बदल रहा है राहु का स्थान, किस -किस को देगा राहत ?

अतुल सहाय की कलम से

राहु का 7 मार्च 2019 को मिथुन राशि में स्थान परिवर्तन

ग्रहों का एक और महत्वपूर्ण परिवर्तन बस अब होने को ही है जो हर राशि के जातकों के जीवन शैली में एक अद्द्भुत बदलाव का परिचायक होगा और साथ बहुत से जातकों के जीवन में आकस्मिक परिणाम का कारक होगा ! यहाँ हम बात कर रहे हैं – राहु और केतु के राशि परिवर्तन की।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार 7 मार्च को भारतीय समय के अनुसार रात्रि 2 बजकर 49 मिनट पर राहु मिथुन राशि में और केतु धनु राशि में गोचर करने जा रहा है और स्पष्ट तौर से यह सभी राशि के जातकों के जातकों को प्रभावित करेगा।

राहु-केतु छाया ग्रह, अत्यंत प्रभावशाली

वैदिक ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार राहु और केतु का उद्भव असुर कुल से हुआ और ग्रहमंडल में इनका कोई भौतिक अस्तित्व तो नहीं है – पर दोनों ही छाया ग्रह होने के बाद भी अत्यंत ही प्रभावशाली माने जाते हैं !

अनुभव से यह कह सकते हैं की ये पाप ग्रह होने के बाद भी अगर किसी जातक की कुंडली में शुभ स्थान पर / या फिर किसी शुभ ग्रह से दृष्ट हो / या फिर अपने उच्च राशि में हो – तो विषेशतः अपनी महादशा – अन्तर्दशा या शुभ गोचर के समय , जातक को असीम ऊँचाइयों तक पहुंचा देता है, इसके विपरीत अगर ये दोनों ग्रह अगर किसी जातक की कुंडली में किसी अशुभ स्थान या शत्रु राशि में हो या फिर किसी दूसरे पाप या क्रूर ग्रह से दृष्ट हो तो जातक के जीवन में गंभीर उथल – पुथल मचा देता है !

यह राशि परिवर्तन इसलिए भी महत्वपूर्ण है – क्योंकि – राहु अपने उच्च राशि – मिथुन में गोचर करेगा और केतु धनु में होने के कारण कुछ राशि के जातकों के लिए तो बहुत ही शुभ और कुछ के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण होने वाला है !

‘गुरू चांडाल’ योग बन रहा हो तो हो जाइए सावधान

जातक की जन्म कुंडली में या फिर गोचर की अवधि में अगर “गुरु चांडाल” योग बना रहा हो तो यह विनम्र आग्रह है की जातक किसी विद्वान् ज्योतिर्विद से अपनी कुंडली का विश्लेषण अवश्य करा ले क्योंकी “राहु और केतु” की ये 18 महीने का गोचर अवधि – जातकों को या तो शिखर पर पहुँचा देगा या फिर धराशायी कर देगा !

राहु के गोचर का बारह राशियों के जातकों पर क्या होगा सामान्य प्रभाव

मेष राशि के जातकों के लिए –

अपनी राशि से राहु का गोचर तीसरे भाव में होगा जो पराक्रम / छोटे भाई बहन / नौकरी का कारक है ! मेष राशि के जातकों के लिए ये १८ महीने बहुत ही महत्वपूर्ण होने वाले हैं और पिछले लगभग दो सालों से आयी विकासहीनता को बदल कर रख देगी – विशेषतः तब जब किसी जातक की कुंडली में राहु एक शुभ स्थान पर स्थापित हो या शुभ ग्रह से दृष्ट हो ! राहु के तीसरे भाव में स्थिति जातकों के लिए नौकरी / स्थान परिवर्तन या फिर अचानक धन लाभ का करक होगा ! पदोन्नति की संभावना है ! विदेश गमन / भ्रमण या फिर स्थायी रूप से विदेश में बसने की भी संभावना है !। मूल निवासी को इस दौरान बहुत अधिक वित्तीय लाभ और समृद्धि मिलती है। कोई भी लंबित कानूनी समस्या / मुकदमेबाजी का मामले जातक के पक्ष में हल हो सकता है । इस दौरान भाई-बहनों के साथ आपके संबंध भी सुधरते हैं।

