प्रसिद्ध पर्यावरणाविद स्वामी सानंद का निधन

ऋषिकेश:

गंगा नदी में खनन बंद करने की मांग को लेकर लंबे समय से हरिद्वार में अनशन कर रहे जाने माने पर्यावरणविद प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद का गुरूवार को यहां एक अस्पताल में निधन हो गया ।

यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सूत्रों ने बताया कि स्वामी सानंद ने आज दोपहर करीब दो बजे अंतिम सांस ली ।

हरिद्वार स्थित मातृ सदन के संत ज्ञानांन्द से दीक्षा लेने वाले स्वामी सानंद को गत नौ अक्टूबर को उनके अनशन स्थल हरिद्वार से उठा कर प्रशासन ने एम्स, ऋषिकेश में भर्ती कराया था।

देश के प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थान आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर, फिर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य और उसके बाद भी न जाने कितने संस्थानों में अपनी सेवा दे चुके प्रो. जीडी अग्रवाल अपने शुरुआती दिनों से ही पर्यावरण और गंगा स्वच्छता को लेकर काम करते रहे हैं।

गंगा और पर्यावरण के प्रति उनके लगाव ने उन्हें प्रोफेसर जीडी अग्रवाल से स्वामी सानंद बना दिया

स्वामी सानंद पिछले 112 दिनों से गंगा की स्वच्छता, अविरलता और खनन माफिया को लेकर मातृ सदन में आमरण अनशन पर थे। इतिहास में ऐसा बहुत कम हुआ है जब किसी ने गंगा को लेकर इतने दिनों तक अनशन किया हो। स्वामी सानंद लंबे समय से केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ अनशन कर रहे थे।

गंगा के प्रति सरकारों के नकारात्मक रवैये और उपेक्षापूर्ण नीति के चलते स्वामी सानंद ने पहले भी कई बार सरकार पर सवाल उठाये। पूर्व में भी स्वामी सानंद के अनशन के बाद ही कांग्रेस सरकार में गंगा को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने का फैसला लिया था। ये स्वामी के अनशन का ही नतीजा था कि गोमुख से लेकर नीचे 130 किलोमीटर तक के इलाके को ईको सेंसिटिव जोन यानी पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया।

स्वामी सानंद अपने जीवन में कई बार गंगा रक्षा के लिए आंदोलन कर चुके थे। उन्होंने पहला अनशन 13 जून, 2008 से लेकर 30 जून, 2008 तक, दूसरा अनशन 14 जनवरी, 2009 से 20 फरवरी, 2009 तक, तीसरा अनशन 20 जुलाई, 2010 से 22 अगस्त, 2010 तक , चौथा अनशन 14 जनवरी, 2012 से कई टुकड़ों में होता हुआ अप्रैल, 2012 तक चला व पांचवां अनशन 13 जून, 2013 से 20 दिसंबर, 2013 तक किया। इसके बाद 111 दिनों के अनशन के बाद बुधवार को प्रशासन ने उन्हें जबरन उठाकर एक्स में भर्ती कराया लेकिन वहां भी उन्होंने अन्न-जल ग्रहण नहीं किया। तमाम कोशिशों के बावजूद सानंद अपनी जिद पर अड़े रहे और गुरुवार को उन्होंने प्राण त्याग दिए।

गंगा रक्षा के लिए प्राणों को न्यौछावर करने का मातृसदन का यह दूसरा गंगा भक्त है। इससे पूर्व मातृ सदन के स्वामी शिवानंद के शिष्य ब्रह्मचारी निगमानंद ने भी गंगा रक्षा के लिए 28 दिनों तक अनशन कर अपने प्राणों का त्याग किया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *