‘मिग 21 बायसन : ओल्ड इज गोल्ड’

भास्कर की कलम से

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में गत 14 फ़रवरी को केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काफ़िले पर घात लगाकर  आरडीएक्स विस्फोटकों से भरी कार से किये गए आत्मघाती हमले में  हमारे 44 बहादुर जवान शहीद हुए। भारत की ओर जवाबी कार्रवाई 26 फरवरी को देखने को मिली। पाकिस्तान के ख़ैबर पख्तूनवा प्रान्त के मानसहेरा जिले के बालाकोट के जाभा टॉप पर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मदरसे तालीम उल कुरान , जो आधुनिक सुविधायुक्त आंतकी प्रशिक्षण केंद्र था, भारतीय वायुसेना  ने अपने जंगी जहाज़ मिराज 2000 की अगुवाई में तथा सुखोई 30एमकेआई मल्टीरोल फ़ोर्स मल्टीप्लायर लड़ाकू जहाज ,फाल्कन, और नेत्र जैसे पूर्व चेतावनी देने वाले जहाज़, हेरॉन जैसे मानव रहित विमान और अपने रिफ्यूलर विमान के साथ इन आतंकी कैम्पों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया। भारी संख्या में प्रशिक्षु और प्रशिक्षित आतंकवादी और उनके ट्रेनर मारे गए। सन 1971 के बाद पहली बार भारतीय वायुसेना में अपने वायुक्षेत्र के पार इस्लामाबाद से महज़ 150किलोमीटर दूर इस कार्रवाई को अंजाम दिया।

इसके बाद पाकिस्तान ने आशानुरूप भारतीय कार्रवाई को बेबुनियाद बताया और कहा कि ऐसी कोई कार्रवाई हुई ही नहीं। फिर जैसी उम्मीद थी भारतीय हमले से तिलमिलाया पाकिस्तान चुप नहीं बैठा और उसने अमेरिकी एफ 16,चीनी जे 7 तथा फ्रेंच मिराज विमानों के साथ भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों को अपना निशाना बनाया। इसी क्रम में भारतीय वायुसेना ने अपने जंगी इंटरसेप्टर मिग 21(बायसन) के पायलट विंग कमांडर अभिनन्दन ने आधुनिक कहे जाने वाले अमेरिकी एफ16 को मार गिराया।

हालांकि हमने भी अपने मिग 21 बायसन को खोया और विंग कमांडर अभिनन्दन को अपने दुर्घटनाग्रस्त विमान से इजेक्ट होना पड़ा। वो पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में पैराशूट के सहारे उतरे तथा पहले स्थानीय और बाद में पाकिस्तानी सेना द्वारा बन्दी बना लिए गए। बाद में अत्यधिक हाई वोल्टेज कूटनीतिक गहमा गहमी के बीच  हमारे विंग कमांडर की स्वदेश वापसी भी हुई।

कैसे बताया जाय कि जहां सुई की जरूरत पड़ती है वहां तलवार से काम नहीं लिया जाता है। इनके अनर्गल मातम और प्रलाप से देश मे भारतीय वायुसेना की तैयारियों पर सवाल उठे,जो किसी भी सूरत ए हाल में जायज़ नहीं है।

मिग 21 (बायसन) के इस्तेमाल पर उठे सवाल

भारतीय वायुसेना के इस पराक्रम भरी कार्रवाई में दुर्घटनाग्रस्त हुए मिग 21 बायसन पर तथाकथित पत्रकार, अमेरिकी रक्षा लॉबी समूह के विशेषज्ञ और एयर कंडीशंड टीवी स्टूडियों में बैठ कर वेवजह बहस करने वाले,लड़ाकू विमानों की सामान्य जानकारी न रखने वाले तथाकथित संपादकों ने जोर शोर से मिग 21 बायसन पर अनर्गल आरोप तथा सवाल उठाने शुरू कर दिए कि जब हमारे पास सुखोई और मिराज जैसे जंगी जहाज थे तो हमने मिग 21 (बायसन )का इस्तेमाल क्यों किया ? अब भला इन महानुभावों को कैसे बताया जाय कि जहां सुई की जरूरत पड़ती है वहां तलवार से काम नहीं लिया जाता है। इनके अनर्गल मातम और प्रलाप से देश मे भारतीय वायुसेना की तैयारियों पर सवाल उठे,जो किसी भी सूरत ए हाल में जायज़ नहीं है।

