नानाजी देशमुख, भूपेन हजारिका और प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न

नई दिल्ली:

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रसिद्ध संगीतकार भूपेन हजारिका, एवं आरएसएस से जुड़े नेता एवं समाजसेवी नानाजी देशमुख को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जायेगा । गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति भवन से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि नानाजी देशमुख एवं भूपेन हजारिका को यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किया जायेगा ।

पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे। वह संप्रग प्रथम और द्वितीय सरकारों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। श्री मुखर्जी कांग्रेस की सरकार में विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और वित्त मंत्री का पदभार संभाला था। प्रणब मुखर्जी का राजनीतिक करियर वर्ष 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में शुरू हुआ था। वर्ष 1973 में वह औद्योगिक विकास विभाग के केंद्रीय उप मंत्री के रूप में इंदिरा मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे।

संघ से जुड़े नानाजी देशमुख पूर्व में भारतीय जनसंघ से जुड़े थे। 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद उन्होंने मन्त्री पद स्वीकार नहीं किया और जीवन पर्यन्त दीनदयाल शोध संस्थान के अन्तर्गत चलने वाले विविध प्रकल्पों के विस्तार हेतु कार्य करते रहे। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया था। वाजपेयी के कार्यकाल में ही भारत सरकार ने उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य व ग्रामीण स्वालम्बन के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान के लिये पद्म विभूषण भी प्रदान किया।

भूपेन हजारिका पूर्वोत्तर राज्य असम से ताल्लुक रखते थे। अपनी मूल भाषा असमिया के अलावा भूपेन हजारिका हिंदी, बंगला समेत कई अन्य भारतीय भाषाओं में गाना गाते रहे थे। उनहोने फिल्म “गांधी टू हिटलर” में महात्मा गांधी का पसंदीदा भजन “वैष्णव जन” गाया था। उन्हें पद्मभूषण सम्मान से भी सम्मानित किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके भारत रत्न विजेताओं के प्रति अपना सम्मान जाहिर किया। प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रामीण विकास में नानाजी देशमुख के योगदान को याद करते हुए लिखा है कि कमजोर तबकों की सेवा करने वाले वो सच्चे भारत रत्न हैं।

गायक भूपेन हजारिका के सम्मान में पीएम मोदी ने लिखा है कि भूपेन हजारिका के गीत-संगीत पीढ़ियों के बीच प्रेरणा का स्रोत है, उनसे न्याय, सौहार्द और भाईचारा का संदेश मिलता है।

प्रणब दा के लिए पीएम मोदी ने लिखा है कि हमारे समय के एक स्टेट्समैन हैं प्रणब मुखर्जी जिन्होंने देश की दशकों से बिना स्वार्थ के बिना थके सेवा की है।

वर्ष 1954 में शुरू हुआ भारत का ये सबसे बड़ा सम्मान अब तक 45 लोगों को दिया जा चुका है। आखिरी बार भारत रत्न वर्ष 2015 में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को और प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी एवं शिक्षाविद पंडित मदन मोहन मालवीय को दिया गया था

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