राजा शिवि के देश भारत की पड़ोसियों को मदद करने की पहल, कूटनीतिक बिसात पर एक बेहद संवेदनशील दांव

भास्कर

वैश्विक आपदा घोषित हो चुके नॉवेल कोरोना वायरस या कोविड-19 के चपेट में भारत सहित कमोबेश सैकड़ो देश आ चुके है। दुनिया भर में विषाणुविद, शरीर क्रिया विज्ञान के विशेषज्ञ, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के वैज्ञानिक के साथ राजनेता इस महामारी से जूझने के लिये के अपने अपने स्तर पर कार्य कर रहे है।

इसी कड़ी में भारत ने “वसुधैव कुटुम्बकम'” और नेबरहुडफर्स्ट की संकल्पना को एक बार फिर पूरे विश्व मे साबित करते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सार्क देशों के साथ इस महामारी से निजात पाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई। अपने ट्वीट संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा

प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट के जवाब में पाकिस्तान को छोड़कर अन्य सभी सातों देशों ने प्रधानमंत्री के इस पहल को सिर आंखों पर लिया।

गौरतलब है कि चीन के वुहान से उपजे इस विषाणु के पैरेंट कन्ट्री समझे जाने वाले चीन की चुप्पी बेहद निराशाजनक रही है। ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी वाले चीन की कोविड-19 पर अकर्मण्यता संपूर्ण विश्व को बेहद खली है पर इससे इस निष्ठुर देश को कोई फर्क नहीं पड़ा है।

प्रधानमंत्री मोदी 15 मार्च को सायं पांच बजे सार्क राष्ट्राध्यक्षों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये एक दूसरे से मुख़ातिब होंगे।

इससे पहले वे नेपाल और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री से भारत द्वारा निर्मित,समर्थित और प्रायोजित विभिन्न “मैत्री” परियोजना में अपनी मन की बात साझा कर चुके हैं।

यथार्थवादी राजनय 2.0

यह पहला मौका होगा जब भारत की अगुआई में सार्क देशों के प्रमुखों के साथ कुछ इस तरह विशेष वार्तालाप को क्रियान्वित किया जाएगा।

वैश्विक आपदा की इस घड़ी में कूटनीतिक और राजनयिक हलकों में भारत के इस प्रस्ताव को बेहद संवेदनशील,संजीदगी और उत्सुकतावश नजरिये से देखा जा रहा है क्योंकि अमेरिका सहित कोविड 19 से त्रस्त देश पहले खुद को बचाने की पुरजोर कोशिशों में जुटे हुए हैं वहीं कोविड 19 की चपेट में आने के वावजूद राजा शिवि के देश भारत ने अपने पड़ोसियों को मदद करने की पहल कर कूटनीतिक बिसात पर एक बेहद संवेदनशील दांव चल दिया है जिसकी काट इस कोविड 19 के लाइलाज बीमारी की तरह होगी, फिलहाल जिसकी कोई दवा उपलब्ध नहीं है। कूटनीति और राजनय के तेजी से रंग बदलते रंगमंच पर इस भारतीय दांव पर फिलहाल सब नतमस्तक हैं। पाकिस्तान के सदाबहार मित्र चीन सहित अन्य देशों के विशेषज्ञ भारत के इस पहल की काट ढूंढने में अपना वक़्त जाया कर रहे है।

भारत की सार्क सहित अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ बेहद संजीदगी भरी रणनीति रही है जिसे भारतीय विदेश नीति की शेरपा और यथार्थवादी राजनय की नेतृत्वकर्ता और पूर्व विदेशमंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज ने व्यक्त करते हुए कहा था, भारत इस क्षेत्र में “बिग ब्रदर नहीं एल्डर ब्रदर” के रूप में है और रहेगा।

आज मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति ,निरंतरता और यथार्थवादी सोच लिए भारत ने इस सिद्धांत को न सिर्फ “कह कर” बल्कि “कर के”दिखा दिया है। वैश्विक परिदृश्य में भारत एक मात्र ऐसा देश है जो विभिन्न इलाकों और देशों से अपने नागरिकों सहित अन्य मित्रदेश और उनके नागरिकों को सुरक्षित एयरलिफ्ट कर एक नई राजनयिक नजीर पेश की है। भारत सम्पूर्ण एशिया और इंडो पैसेफिक क्षेत्र का नैसर्गिक रूप से नेतृत्वकर्ता है। इस संकल्पना पर किसी को रत्ती भर संदेह नहीं होना चाहिए।

पाकिस्तान, टर्की , इंडोनेशिया, मलेशिया और ईरान आदि देशों ने हालिया दिल्ली में भड़के हिंसा पर जिस तरह अपनी क्षमताओं से परे जाकर भारत की आंतरिक मसले और संप्रभुता पर टिप्पणी किया और विदेश मंत्रालयों के सक्षम अधिकारियों ने जिस कदर वैश्विक मंचो पर इन देशों के कार्टल को प्रभावी जवाब दिए वह कायदे तारीफ़ है।