 “मिग 21 बायसन (“फिशबेड” नाटो के द्वारा दिया गया कूट नाम) एक उन्नत तीसरी पीढ़ी या 3.5वीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है,जिसमे आधुनिकतम वेपन सिस्टम, राडार और हेलमेट माउंटेड साईट युक्त कॉकपिट है।जो वर्तमान के किसी भी विमान के लिए आवश्यक है”।

मिग 21 बायसन की सफलता पुतिन बनाम ट्रंप की लड़ाई में तब्दील हो गई

मैं अपने इस आलेख में यह बताने जा रहा हूँ कि आखिर मिग 21 (बायसन ) उस दिन के हमलों के लिए वायुसेना का सर्वश्रेष्ठ चुनाव था। इस विमान ने वह कर दिखाया जो शायद इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था। अपने से बेहतर समझे जाने वाले एफ16 को एक क्लोज कॉम्बैट डॉग फाइट में मार गिराया। जो इससे पहले शायद नही हुआ था। रूसी तकनीक अमेरिका को मात दे, भला यह बात अमेरिकी कैसे बर्दाशत करते। यहीं यह लड़ाई पुतिन बनाम ट्रंप की हो गई। अब देखिए न सीरिया ,यूक्रेन सहित तमाम मसलों पर पुतिन ट्रम्प को मात देते आएं हैं और रही सही कसर विंग कमांडर अभिनंदन और उनके “वॉर हॉर्स” मिग 21(बायसन) ने निकाल दिया।

मिग 21 (बायसन) का ही इस्तेमाल क्यों?

इन तमाम आलोचनाओं के बीच मिग 21(बायसन) की ऐसी कई खूबियां है जो इसे अन्य किसी भी आधुनिकतम इंटरसेप्टर जंगी जहाज से बेहतर बनाता है। सबसे पहले यह जान लिया जाय कि उस दिन मिग 21 (बायसन) का इस्तेमाल पाकिस्तानी वायुसेना को चुनौती देने में क्यों किया गया था। जबकि हमारे पास आधुनिकतम सुखोई,और मिराज जैसे जंगी जहाज थे।

सबसे पहली बात चूंकि पाकिस्तानी लड़ाकू जेट ने हमारी सीमावर्ती वायुसीमा का उल्लंघन किया और हमारे सैन्य प्रतिष्ठान पर बम बरसाए और तुरन्त वापस भागे तो जाहिर है हमे भी उनको त्वरित चुनौती देते हुए अपनी वायुसीमा को सुरक्षित करना था,जो हमने किया। क्योंकि शक्तिशाली से शक्तिशाली दुश्मन के विमान आपके आने का इंतज़ार नहीं करते , शत्रु को ख़ौफ़जदा रहना चाहिए, यहीं मिग 21 (बायसन )की सार्थकता सिद्ध होती है। त्वरित कार्रवाई में इस लड़ाकू विमान की कोई सानी नहीं। यह न सिर्फ यह बिजली की गति से उड़ान के लिए तैयार होता है वरन जब तक शत्रु विमान कुछ समझ पाए वह आसमान में “पोजीशन ऑफ़ एडवांटेज”को हासिल करते हुए शत्रु विमान को या तो मार गिराता है या उसे आत्मसमर्पण के लिए बाध्य कर देता है। उस दिन विंग कमांडर अभिनंदन ने वही किया। उस दिन जब कश्मीर के किसी फॉरवर्ड बेस से मिग 21 ने उड़ान भरी तो उसकी सहायता के लिए अन्य सुखोई 30एमकेआई और मिराज 200 जैसे जंगी जहाज भी उनके “कॉम्बेट एयर पैट्रॉल” में उड़ान भरी।

