धर्मांतरित दलितों को आरक्षण के मुद्दे पर संत समिति हुई मुखर, प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

दलित पिछड़े और दलित मुसलमान शब्द का प्रयोग कर आरक्षण की मांग करना बाबा साहब भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रदत्त पिछड़े एवं अनुसूचित जाति/जनजाति के अधिकारों पर डकैती है : अखिल भारतीय संत समिति

वाराणसी:

सनातन हिन्दू धर्म के 127 से भी अधिक संप्रदायों का प्रतिनिधित्व करने वाली अखिल भारतीय संत समिति ने धर्मांतरित दलितों को आरक्षण दिए जाने की मांग पर अपने कड़े रुख का इज़हार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। अपने पत्र में संत समिति ने इस तरह की किसी भी संगठित प्रयास को रोकने की मांग की है।

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री दंडी स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने बृहस्पतिवार को इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि धर्मांतरित हुए विभिन्न जातियों के व्यक्ति जो आरक्षण की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं उन्हें इस्लाम या ईसाईयत स्वीकार करने के कारण इस सुविधा से वंचित किया जाए। संत समिति का मानना है कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर किसी भी तरह के आरक्षण की व्यवस्था नहीं देता है।

स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती का कहना है कि ईसाई या मुस्लिम संगठनों द्वारा इस तरह की मांग करने से उनका पाखंड उजागर होता है कि इस्लाम और ईसाईयत में सभी व्यक्ति एक बराबर है। उनके धर्म में लिंग भेद और जातीय व्यवस्था नहीं होने का दावे का खोखलापन जाहिर करता है।

संत समिति ने अपने पत्र में कहा है, “उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर दलित क्रिश्चियन, पिछड़े और दलित मुसलमान शब्द का प्रयोग कर आरक्षण की मांग करना भारतरत्न बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी प्रदत्त पिछड़े एवं अनुसूचित जाति/जनजाति के अधिकारों पर डकैती है।”

उल्लेखनीय है कि बुधवार को नेशनल काउन्सिल ऑफ दलित क्रिश्चियन्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अनुसूचित जाति मूल के दलित ईसाइयों को अनुसूचित जातियों को मिलने वाले लाभ दिलाने की मांग की थी। इस याचिका में दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने और अनुसूचित जातियों को क्षेत्र निरपेक्ष बनाने की मांग की गई है।

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