तेरी मेरी उसकी बात: मोदी की चक्की धीरे धीरे पीसती है… मगर बहुत महीन पीसती है

सतीश चंद्र मिश्रा

प्रधानमंत्री मोदी ने ऐलान किया है कि वो फेसबुक ट्विटर इंस्टाग्राम और यूट्यूब सरीखे सोशल मीडिया मंचों को रविवार को अलविदा कहने वाले हैं…

दुनिया में सर्वाधिक फ़ेसबुक यूजर्स वाले देश भारत के प्रधानमंत्री का यह ऐलान फेसबुक माफिया जुकरबर्ग पर गाज गिरने के समान है। इसीतरह करोड़ों भारतीय ट्विटर यूजर्स की बदौलत बहुत मोटी कर कमाई कर रहे ट्विटर माफिया का भी गला प्रधानमंत्री मोदी के ऐलान के साथ सूख गया होगा… क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी जब कभी भी, कुछ भी करते हैं तो वो छोटा नहीं, बहुत बड़ा करते हैं।

वर्तमान संचार क्रांति के दौर में प्रधानमंत्री मोदी जनसंपर्क का इतना बड़ा माध्यम सोशलमीडिया त्याग कर एकांत वास में जाकर अपनी पहुंच को क्या सीमित कर देंगे? ऐसा सोचना, स्वयं को मूर्ख सिद्ध करना ही होगा। मेरा अनुमान है कि निश्चित रूप से रविवार को इन मंचों को त्यागने की घोषणा के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी इन मंचों से भी अधिक श्रेष्ठ और उपयोगी तथा पूर्णतः स्वदेशी सोशलमीडिया मंचों के एक समूह को देश को सौंपेंगे।

भारत के पास ऐसा करने की विपुल वैज्ञानिक सामर्थ्य और शक्ति है। आज भी फेसबुक ट्विटर यूट्यूब और इंस्टाग्राम का कामकाज सर्वाधिक संख्या में भारतीय मेधा ही सम्भाल रही है। इसमें मुख्य समस्या ऐसे मंचों के प्रचार प्रसार की ही होती है। लेकिन स्वयं नरेन्द्र मोदी आज पूरी दुनिया में सोशलमीडिया के सर्वाधिक चर्चित एवं लोकप्रिय चेहरों में से हैं। अतः उन मंचों पर प्रधानमंत्री के पदार्पण के साथ ही उन मंचों के प्रचार प्रसार की समस्या कुछ ही घण्टों में दम तोड़ देगी साथ ही साथ भारत में फ़ेसबुक ट्विटर द्वारा किए जा रहे भारत विरोधी नंगे नाच की कमर बुरी तरह तोड़ देगी।

ज्ञात रहे कि ये सभी अमेरिकी मंच हैं और इन्होंने पैसे लेकर दुनिया के कई अन्य देशों में भी उन देशों के ही खिलाफ उसी तरह नंगा नाच किया है जिस तरह भारत में कर रहे हैं। अतः इन अमेरिकी मंचों के विकल्प के रूप में किसी भी ऐसे भारतीय मंच को उन देशों में हाथों हाथ लिया जाएगा क्योंकि उन भारतीय सोशल मीडिया मंचों के अघोषित ब्रांड अम्बेडकर प्रधानमंत्री ही होंगे. जिनकी वैश्विक साख के कारण दुनिया की कई विख्यात हस्तियां भी इन मंचों से बड़ी संख्या में जुड़ जाएंगी…।

अतः आज भारत के लिए फ़ेसबुक ट्विटर इंस्टाग्राम और यूट्यूब का सफलतम विकल्प प्रस्तुत करना अत्यन्त सहज कार्य है. सम्भवतः इसके लिए पहले से ही तैयारी चल रही थी। जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री सम्भवतः रविवार को करेंगे।

ध्यान रहे कि 2018 में SC/ST एक्ट से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोशल मीडिया के इन अमेरिकी मंचों ने भारत में पाकिस्तान प्रायोजित झूठ फैलाकर जबर्दस्त हिंसा फैलाने के लिए अपने मंचों का उपयोग रोकने के बजाय उसे खूब फैलने दिया था। ऐसा कर के इन मंचों ने भारत में आए अपने पराभव की पटकथा लिखनी प्रारम्भ कर दी थी. रविवार को उस पटकथा का अन्तिम पन्ना लिखा जाएगा. इसलिए मैंने शुरू में ही लिखा कि… मोदी की चक्की धीरे धीरे पीसती है मगर बहुत महीन पीसती है…।

(सतीश चंद्र मिश्र के फेसबुक वॉल से साभार)

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