42 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं के मूल्य कम किए गए

नई दिल्ली:

सरकार ने कैंसर के इलाज में काम आने वाली गैर-अनुसूचित 42 दवाओं को मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाने का फैसला किया है। इसमें व्यापार मार्जिन 30 प्रतिशत पर नियत किया गया है। सरकार की ओर से बुधवार को जारी बयान में इसकी जानकारी दी गई।

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण नियामक एनपीपीए ने कैंसर, मधुमेह, संक्रमण, अस्थमा, दर्द समेत अन्य बीमारी के इलाज में उपयोगी 36 दवाओं की भी कीमतें तय की हैं।राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने अधिसूचना में कहा कि उसने 22 दवाओं की खुदरा कीमतें तय की हैं तथा 14 की उच्च कीमतों को संशोधित किया है।

जिन दवाओं की कीमतों को संशोधित किया गया है, उसमें बुडेसोनाइड इनहेलेशन तथा जेंटामाइसिन इंजेक्शन शामिल हैं। जहां बुडेसोनाइड का उपयोग अस्थमा के इलाज में किया जाता है वहीं जेंटामाइसिन का उपयोग कीटाणुओं के संक्रमण के इलाज के लिये किया जाता है। इसके अलावा जिन अन्य दवाओं के खुदरा दाम नियत किये गये हैं, उसमें ट्रास्टुजुमाब इंजेक्शन (कैंसर के इलाज में उपयोगी) तथा मेटफोरमिन के साथ ग्लिकलाजाइड टैबलेट (डायबिटीज टाइप 2 के इलाज के लिये) शामिल हैं।

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कीमत नियंत्रण आदेश, 2013 के पैरा 19 के तहत जनहित में असाधारण शक्तियों का उपयोग कर कैंसर के इलाज में उपयोग गैर-अनुसूचित 42 कैंसर दवाओं को व्यापार मार्जिन युक्तिसंगत बनाकर मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाने का फैसला किया है।

औषधि विभाग ने एक अधिसूचना में कहा, ‘‘… इसके तहत सरकार 42 गैर-अनुसूचित दवाओं के व्यापार मार्जिन को 30 प्रतिशत पर नियत करती है और विनिर्माताओं को उत्पाद की पहले बिक्री बिंदु के आधार पर खुदरा मूल्य तय करने को कहा गया है।’’ एनपीपीए के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इससे 105 ब्रांड का एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) 85 प्रतिशत कम होगा। इससे ग्राहकों को 105 करोड़ रुपये की अच्छी-खासी बचत होगी।

फिलहाल अनुसूचित श्रेणी के तहत कैंसर के इलाज में उपयोग 57 दवाएं कीमत नियंत्रण दायरे में हैं।

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