मुंबई इमारत हादसे में मरने वालों की संख्या 13 पहुंची, अब भी दर्जनों फंसे

मुंबई:

मुंबई के घनी आबादी वाले इलाके में मंगलवार को एक चार मंजिला रिहायशी इमारत के गिरने की घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। मलबे में अभी भी 35 से अधिक लोगों के फंसे होने की आशंका है। स्थानीय निकाय के अधिकारियों ने बताया कि दक्षिणी मुम्बई में डोंगरी इलाके की एक संकरी गली में करीब 100 साल पुरानी चार मंजिला रिहायशी इमारत पूर्वाह्न गिर गई।

बताया जा रहा है कि यह चार मंजिला इमारत लगभग 100 साल पुरानी थी। बीएमसी ने कुछ समय पहले इस इमारत को खाली करने का नोटिस भी दिया था। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने मुंबई में इमारत ढहने की घटना में मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त की है। अधिकारियों ने कहा कि प्राधिकरण टांडेल मार्ग पर स्थित केसरबाई बिल्डिंग के साथ है जो म्हाडा के क्षेत्र में ही आती है।

शाम होते होते बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में जुट गये और मलबा हटाने में मदद कर रहे हैं। भीड़भाड़ वाला इलाका होने के कारण एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंच पायीं और उन्हें घटनास्थल से 50 मीटर की दूरी पर खड़ा करना पड़ा। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि इमारत करीब 100 साल पुरानी है लेकिन वह खस्ताहाल इमारतों की सूची में नहीं थी, उसे पुन:विकास के लिए डेवेलपर को दिया गया था। इस बिल्डिंग में 10-15 परिवार रह रहे थे।

दमकल विभाग, मुंबई पुलिस और निगम अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं लेकिन संकरी गलियों के कारण राहत एवं बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। मुस्लिम बहुल इस इलाके में दुर्घटनास्थल पर स्थानीय लोग और वहां पहुंचे अन्य लोग बचावकर्मियों की मदद करते हुए नजर आये। उन्होंने मलबा हटाने में हाथ बटाया। वहां बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किये गये हैं। संकरी गलियों की वजह से बचाव काम में पहले ही बाधा आ रही थी। उस पर मंत्रियों, विधायकों, विपक्षी नेताओं आदि के पहुंचने से उसमें और भी देरी हुई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों की मौत पर दुख जताया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने मोदी के हवाले से ट्वीट किया, ‘‘मुंबई के डोंगरी में इमारत गिरने की घटना दुखद है। मैं मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं। महाराष्ट्र सरकार, एनडीआरएफ और स्थानीय अधिकारी राहत अभियान में लगे हैं और जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं।’’

मलबे के बीच से निकलती जिंदगी

टीवी पर बचावकर्मियों द्वारा एक बच्चे को मलबे से बाहर निकालते हुए दिखाया गया। अधिकारियों ने बताया कि बच्चा जीवित है। बेसुध हालत में एक महिला को भी मलबे से निकाला गया जिसे कपड़े से बने अस्थाई स्ट्रेचर पर ले जाया गया। लेकिन बाकी लोग इसे मासूम के जैसे खुशकिस्मत नहीं रहे । 100 साल पुरानी इस इमारत ने कई जिदंगियों को लील लिया । कुछ का परिवार उजड गया तो कुछ जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे है ।

घटनास्थल पर दिल दहलाने वाले दृश्य है जहां लापता लोगों के परिजन अपने प्रियजनों के जिंदा होने की चाह के साथ किसी अच्छी खबर के इंतजार में डटे हुए हैं।

इमारत के मलबे से जीवित महिला को बाहर निकाला गया

सुबह करीब 11 बजकर 40 मिनट पर दक्षिण मुंबई के डोंगरी में टंडेल मार्ग पर एक संकरी गली में स्थित ‘कौसरबाग’ बिल्डिंग का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर गिर गया। इमारत के गिरते ही चारो तरफ मलबा फैल गया और चीख पुकार मच गयी ।

बेहद घनी आबादी और संकरी सड़कों वाले इलाके में स्थित इस इमारत में काफी लोग रह रहे थे। हादसे के फौरन बाद दमकल विभाग, मुंबई पुलिस और निकाय अधिकारी मौके पर पहुंच गए लेकिन संकरी गलियों के कारण राहत एवं बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। एनडीआरएफ की टीम भी राहत काम में लगी है । एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंच पा रही है, उसे 50 मीटर की दूरी पर खड़ा करना पड़ा।

बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में जुटे हैं और मलबा हटाने में मदद कर रहे हैं। हादसे के बाद महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन ,राधा साहिब विखे पाटिल , कांग्रेस नेता मिलिंद देवडे , स्थानीय विधायक वारिस पठान और मुंबई के पुलिस आयुक्त संजय बर्वे भी मौके पर पहुंचे हैं। गिरीश महाजन ने कहा हादसे में मारे गए लोगों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे हादसे को रोकने के लिए सरकार और बीएमसी मिलकर उचित कदम उठआएगी।

बीएमसी के एडिशनल कमिश्नर अश्विनी जोशी ने बताया कि ये इमारत 100 साल पुरानी थी और एक ट्रस्ट की थी । वह खस्ता हाल इमारतों की सूची में नहीं थी, उसे पुन:विकास के लिए डेवेलपर को दिया गया था । बीएमसी का कहना है कि 2017 में ही इमारत खराब हालत को देखते हुए नोटिस जारी किया गया था। लेकिन लोग रहते रहे और यह हादसा हो गया।

मुंबई के मेयर विश्वनाथ महादेश्वर ने कहा कि उन्होंने नगर आयुक्त को मामले की जांच शुरू करने को कहा है। इस बीच राज्य मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि जांच के बाद ही हादसे के कारणों का सही ढंग से पता चल पाएगा। एक अधिकारी ने बताया कि बृहन्मुम्बई महानगरपालिका (बीएमसी) ने इमामबाड़ा नगरपालिका उच्चतर माध्यमिक कन्या विद्यालय में एक आश्रयस्थल बनाया है। मौके पर पहुंचे मुम्बादेवी के विधायक अमीन पटेल ने कहा कि हमारा अंदाजा है कि मलबे में अभी भी 10-12 परिवार फंसे हुए हैं।

वैसे इस बिल्डिंग के गिरने के बाद भी इसके कुछ हिस्से खड़े हैं। एक अधिकारी ने कहा कि इस साल करीब 500 इमारतें जर्जर घोषित की गयी थी लेकिन उनमें से केवल 68 को ही खाली कराया गया।

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