वृषभ राशि के जातकों के लिए –

अपनी राशि से द्वितीय भाव में होगा जो थोड़ा कष्टकारी साबित हो सकता है, द्वितीय भाव धन / वाणी और मुँह सम्बन्धी रोग का कारक है – इस दौरान आंखें भी कमजोर हो जाती हैं। इस लिए अगर जातक की कुंडली में राहु दूषित है तो धन हानि की प्रबल संभावना बन रही है, वाणी कर्कश हो सकती है जिसकी वजह से मित्रों / नौकरी / परिवार में मनभेद और मतभेद होने की भी बहुत संभावना है ! मुँह जनित रोग ( दांतों / जीभ / मसूढ़ों से सम्बंधित रोग ) हो सकते हैं ! इसीलिए सावधान रहे | वैवाहिक जीवन में कुछ विवाद भी होते हैं। इस दौरान किसी भी अनुचित बहस से बचना भी बेहतर होगा।

मिथुन राशि के जातकों के लिए –

राहु स्वयं उनकी राशि पर ही १८ महीने के लिए गोचर करेगा जो शारीरिक कमजोरी – या किसी पुराने रोग के पुनः उभरने की आशंका है – इसके अलावा, मन की शांति की कमी का अनुभव होगा और मन खिन्न रह सकता है – किसी भी भ्र्ष्ट व्यापार – आचार और व्यहार से दूरी बना के रखना उचित होगा अन्यथा किसी कानूनी उलझन केन फंसने की संभावना है ! हाँ अगर – कुंडली में राहु शुभ स्थिति में हो तो कष्ट कम होगा – माता भगवती की प्रार्थना – राहु के मन्त्रों का जाप किसी भीकष्ट को ८०% तक काम कर सकता है !

कर्क राशि के जातकों के लिए –

राहु अपनी राशि से द्वादश (बारहवें) भाव में होगा ! द्वादश भाव – व्यय / मोक्ष / अंतर्ज्ञान / कल्पना का करक है ! यदि यह राहु यहां अपनी किसी शत्रु राशि – या – अशुभ ग्रह के साथ स्थित हुआ तो यह धन में कमी, अपव्यय और अन्य नकारात्मक व्यसन से ग्रसित होने की संभावनाओं को भी इंगित करता है। अति-आत्मविश्वास से जीवन में महत्वपूर्ण गलत कदम उठाने से बचना होगा। सावधानी बरतनी होगी के चुनौतियों के बावजूद भी मानसिक तनाव से बचने की कोशिश करनी होगी ।

सिंह राशि के जातकों के लिए –

यह गोचर अपनी राशि से एकादश ( ग्यारहवें )! ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार – एकादश भाव कुंडली का एक बहुत ही शुभ भाव माना गया है – यह अचल सम्पति / अधि -आय का भाव है भाव में होने जा रहा है, इस १८ महीने में बहुत ही सुखद परिणाम देखने को मिलेंगे ! इन १८ महीनों में व्यसाय / नौकरी में लाभ होगा और जातकों केसामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होगी ।

कन्या राशि के जातकों के लिए –

राहु का गोचर दशम ( दसवें ) भाव को प्रभावित करेगा में होने जा रहा है, जन्म के चंद्रमा से 10 वें घर का मतलब है कि आप नौकरी में पद वृद्धि का अनुभव कर सकते हैं और व्यायसायिक छवि की वृद्धि की भी संभावना है – कन्या राशि के जातकों के लिए अचानक धन लाभ भी हो सकते हैं। हाँ इस १८ महीने के दौरान जातकों की माता का स्वास्थ्य थोड़ा चिंताजनक हो सकता इसलिए ध्यान रखें।

तुला राशि के जातकों के लिए –

इस राहु का गोचर राशि से नवम (नौंवें) भाव में होगा, जिसे ज्योतिष शास्त्रों में “भाग्य भाव” कहा जाता है और इसे धर्म स्थान भी कहा जाता है ! ९ वें स्थान का जातक के लिए सकारात्मक फलदायी होता है – जो जातक विदेश में नौकरी या अध्ययन के लिए प्रयासरत हैं उनके लिए यह गोचर बहुत ही शुभ फलदायी होगा – हालांकि – नवम गोचार परिवार से दूर भी कर देता है । सुहं कार्य संबंधों को बनाए रखने के लिए अधिकारियों / सहकर्मियों से किसी भी कुतर्क से बचना और किसी भी अनावश्यक चर्चा दूर रहना – तुला जातकों के लिए लाभकारी होगा !