भारत: आल टाइम फर्स्ट रेस्पांडर

भारत की विदेश नीति और उसकी रणनीतिक, कूटनीतिक और राजनय की बहुपक्षीय व्यस्ताओं के वावजूद इस काल सरीखी कोविड19 से निपटने के लिये भारत ने जिस सुगमता के साथ अपने कदम उठाये है वह निश्चित रूप से उसके जिम्मेदार और फर्स्ट रेस्पांडर की अवधारणा पर मुहर लगाता है।

कोविड19 की तेजी से ध्वस्त होती वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेजी से गिरते शेयर बाजार, अमेरिकी राष्ट्रीय आपातकाल और क्षण प्रतिक्षण बदलते राजनीति परिदृश्य में भी अन्य सभी बातों को ताक पर रखते हुए भारत बुद्ध के शांति और मानवतावादी राह को अमल करते हुए क्षेत्र में इस महामारी से निपटने के लिए अगुआ बनने की सोचना ही भारत के दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।

जहाँ चीन सहित अन्य ट्रिलियन डॉलर वाली तमाम अर्थव्यवस्था कोविड 19 से खुद को सुरक्षित करने पर आत्म और स्व- केंद्रित है वहीं भारत सार्क की चिंता करते हुए सम्पूर्ण दक्षिण एशिया क्षेत्र में अब नेबरहुडफर्स्ट की अवधारणा लिए “फर्स्ट रेस्पांडर”की भूमिका में आ गया है। भारत के लिए इन देशों के साथ निःस्वार्थ भूमिका कोई नई बात नहीं है। चाहे 2002 की सुनामी हो या अन्य कोई प्राकृतिक आपदा-विपदा, भारत हर क्षण जरूरतमंद देशों के साथ कदम से कदम और कन्धा मिलते साथ खड़ा था और हैं। उम्मीद है कि अपनी दृढ़तापूर्ण और पंचामृत की अवधारणा वाली राजनय से वर्तमान में कोविड19 महामारी को हम मात देंगे। स्थल, जल और नभ या पूर्व विदेशमंत्री सुषमा स्वराज के शब्दों में कहें तो मंगल ग्रह तक भारत अपने नागरिकों के साथ साथ सभी पहलुओं से परे जाकर अन्य “जरुरतमंदो”के लिए अंतिम विकल्प के रूप में देखा जाते रहेगा।

सार्क को पुनर्जीवन

चीन की बांटो और राज करो कि उपनेविशिक रणनीति, चीन -पाकिस्तान गठजोड़, पाकिस्तान द्वारा भारत को आतंकवाद के जरिये अस्थिर करना, उसका भारतीयों के प्रति वैमनस्यता, अदूरदर्शितापूर्ण सहयोग और कुटिल कूटनीतिक रवैय्या , पाकिस्तानी शरारतपूर्ण कुटिल और नकारात्मक राजनय ने इस क्षेत्र को उपक्षेत्र वाद की ओर धकेलने का भरपूर यत्न किया है और क्षेत्रवाद की कूटनीति, सार्क को असफल बनाने के लिये काफी है लेकिन भारत का पहले सार्क देशों के लिए समर्पित उपग्रह प्रणाली का उपहार, सार्क सड़क नेटवर्क का सुझाव और अब कोविड19 से निपटने के लिए आगे आकर अन्य सहयोगी देशों साथ इस महामारी से निपटने का संकल्प निश्चित रूप से इस मरणासन्न संस्था को नई जान डालेगा।

ड्रैगन डिप्लोमसी से सबक लेने की जरूरत

चीन डेब्ट ट्रैप और चेक बुक डिप्लोमसी के आड़ में एफ्रो एशियाई देशों को धीरे धीरे यह बात समझ में आ गयी कि सस्ते ऋण से न सिर्फ उनकी संप्रभुता बल्कि उनका अस्तित्व भी मिटने के कगार पर है क्योंकि कोविड19 से ग्रस्त इन देशों में चीन की गहरी पैठ है और इस महामारी का जनक देश चीन ही है।

भारत की आधुनिक, सक्षम , समर्थ, अभेद्य और सेवा के लिए सदैव तत्पर रक्षा तन्त्रो की त्वरित कार्रवाई ने जहां कोविड19 से निपटने में अपनी देवदूत सरीखी भूमिका निभाई है। चाहे वह अद्भुत शक्ति और अचूक वार की क्षमतायुक्त भारतीय वायुसेना हो या फिर भारतीय सेना, नौसेना का इस महामारी से निपटने के लिए की गई तैयारी या फिर हिमवीर कहे जाने वाले भारत तिब्बत सीमा पुलिस का छावला कैम्प जो कोविड 19 से पीड़ितों का संजीवनी बन गया है।

इसके अतिरिक्त भारतीय नागरिक संस्थायें और मंत्रालय ने जिस तरह से इस महामारी से निपटने का कार्य कर रही है जिसमें राष्ट्रीय विषाणु संस्थान (NIV)पुणे, आईसीएमआर, एनसीडीसी और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय, विदेश मंत्रालय के कार्य निश्चित रूप से इस सम्पूर्ण क्षेत्र में तेजी से फैल रहे इस महामारी से निपटने के लिए प्रभावी होंगे।

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