“मयूरासन” बनाए आपको बलशाली

प्रवीण झा

मयुरासन एक योग क्रिया है। “मयूर” एक संस्कृत शब्द है जिसको हिन्दी में “मोर” शब्द के रूप में जानते है । मयूरासन दो शब्दों मयूर और आसन के जोड़ से मिलकर बना है। जब यह आसन किया जाता है तो साधक की आकृति मोर की तरह हो जाती है इसलिए इसे मयूरासन कहते है। इसे एक कठिन आसन की श्रेणी में रखा गया है । इस आसन को पूर्ण रूप से करने के लिए प्रतिदिन अभ्यास करना बहुत जरूरी है । इसमे शरीर का पूरा भार दोनों हाथो पर आ जाता हैं।

मयूरासन करने की विधि :-

दोनों एड़ी पंजा मिला कर घुटनों के बल बैठ जाए । अपने दोनों हाथों की कोहनियों को नाभि के बीच में दाएँ-बाएँ रख ले। पैर उठाते समय दोनों हाथों पर बराबर मात्रा में वजन देकर धीरे-धीरे अपने पैरों को उठाएँ। अब अपने हाथ के पंजे और कोहनियों के बल पर धीरे-धीरे सामने की ओर झुकते हुए शरीर को आगे झुकाने के बाद पैरों को सीधा कर दें।। दोनो हाथो की उंगलियाँ अन्दर की ओर दोनों अंगूठा बाहर की ओर जमीन पर टिका दे ,फिर अब आपके शरीर का सम्पूर्ण भार हाथो पर हैं । ध्यान रहे जब शरीर जमीन से ऊपर की ओर ले जा रहे तो सांस बाहर की ओर छोड़े । इस क्रिया को 4 से 5 बार किया जा सकता है ।

मयूरासन के लाभ निम्न है :-

  • यह आसन हमारे शरीर को बलशाली बनाता हैं
  • हाथो में मजबूती लाता हैं और शरीर मे उर्जा शक्ति को बढाता है
  • पाचन तंत्र को मजबूती प्रदान करता है जिससे भूख ना लगने वाली बिमारियों को दूर रखने में मदद मिलती है
  • कब्ज , गैस जैसी समस्या को दूर करता हैं
  • वात , कफ , पीत तीनों विकार को नियंत्रित करता है
  • यह शरीर में रक्त संचार को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता हैं
  • आखों की रोशनी बढता है
  • बाल के झाड़ने को भी रोकता हैं
  • मधुमेह को रोकता है
  • अगर मधुमेह हो गया हैं, तो उसको नियन्त्रण करने में बहुत मददगार साबित होता हैं
  • यौन स्वास्थ्य में मयूरासन रामवाण का कार्य करता हैं
  • यह आसन चेहरे की लालिमा को बढाता हैं
  • दाग , धब्बा , मुंहासे को रोकता हैं। सभी प्रकार के चर्म रोग को दूर करने में असरदर साबित होता है।

मयूरासन की सावधानियाँ :-

  • यह आसन उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति को बिल्कुल नही करना चाहिए
  • हर्निया , अल्सर , हिर्दय रोगी को यह आसन करना है वर्जित
  • बडे ऑपरेशन के बाद यह आसन नही करना चाहिए
  • गर्भावस्था में भी ये आसन करने से परहेज करें
  • शरीर में किसी प्रकार का कमजोरी का एहसास हो , तो ये आसन ना करे ।
  • इस आसन को खाली पेट ही करना चाहिए ।

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