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए –

राहु – राशि से “अष्टम” ( आठवें) भाव में होगा ! अष्टम स्थान – आयु – रोग – धन और नौकरी को भी प्रभावित करता है ! वृश्चिक राशि के जातकों को अपने स्वास्थ्य के प्रति बहुत सजग रहने की आवश्यकता है तेज वाहन चलाना – सड़क पर सजग ना रहना – दुर्घटना का कारण बन सकता है ! जातकों को स्वास्थ्य के मामले में बहुत सावधान और सतर्क रहना उचित होगा – अगर राहु कुंडली में भी दूषित हुआ तो किसी संक्रामक रोग / यौनजनित रोग भी संभव है अतः गंभीर सावधानी की आवश्यकता है ! अनावश्यक आशंकाओं और घोर मानसिक कष्ट कभी संभावना है – अपने किसी दुर्व्यहार और अनाचरण के कारण – सामाजिक प्रतिष्ठा का क्षय और अपमान की भी संभावना है ! हाँ बस एक बात बहुत शुभ है – यदि जातक विदेश चला जाए तो धन का लाभ भी इंगित है ! माता भगवती की प्रार्थना – राहु के मन्त्रों का जाप किसी भी कष्ट को ८०% तक काम कर सकता है !

धनु राशि के जातकों के लिए –

राहु जातक के “सप्तम” (सातवें) भाव को प्रभावित करेगा – शास्त्रों के अनुसार सप्तम भाव विवाह / प्रेम संबंध / साझेदारी का करक है ! राहु का सप्तम गोचर बहुत शुभ संकेत नहीं है – पारिवारिक जीवन / वैवाहिक जीवन और प्रेम संबंधों में तनाव की प्रबलता होगी । किसी विवाहत्तेर संबंधों के कारण – अलगाव या सम्बन्ध विच्छेद भी संभावित है ! जातक का और जीवन संगी का स्वास्थ्य भी एक चिंता विषय हो सकता है ! माता भगवती की प्रार्थना – राहु के मन्त्रों का जाप किसी भी कष्ट को 80% तक काम कर सकता है !

मकर राशि के जातकों के लिए –

राहु 7 मार्च से राशि से छठे भाव में गोचर करेगा ! वैदिक ज्योतिष में छठे भाव को शत्रु , रोग, क़ानून सम्बंधित विषय , अज्ञात भय का कारक भाव कहा गया है ! ऐसा अनुभव है – की कोई भी पाप या क्रूर ग्रह अगर छठे भाव में स्थित हो या गोचर करे तो शुभ फलदायी होता है , इस लिए राहु का इस भाव में गोचर जातकों के लिए शुभ परिणामों का अनुभव करएगा ! जातकों के लिए धन के स्रोतों वृद्धि करेगा और जीवन में बहुत लाभ कराएगा । जातक का सामाजिक दायरा का विस्तार होगा , सम्मान और एक सामजिक पहचान मिलने की भी संभावना है ! अगर जमीन जायदाद / तलाक / कोई भी क़ानून सम्बंधित विषय न्यायलय में लंबित हो तो निर्णय इसी १८ महीने के दौरान – जातक के के पक्ष में आने की प्रबल संभावनाएं हैं !

कुम्भ राशि के जातकों के लिए –

राहु जातक की राशि से पंचम भाव में गोचर करेगा। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार पंचम स्थान – संतान, बुद्धि , मन, का कारक भाव है ! शास्त्रों के अनुसार राहु का पंचम गोचर जातक के लिए मानसिक तनाव और दुःख में वृद्धि का कारण होता है ! जातकों को संतान से जुड़ी कोई न कोई समस्या परेशान सकती है – विषेशतः ाप्रथम या अंतिम संतान से । पर सभी प्रतिकूल हो ऐसा भी नहीं है – पंचम राहु – जातक को धन और आय – व्यापार में वृद्धि के लिए एक बहुत ही शुभ और लाभकारी गोचर होगा! हाँ यह भी है की मन किसी अज्ञात आशंका – भय से ग्रसित भी रह सकता है – धन का लाभ तो होगा – पर अपने किसी अतिआत्मविश्वास के भ्रम के कारण धन की हानि भी हो सकती है !

मीन रशि के जातकों के लिए –

राशि से चतुर्थ (चौथे ) भाव में होगा ! चतुर्थ भाव – माता – घर का सुख – जो मता, सुख वृद्धि का कारक भाव माना जाता है ! साधारणतः – राहु का चतुर्थ भाव में होना कष्टकारी हो सकता है। जातकों के लिए इन सम्पूर्ण गोचर अवधि में , माता / जमीन / संपत्ति से जुड़े विषय में सावधानी की आवश्यकता है क्योंकि ये कुछ विषय जातक के मानसिक शांति को विचलित कर सकती है ! माता का स्वास्थ्य चिता का कारन सकता है। अगर लग्न/जन्म कुंडली में राहु दूषित हो या मंगल के साथ हो या किसी क्रूर ग्रह से दृष्ट हो वाहन सम्बंधित परेशानी या दुर्घटना संभव है। ऐसे में जातकों को श्री हनुमान की आराधना / माता भगवती की आराधना मन्त्रों का जाप कष्टों को कम करने में सहायक होगा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *