैम्पा, फ़्लोरिडा में स्थित US स्पेशल ऑपरेशंस कमांड के हेडक्वार्टर में बगदादी के ख़ात्मे की योजनाओं पर विमर्श होने लगा। इराक़, सीरिया, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, यमन आदि जगहों पर तैनात अमेरिकी ड्रोनों के उपयोग सहित उपलब्ध अन्य समस्त विकल्पों पर विचार किया गया। अंततः लादेन का सफलतापूर्वक ख़ात्मा करने वाली नेवी सील और स्पेशल फोर्सेस को ही ज़मीन पर उतारने की सहमति बनी। नेवी सील और स्पेशल फोर्सेस ने कई बार ऑपरेशन के लिए रिहर्सल की।

रविवार की शाम पाँच बजे #POTUS की हरी झंडी के बाद ये अभियान शुरु हुआ। ट्रम्प खुद उपराष्ट्रपति माइक पेंस के साथ छह हज़ार मील दूर व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में इस ऑपरेशन पर लगातार नज़र बनाए हुए थे। आधी रात को इराक़ के इरबिल एयरफील्ड से आठ अपाचे और #CH47 चिनूक हेलीकॉप्टरों ने उड़ान भरी। इसमें डेल्टा फ़ोर्स के 50 से 100 स्पेशल ऑपरेटर्स और एक विशेष प्रशिक्षित कुत्ता शामिल था।

Pic Courtesy : Institute for the Study of War

ऑपरेशन का टार्गेट था सीरिया के पश्चिमोत्तर में इडलिब शहर के निकट बरिशा गांव

इनका लक्ष्य था टर्की की सीमा पर सीरिया के पश्चिमोत्तर में इडलिब शहर के निकट बरिशा गाँव, जहाँ बगदादी अपने अंगरक्षकों और बच्चों के साथ रात बिताने के लिए रुका हुआ था। चूंकि ये उड़ान क्षेत्र रूस के नियंत्रण में है इसलिए मूवमेंट के बारे में रूस को पहले ही बता दिया गया था। हालाँकि अभियान की जानकारी रूस के साथ साझा नहीं की गई थी। अन्य किसी भी तरह की निगरानी में आने से बचने के लिए 70 मील की दूरी तय करने के दौरान हेलीकॉप्टरों की ऊँचाई बहुत ही कम रखी गई। जासूसों के वर्णन और मानवरहित अमेरिकी निगरानी विमानों और उपग्रहों द्वारा खींची गयी तस्वीरों के आधार पर अपाचे हेलीकॉप्टरों ने स्पेशल फ़ोर्स के कमांडोज को बगदादी के कंपाउंड के बाहर उतार दिया।

वो जगह जहां बगदादी को घेर कर मारा गया

सबसे पहले कमांडोज़ ने कंपाउंड को क्षतिग्रस्त किया। इसके बाद तय प्रक्रिया का पालन करते हुए कमांडोज ने आतंकवादियों को आत्मसमर्पण करने को कहा। बगदादी और उसके कुछ साथियों को छोड़कर बाक़ी लोगों ने आत्मसमर्पण कर भी दिया।उसके बाद कमांडो घर के भीतर घुस गए। बूबी ट्रैप में फँसने की आशंका के कारण सावधानी बरतते हुए कमांडोज ने घर में प्रवेश करने के लिए दरवाज़े और खिड़कियों के रास्ते घुसने की बजाय विस्फोट कर दीवारों में छेद का प्रयोग किया।

मौत को सामने देख कर बगदादी भागा, कुत्ते के आगे गिड़गिड़ाया

मौत को सामने देख बगदादी भाग खड़ा हुआ। कमांडोज ने पीछा किया। भागते हुए बगदादी एक ऐसी गुफा में घुस गया जिसमें से निकलने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था। कमांडोज ने बगदादी की गुफा में #कोनन नाम के कुत्ते को छोड़ दिया। गुफा में कोनन के सामने फँसा बगदादी रो रहा था, चिल्ला रहा था और गिड़गिड़ा रहा था। और अंत में दुनिया पर खिलाफ़त के सपने देखने वाले स्वयंभू ख़लीफ़ा ने एक कुत्ते के डर से शरीर में बँधी विस्फोटकों से भरी जैकेट में विस्फोट कर ख़ुद को अपने तीन बच्चों के साथ 72 हूरों के पास पहुँचा दिया।

