एमएसएमई उपक्रमों और स्टार्टअप के लिए आईपीआर शुल्क घटाने का प्रस्ताव

नई दिल्ली:

सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) तथा स्टार्टअप के लिए विभिन्न बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) मसलन पेटेंट और डिजाइन के लिए शुल्कों में भारी कटौती का प्रस्ताव किया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि इस कदम का मकसद नवोन्मेषण को प्रोत्साहन देना है।

आईपीआर आवेदन दाखिल करने के लिए किसी व्यक्ति, समूह या उद्योग को शुल्क देना होता है। प्रस्ताव के अनुसार एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए पेटेंट आवेदन दाखिल करने के शुल्क को 4,000 या 4,400 रुपये से घटाकर 1,600 या 1,750 रुपये किया जा सकता है। इसी तरह तेजी से समीक्षा के लिए शुल्क को 25,000 रुपये से घटाकर 8,000 रुपये किया जा सकता है। इसी तरह पेटेंट नवीकरण के शुल्क में भी कटौती की जा सकती है। डिजाइन आवेदन के लिए एमएसएमई और स्टार्टअप का शुल्क 2,000 रुपये से घटाकर 1,000 रुपये किया जाएगा।

भौगोलिक पहचान (जीआई) के लिए आवेदन के शुल्क को समाप्त करने का प्रस्ताव है। इसी तरह प्रमाणपत्र जारी करने और जीआई नवीकरण के शुल्क में भी कटौती का प्रस्ताव है। वर्तमान में इन कार्यों के लिये शुल्क क्रमश: 500 रुपये, 100 रुपये और एक हजार रुपये है।

मंत्रालय ने कहा कि घरेलू स्तर पर पेटेंट के लिए आवेदन करने का आंकड़ा 2013-14 में 22 प्रतिशत था, जो 2018-19 में बढ़कर 34 प्रतिशत हो गया। मंत्रालय ने बताया कि स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा शोध एवं विकास संस्थानों में बौद्धिक संपदा जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

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