चूंकि मिग 21 (बायसन)अपने छोटे आकार और आधुनिकतम शस्त्रो और तकनीकी युक्त क्षमता में किसी आधुनिकतम लड़ाकू विमान की भांति कार्य करता है,यह छोटी वायु पट्टी /रनवे पर अपनी तेज गति से उड़ान , लो एल्टिट्यूड के साथ हाई एल्टिट्यूड में उड़ान भरने की अद्भुभुत क्षमता, हवा से हवा, हवा से सतह में मार करने वाली मिसाइल, जिसमे बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल , कम दूरी तक मार करने में सक्षम आर-73 और मध्यम दूरी मारक क्षमता वाली आर-73 विमानभेदी मिसाइल, रॉकेट्स और बम से लैस, बेहतर प्रदर्शन के लिए आधुनिक फेज ऐरे राडार, आधुनिकतम जैमर्स और काउंटर मेजर्स डिस्पेंसिंग शाफ एंड फ्लेर्स, जिससे शत्रु राडार और विमानों को चकमा दिया जा सकता है। इसके पायलट मिराज 200 जैसे हेलमेट माउंटेड साईट से सुसज्जित होते है। इसके डेल्टा विंग जो मिराज और तेजस जैसे हैं, इसे उच्च कोटि की “मनुरेवबलिलिटी” प्रदान करते हैं जो किसी “डॉग फाइट” के लिए इसे सर्वश्रेष्ठ बनाती है और इन्हीं सब विशेषता के जरिये इसने ऍफ़ 16 को मार गिराया।

क्या है “डॉग फाइट”

“डॉग फाइट” वायुसेना का एक तकनीकी शब्द है जिसका मतलब आसमान में दो विमानों की आपस में मुठभेड़ है। इसमें जो विमान पराजित होता है उसे विजेता “प्राइज” कहते हैं। मिग 21 बायसन को उड़ाने वाले पायलटों की माने तो , वे इसे “वॉर हॉर्स” “फ्लाइंग ऐस” “ऑनर व्हीकल” “लाजबाब” ” थंडर” “शेर” जैसे उपमा प्रदान करते हैं।

यहां यह समझने की आवयश्कता है कि फारवर्ड एरिया बेस में हमे त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता होती जो संदेश मिलते ही फौरन उड़ान के लिए तैयार हो जाय और अपने कार्य को जिम्मेदारी से निभाये। जहां अन्य लड़ाकू विमान अपने आकार और वज़न में भारी होते है वहीं उड़ान के लिए उन्हें लम्बी रनवे की जरूरत होती है। ये विमान निश्चित रूप से “फ़ोर्स मल्टीप्लायर” होते है लेकिन ये मोर्चे पर जबतक पहुंच नहीं जाए तब तक शत्रु विमान को उलझा कर रखने उहे विवश करने और मार गिराने में मिग 21(बायसन) की महत्ता किसी से कम नहीं होती इसलिए इसका इस्तेमाल “त्वरित कार्रवाई बल” के समान की जाती है। यही कारण है कि तमाम सीमावर्ती इलाकों में इसे अग्रिम मोर्चे पर तैनात किया जाता है। इस सिंगल सीट वाले विमान के पायलट अपने आप मे लाजबाब होते हैं, ये पायलट के साथ उच्च कोटि के नेविगेटर भी होते है यानि आसमान में हर हरकत पर पैनी नजर। एफ़ 16 जैसे विमान में पायलट के साथ एक नेविगेटर भी होता है, जहां पायलट विमान उड़ाता है वहीं नेविगेटर उसे हर स्थिति से वाकिफ करता है।