आतंक का सरगना : अबु बकर अल बगदादी

बग़दादी की पहचान साबित करने के लिए कमांडोज ने लाशों से जेनेटिक सैंपल लिए और दो घंटे में अत्याधुनिक तकनीक से डी एन ए टेस्ट कर ये सुनिश्चित कर दिया की मरने वाला बगदादी ही है। कमांडोज ने महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और सूचनाएँ भी ज़ब्त की। जिसके आधार पर ISIS का एक प्रवक्ता मार गिराया गया है। ऑपरेशन पूरा होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्विटर पर दुनिया को कुछ बड़ा हुआ है ऐसे संकेत दिए और अगले दिन बग़दादी के मारे जाने की औपचारिक घोषणा की। ऑपरेशन के दौरान कोनन के साथ साथ दो कमांडोज भी घायल हुए लेकिन अब सब सुरक्षित हैं।

अभियान का कोड नाम कायला म्यूलर क्यों रखा गया?

इस अभियान का कोड नाम #कायलाम्यूलर रखा गया था। कायला म्यूलर एक अमेरिकी समाजसेवी थी जिनका सीरिया के अलेप्पो से 2013 में ISIS ने अपहरण कर लिया था। बगदादी के साथी अबू सय्याफ ने म्युलर को सेक्स गुलाम के तौर पर खरीद लिया। अबू सय्याफ के घर पर बगदादी ने म्युलर को देखा और अपने कब्जे में ले लिया। बगदादी अब म्युलर का मालिक हो गया और अबू सय्याफ और उसकी बीवी नसरीन असद इब्राहिम बहर म्युलर के चौकीदार की भूमिका में आ गए। कायला म्युलर की कहानी बहुत हद तक #मारिया के ऐतिहासिक चरित्र से मिलती है। बाद में कई बार ISIS के आतंकवादियों ने म्युलर का बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी।

इस पूरे ऑपरेशन में सीरिया और इराक़ के कुर्दों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी। खुफियागीरी से लेकर ज़मीनी मदद तक कुर्दों ने उपलब्ध कराई। यहाँ तक कि बगदादी के इनर सर्किल को भेदने वाला कुर्दिश एजेंटऑपरेशन के दौरान भी अमेरिकी कमांडोज के साथ शामिल था। कुर्द इलाकों से अमेरिकी बलों की वापसी की घोषणा के बाद कुर्दों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। बगदादी के मारे जाने के बाद कुर्दों पर ख़तरा और बढ़ गया है क्योंकि ISIS बगदादी की मौत का बदला लेने के लिए निश्चित तौर पर पलटवार करेगा।

पूरे ऑपरेशन में खास भूमिका रही बेल्जियन मेलिनोइस नस्ल के कुत्ते कोनन की

इस ऑपरेशन में शामिल #बेल्जियन मेलिनोइस नस्ल के इस कुत्ते का नाम #कोनन है। इस नस्ल के कुत्ते जर्मन शेफर्ड से थोड़े छोटे लेकिन बहुत तेजतर्रार होते हैं। अमेरिकी फोर्सेज कई ऑपरेशन्स में इस नस्ल के प्रशिक्षित कुत्तों का इस्तेमाल करती है। ओसमा बिन लादेन को मारे जाने वाले अभियान #नेप्च्यूनस्पीयर में भी इसका उपयोग हुआ था। इनके महत्व के कारण इनकी रैंक नॉन कमीशंड ऑफिसर के बराबर और अपने हैंडलर से ऊँची होती है।

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