इबोला के खिलाफ नया डीएनए टीका सुरक्षित, प्रभावी

वाशिंगटन:

इबोला की रोकथाम के लिए वैज्ञानिकों के एक दल द्वारा विकसित किए गए एक नए कृत्रिम डीएनए टीके को सुरक्षित और लंबे समय तक विषाणु से सुरक्षा प्रदान करने वाला बताया गया है।

शोध दल के वैज्ञानिकों में भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक भी शामिल हैं।

अमेरिका के विस्टर इंस्टीट्यूट के शोधार्थियों ने एक अनोखे तरीके से कृत्रिम डीएनए टीका विकसित किया है जो वायरस ‘ग्लाइकोप्रोटीन’ को निशाना बनाता है।

शोध के नतीजे जर्नल ऑफ इंफेक्शियस डिजिजेज में प्रकाशित हुए हैं। इसमें टीके की आखिरी खुराक के साल भर बाद मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया प्रदर्शित की गई है।

विस्टर इंस्टीट्यूट के एमी पटेल ने कहा, ‘‘हमारे कार्य का अंतिम लक्ष्य प्रभावी और सुरक्षित टीके ईजाद करना है जो जोखिम ग्रस्त इलाकों में इस्तेमाल किए जा सकें।‘‘

वैज्ञानिकों ने टीके को सीधे त्वचा में दिया। इस नये तरीके से विषाणुओं से तीव्र और सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा मिली।

विस्टर के टीका एवं प्रतिरक्षा उपचार केंद्र के डेविड बी वेनर ने कहा है कि इस तरह का इबोला रोधी डीएनए टीका प्रतिरक्षा में नई भूमिका निभा सकता है। हम इस शोध के भविष्य में आने वाले नतीजों को लेकर उत्साहित हैं।

गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक इबोला विषाणु के संक्रमित होने वाले 50 फीसदी रोगियों की मौत हो जाती है।

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