कौन सी बातें महत्वपूर्ण होती हैं डॉगफाइट में

डॉगफाइट में यह मायने नही रखता है कि आपकी मशीन(विमान) कितना बेहतर और आधुनिक है, आपकी जहाज़ की मनुरेवबलिलिटी कितनी ज्यादा है, इंजन कितना दमदार है बल्कि यह निर्भर करता है कि आपकी पोजीशन(स्थिति/अवस्थिति) क्या है। डॉग फाइट के दौरान आंखों में आंखे डाल कर आसमानी मुठभेड़ होती है और आसमानी मुठभेड़ में विजय तीन बातों पर निर्भर करती है
आपकी हाइट क्या थी, आपकी पोजिशन क्या थी और आपकी पोटेंशियल (इंजन क्षमता) क्या थी?आप जितनी तेजी से उड़ान भरते हुए जितनी अधिक ऊंचाई को प्राप्त करेंगे शत्रु विमान आपके निशाने पर होगा, आप शत्रु के विमान की नजर से ओझल रहेंगे ,आपको गुरुत्वाकर्षण का लाभ मिलेगा और हर वक़्त आप पोजिशन ऑफ एडवांटेज में रहेंगे। डॉगफाइट के उपरोक्त अहर्ता में मिग 21 (बायसन )अव्व्वल है, इस सुपरसोनिक जेट और इंटरसेप्टर फाइटर का कोई सानी नहीं। यह इस कदर भरोसेमंद है कि मार्च 2017 में वर्तमान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ ने इस फाइटर जेट को खुद उड़ाया और कारगिल में शहीद हुए जवानों की याद में “मिसिंग मैन फार्मेशन” के रूप में उन्हें श्रद्धाजंलि दिया था। वहीं 4 फरवरी 2019 को तमिलनाडु के सुलुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीये वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल धनोआ ने मिग 21 बायसन पर उठे एक सवाल का हंसते हुए उत्तर देते हुए स्पष्ट कर दिया, “MiG 21 is in our inventory, why will we not use it? वायुसेनाध्यक्ष ने मिग का बचाव करते हुए कहा कि यह एक “capable” jet that has been upgraded. The MiG-21 Bison is not the old MiG-21bis, “[It] has got better weapons system, better air-to-air missiles…We fight with all the aircraft in our inventory”. 

पहले भी मिग 21 बायसन ने दिखाए हैं अपने जलवे

यहां यह बताना उचित होगा कि 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध, तथा कारगिल युद्ध में इस विमान ने अपने शौर्य तथा पराक्रम के जलवे दिखाए थे और भारत को विजय दिलायी। कारगिल युद्ध के तुरंत बाद है गुजरात के कच्छ के रण में भारतीय सीमा के उल्लंघन करने की जुर्रत करने पर पाकिस्तान के एकमात्र “मैरीटाइम पैट्रॉल एयरक्राफ्ट “अटलांटिक” को भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर पी के बुंदेला ने मिग 21 से हवा से हवा में मार करने वाली हीट सीकिंग मिसाइल से मार गिराया था। इस नुकसान से पाकिस्तान इस कदर व्यथित हुआ कि वह यह मामला अंतराष्ट्रीय न्यायालय तक ले गया था।

मिग की दुर्घटना प्रक्रियागत खामियों की वजह से ज्यादा

मिग 21 ने न सिर्फ भारत में बल्कि वियतनाम अमेरिका के बीच हुए युद्ध में इस विमान ने अनेक आधुनिकतम समझे जाने वाले अमेरिकी विमानों को डॉग फाइट में मार गिराया। सोवियत संघ के विघटन के बाद यह अलहदा है कि इस विमान के स्पेयर पार्ट्स की कमी, दोयम दर्जे नट बोल्ट्स,तथा अन्य प्रक्रियागत खामियां उजागर होने लगी,तथा भारी संख्यां में हमने अपने पायलट्स और विमान खोए । ये दुर्घटनाएँ “परिणाम” थी जिसके “कारणों”को जानने के लिए हमें अपने गिरेबां में झांकने की जरूरत है न कि किसी विमान को उड़ता ताबूत कहने की।

