मो. फिरोज खान की नियुक्ति गलत, महामना के मूल्यों के विरुद्ध : काशी विद्वत परिषद

  • हिन्दू धार्मिक विषयों पर निर्णय देने वाली सर्वोच्च संस्था है काशी विद्वत परिषध
  • काशी विद्वत परिषद ने भी बीएचयू में फिरोज खान की नियुक्ति का किया विरोध
  • इस मुद्दे पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी ज्ञापन भेजेगी परिषद
  • फिरोज खान की नियुक्ति पर परिषद ने जारी किया प्रेस वक्तव्य

बनारस:

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्मविज्ञान संकाय में हुई मो. फिरोज़ खान की नियुक्ति को हिन्दू धार्मिक विषयों पर निर्णय देने वाली सर्वोच्च संस्था श्री काशीविद्वत परिषद ने गलत बताया है। परिषद इस संबंध में राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को भी ज्ञापन भेज रही है।

काशी विद्वत परिषद ने एक प्रेस वक्तव्य जारी कर नियुक्ति को महामना के मूल्यों के विपरीत बताते हुए नियुक्ति का विरोध किया। विद्वत परिषद के अध्यक्ष पंडित प्रोफेसर रामयत्न शुक्ल ने सोमवार को जारी प्रेस वक्तव्य में कहा, ” महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने अपने सिद्धांतों के अनुसार काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दू सनातन संस्कृति एवं सनातन धर्म में निहित वैदिक वांगमय के अध्यापन हेतु संस्कृत विद्या धर्मविज्ञान संकाय की अलग से स्थापना की थी, जिसमें अध्ययन-अध्यापन संस्कृत भाषा के माध्यम से वेदांग जिसमें वेद, व्याकरण, वेदान्त, ज्योतिष, साहित्य, धर्म-शास्त्र आदि के विषयों का अध्ययन-अध्यापन किया जाता है। मालवीय जी के मूल्यों के अनुसार तथा संकाय में लगे हुए शिलापट्ट अभिलेख के अनुसार इस संकाय में सनातन धर्म-मतावलंबी तथा सनातन धर्म में परिनिष्ठित व्यक्ति ही अध्यापन कार्य करेगा क्योंकि भारतीय सनातन वांगमय में परिगणित नियमों को उसका मतावलंबी ही अंगीकृत करके तदनुसार उसके नैतिक मूल्यों की स्थापना कर सकता है। जैसे मूर्तिपूजा, देवी-देवताओं के प्रति कर्मकांड आदि की परंपराओं का जन्म से ही जो पालन किया रहेगा उसके अन्त:करण के संस्कार ही विभिन्न ग्रंथों के चिंतन को छात्रों के मध्य स्थापित कर सकेगा।”

विद्वत परिषद के मुताबिक एक विशेष धर्म के प्रोफेसर फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति का विरोध किसी व्यक्ति, किसी भाषा या किसी धर्म विशेष का विरोध नहीं है, अपितु मालवीय जी के नैतिक मूल्यों का हनन न हो और हिन्दू संस्कृति परंपरा में धर्म विज्ञान संकाय का योगदान कहीं से विखंडित न हो, इसको सुनिश्चित करना है। परिषद ने फिरोज खान के विरोध करते हुए अपने प्रेस वक्तव्य में कहा, “काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में एक विशेष धर्म के प्रोफ़ेसर फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति को लेकर उपजे विवाद के संदर्भ में मुझे केवल इतना ही कहना है कि किसी व्यक्ति, किसी भाषा, किसी धर्म विशेष का विरोध नहीं है। अपितु मालवीय जी के नैतिक मूल्यों का हनन न हो और जो हिन्दू संस्कृति परंपरा में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय का योगदान है, वह कहीं से विखंडित न हो, उसकी सुरक्षा किया जाना अत्यंत आवश्यक है।”

इस संदर्भ में परिषद ने विद्वानों, विश्वविद्यालय प्रशासन और भारत सरकार के अतिरिक्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी इस मुद्दे का तत्काल समाधान निकालने की अपील की है। परिषद ने बताया कि इस संदर्भ में एक ज्ञापन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *