‘आसन की रानी’ सर्वांगासन: एक आसन अनगिनत फायदे

विजय झा

योग के महत्वपूर्ण आसनों में से एक है सर्वांगासन। यह आसन देखने में साधारण दिखता है लेकिन पूर्ण और सही तरीके से करना थोड़ा कठिन है। गलत करने के नुकसान भी है इसलिए सावधान रहे और अकेले कोशिश न करे तो बेहतर है। तरीके को जान लेने के बाद आप खुद से अभ्यास शुरू कर सकते है।

सर्वा का अर्थ है सभी। मतलब हुआ वह आसन जिसका प्रभाव शरीर के प्रत्येक भाग पर पड़ता है। योग में सर्वांगासन का महत्व बहुत ही ज्यादा है। सर्वांगासन संस्कृत के दो शब्दों सर्व और अंग से मिलकर बना है। जहां सर्व का मतलब सभी और अंग का मतलब शरीर के अंग से है। सर्वांगासन करने में शरीर के सभी अंग शामिल होते हैं इसलिए इस आसन को सर्वांगासन कहा जाता है।

सर्वांगासन कंधों के सहारे किया जानेवाला एक योग आसन है, जिसमें पूरे शरीर को कंधों पर संतुलित किया जाता है। यह पद्म साधना योग का भी एक हिस्सा है। यह आसन मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में बेहद फायदेमंद है और इसलिए ‘आसन की रानी’ साधक पुकारते है।

यह केवल आसन तक सीमित नही है बल्कि योग चिकित्सा में भी इसका प्रयोग किया जाता है। इसका निरंतर अभ्यास आपको शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर बहुत आगे तक लेकर जाता है। सभी बीमारियों में किसी न किसी रूप में यह आसन लाभकारी है चाहे प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष। वैसे तो यह आसन बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए लाभदायक है, लेकिन महिलाओं के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है। सर्वांगासन को सभी आसनों की जननी भी कहा जाता है।

सर्वांगासन करने का तरीका

पीठ के बल जमीन पर सीधे लेट जाइये। पहले तो अपने तो तनावमुक्त करें। भयभीत न हो। योग की शुरूआत ही आपको शक्ति प्रदान करता है। सहज रहे। आसन अपने आप हो जाएगा। निरंतर अभ्यास करें और भरोसा रखे। एक दिन स्वयं ही बिना किसी कठिनाई के आप इसे कर पाएंगे। सहज होने के लिए तीन चार सांसे गहरी सांसे ले। धीरे धीरे सांस लेते हुए नब्बे डिग्री के कोण तक पैरों को उठाएं। फिर सांस को छोड़ दे। यहां से आप या तो हलासन में जा सकते है या फिर यही से सर्वांगासन में कर सकते है। आसन में किसी तरह के खिचांव से बचने के लिए पहले हलासन में सांस छोड़ते हुए जाए। फिर हलासन में ही एक पांव सीधा करें फिर दूसरा पांव। अंतिम स्थिति पर पहुंचने पर सांसों की गति को सामान्य कर ले। अपने हाथों को सहारे के लिए कमरे पर लगा कर रखे। इस अवस्था में 30 सेकेंड से 5 मिनट तक रह सकते है। जितनी आपकी क्षमता हो उसका पचास प्रतिशत ही करे। आसन नही लग रहा है या बहुत ज्यादा नही कर पा रहे तो चितिंत न हो। अभ्यास करते करते होने लगेगा। अब धीरे धीरे जिस प्रकार आसन की अवस्था में गए थे वैसे ही वापस आ जाए। अगर आपने योगाभ्यास शुरू किया है तो दीवार के सहारे इसे करें। आपको फायदा भी मिलेगा और गिरने का भय भी नही रहेगा।

सर्वांगासन के लाभ –

इस आसन की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। फिर भी हम यहां इसके कुछ महत्वपूर्ण लाभ के कुछ बिंदुओं के बारें बताया जा रहा है।

थॉयराइड हमारे गले में पाया जाता है और सर्वांगासन करने से थॉयराइड ग्रंथि बेहतर तरीके से काम करती है। यह थाइरॉड या गलग्रंथि को सक्रिय करता है और मेटाबोलिज्म को संतुलित करते हुए आपके वजन को बढ़ने से रोकता है। गले में रक्त जमा होता है और रक्त ठीक तरीके से थॉयराइड ग्लैंड में बहता है और इसे मजबूती प्रदान करता है। यह थॉयराइड ग्लैंड, पिट्यूटरी ग्लैंड और एड्रिनल ग्लैंड को उत्तेजित करने में मदद करता है। कंधे पर जोर और हाथों पर दवाब पड़ने की वजह से दोनों बलवान बनते है।

दिल की मांसपेशियां सक्रिय हो उठती है और शुद्ध और स्वच्छ खून हदृय तक पहुंचता है। तनाव और थकावट को दूर करने में सहायक, पाचन क्रिया मजबूत और पेट से जुडे रोग दूर होते है। आसन आँखों के लिए बेहद लाभप्रद है। नियमित अभ्यास से चेहरे की झुर्रियां दूर होती है। चर्बी दूर कर मोटापे को कम करता है। चेहरे के कील-मुहांसे व दाग़ धब्बे दूर हो जाते है और चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है। सिर का दर्द दूर हो जाता है। मासिक धर्म की अनियमितता, बांझपन, ख़ून की कमी आदि समस्या भी दूर होती हैं। बालों के परेशानी जैसे सफेद होना, बालों का झड़ना, डेंड्रफ इत्यादि से आपको बचाता है। इसके नियमित अभ्यास से उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी जाती और आपको जवां रखने में सक्षम है। यह मधुमेह के संतुलन के लिए लाभकारी आसन है। अपच एवं कब्ज से निजात दिलाता है। हर्निया के रोगियों को निरंतर अभ्यास करना चाहिए। बवासीर के लिए भी उपयुक्त योगाभ्यास है। नेत्र दृष्टि को बढ़ाने में सहायक है। कान और गले एवं नाक जुड़ी कोई परेशानी दूर हो जाती हैं।

अनिद्रा, अस्थमा, बबासीर, रक्त परिसंचरण प्रणाली, मधुमेह, लीवर की बीमारी और आंत वाले रोगियों के लिए लाभदायक आसन है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर ऊर्जा एवं शक्ति बढ़ती है। तंत्रिका तंत्र को मजबूती मिलती है और रीढ़ की हड्डी में लचीलापन भी बढ़ता है।

सर्वांगासन करते समय सावधानियां –

अधिक उच्च रक्तचाप, मिर्गी की शिकायत, गर्दन दर्द, कमर दर्द, साइटिका से पीड़ित व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं, स्पॉन्डिलाइटिस, आंखों में ग्लूकोमा की समस्या हो तो ये आसन नही करना चाहिए।

इसके अलावे सर्वांगासन करते समय आपको जम्हाई आए, छींक या कफ आये तो अपना पैर तुरंत नीचे कर लें, अन्यथा गले के नीचे, सीने और कानों में दर्द हो सकता है। सर्वांगासन करते समय लार को गटकें नहीं।

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