यह सच है कि हम अपने सशस्त्र बलों को आधुनिकता और अद्यतन बनाये रखने में कोई कोर कसर न छोड़ें, नई तकनीक और प्रौद्योगिकी का स्वागत करें । हम एक प्रक्रियागत रूप से पुराने हो चुके विमानों को अपने बेड़े से धीरे धीरे बाहर कर रहे है।और नए विमानों का स्वागत जारी है जिसमे लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, आधुनिक सुखोई और इस सितम्बर तक रॉफेल लड़ाकू जेट्स वायुसेना के बेड़े में होंगे।

विंग कमांडर अभिनन्दन ने जो शौर्यपूर्ण कारनामा किये वह आधुनिक वैमानिकी के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज किया जाएगा। इसमें कोई शक़ नहीं की एफ 16 के आधुनिक क्षमता युक्त लड़ाकू विमान है। फिर भी उन्होंने अपनी ट्रेनिंग, एक्सपोजर, विशेषज्ञता, आत्मविश्वास के साथ अपने “वॉर हॉर्स” मिग 21 ( बायसन) पर भरोसा करते हुए एफ16 (फाल्कन ,नाटो का दिया कूट नाम) को मार गिराया ।

क्या मिग 21 बायसन के इस्तेमाल के अलावा हमारी सैन्य क्षमता के पास कोई और विकल्प था

आम तौर पर लोग जानना चाहते हैं कि क्या उड़ते हुए लड़ाकू जहाज को सतह से मार गिरा सकते है कि नहीं ? इसका उत्तर हां में है। भारत सहित दुनिया मे तमाम वायुसेना अपने वायुसीमा को चाकचौबंद रखने के लिये सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल जिसे एसएएम कहते हैं का इस्तेमाल करते हैं। यह मिसाइल वायुसीमा की दोहरी सुरक्षा प्रदान करते है। सवाल यह भी उठा कि क्या सतह से हवा में मारक क्षमता वाली मिसाइल के होते हुए भी क्यों मिग 21 (बायसन ) ने एफ़ 16 पर हमला किया। इसका उत्तर यह है कि शत्रु के जेट्स हमारी वायुसीमा का उल्लंघन कर और अपने टारगेट हिट कर तुरंत वापस अपनी सीमा में चले जाते हैं। कश्मीर में एफ 16 ने यही किया। उन्होंने भारतीय वायुसीमा के उस हिस्से से प्रवेश किया जहां उन्होंने इसे “असुरक्षित” समझा था, यहीं उनकी चूक हुई और वे मिग के साथ मुठभेड़ में आ गए। दूसरी बात इन शत्रु विमानों को मार गिराने के लिए इन सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल को मिग 21(बायसन) की तरह तुरन्त तैयार होने में थोड़ा अधिक समय लगता है। हां,अगर शत्रु विमान हमारी वायुसीमा काफी भीतर तक आ जाएं तो इन सतह से सतह तक मार करने वाली इन मिसाइलों से वार कर शत्रु विमान को आसानी से मार गिराया जा सकता है। सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों बैटरी को भारतीय सेना और वायुसेना संचालित करती है और इसका इस्तेमाल कब किया जाना है इसका निर्णय ये बल स्वयं लेते हैं।

विंग कमांडर अभिनन्दन की इस ओजस्वी शूरवीरता से समूची पश्चिमी मीडिया,निर्माता कम्पनी लॉकहीड मार्टिन और अमेरिकी हथियारों के रक्षा लॉबी की बोलती बंद हो गयी। यह उम्मीद है दशकों तक, जब तक यह बात जेहन से धुंधली नहीं होती तब तक कोई भी किसी अमेरिकी वैमानिकी को सर्वश्रेष्ठ बताने का दुस्साहस करेगा। सही मायने में यह मिग 21 बायसन लड़ाकू विमान “फ्रॉम रशिया विथ लव”निकला।

भास्कर

(लेखक टीवी पत्रकार हैं, फिलहाल डीडी न्यूज से संबंद्ध हैं)

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