‘ऊँ’ का नियमित जाप, बेहद लाभकारी

विजय झा

‘ऊँ’ को दुनिया के सभी मंत्रों का सार कहा गया है। ओंकार ध्वनि के महत्व का जिक्र शुरू से सुनने को मिलता है। यह उच्चारण के साथ ही शरीर पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ती है। पांच अवयव- ‘अ’ से अकार, ‘उ’ से उकार एवं ‘म’ से मकार, ‘नाद’ और ‘बिंदु’ इन पांचों को मिलाकर ‘ओम’ एकाक्षरी मंत्र बनता है। ‘ऊँ’ को ओम कहा जाता है। उसमें भी बोलते वक्त ‘ओ’ पर ज्यादा जोर होता है। इसे प्रणव मंत्र भी कहते हैं।

‘ऊँ’ शब्द तीन ध्वनियों से बना हुआ है- जिनमें “अ” का अर्थ है उत्पन्न होना, “उ” का तात्पर्य है उठना तथा उड़ना अर्थात् विकास एवं “म” का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् “ब्रह्मलीन” हो जाना।

साधारण मनुष्य उस ध्वनि को सुन नहीं सकता, लेकिन जो भी ओम का उच्चारण करता रहता है उसके आसपास सकारात्मक ऊर्जा का विकास होने लगता है। ध्वनि को सुनने के लिए तो पूर्णत: मौन और ध्यान में होना जरूरी है। जो भी उस ध्वनि को सुनने लगता है वह परमात्मा से सीधा जुड़ने लगता है। परमात्मा से जुड़ने का साधारण तरीका है ‘ऊँ’ का उच्चारण करते रहना। इसका असर भी मानसिक स्तर पर आप महसूस करते हैं।

इस मंत्र का प्रारंभ है अंत नहीं। यह ब्रह्मांड की अनाहत ध्वनि है। अनाहत अर्थात किसी भी प्रकार की टकराहट या दो चीजों या हाथों के संयोग के उत्पन्न ध्वनि। इसे अनहद भी कहते हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड में यह अनवरत जारी है। एक ऐसी ध्वनि है जो लगातार सुनाई देती रहती है शरीर के भीतर भी और बाहर भी।

‘ऊँ’ अपने आप में चमत्कारी है। ब्रह्मांड का प्रतीक है ‘ऊँ’। अध्यात्मिक क्रियाओं और शिव की साधना से व्यक्ति निर्भय होता है। व्यक्ति जैसे जैसे निर्भय होता जाता है उतना ही नाभि के निकट पहुँचता जाता है। ओम का भी यदि आध्यात्मिक शान्त तरीके से उच्चारण किया जाए तो व्यक्ति के शरीर मे, बल्कि शरीर के प्रत्येक रोम-रोम में कम्पन होने लगता है। व्यक्ति के चारो ओर तंरगो का निर्माण होने लगता है।

उच्चारण की विधि

प्रातः उठकर ओंकार पवित्र होकर ध्वनि का उच्चारण करें। आराम की अवस्था में बैठकर तर्जनी उंगली को अंगूठे पर लगाकर ज्ञान मुद्रा बना लें। उसके बाद पेड़ू से अ, ह्रदय से उ एवं नाक से म को नाद और बिंदु की ध्वनि सहित उच्चरित करें। श्वास को सामान्य बनाए रखें। ‘ऊँ’ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं। इसका उच्चारण 5, 7, 10, 21 बार अपने समयानुसार कर सकते हैं। ‘ऊँ’ जोर से बोल सकते हैं, धीरे-धीरे बोल सकते हैं। ‘ऊँ’ जप माला से भी कर सकते हैं।

स्वास्थ्य लाभ

शरीर और मन को एकाग्र करने में मददगार
दिल की धड़कन और रक्तसंचार को रखता है व्यवस्थित
मानसिक बीमारियाँ होती हैं दूर
शारीरिक शक्ति में होता है इजाफा
आत्मविश्वास में करेगा वृद्धि
मस्तिष्क में आने वाले नकारात्मक विचारों को दूर करने में सहायक
सकारात्मक ऊर्जा का करता है विकास
शरीर के तंत्र सुचारु होकर ठीक ढंग से करते हैं कार्य
रक्त का संचार रहता है एक समान
ब्लड प्रेशर एवं ह्रदय संबधी रोगों में भी है लाभकारी
पाचन प्रक्रिया रहेगी सही
गैस से निजात दिलाने में लाभकारी
नींद नहीं आने की समस्या को करेगा दूर
दिमाग को बनाएगा शांत
तनाव हो जाएगा रफूचक्कर
घबराहट, व्याकुलता को दूर कर बनाएगा शांत
स्वर और गले में कंपन्न पैदा कर थायरॉइड ग्रंथि को करता है उत्तेजित
थायरॉइड ग्रंथि पर पड़ता है सकारात्मक प्रभाव
उच्च व निम्न रक्तचाप समस्याओं में लाभकारी
आलस्य दूर कर रखेगा तरोताजा
स्फूर्ति आएगी, रहेंगे चुस्त-दुरुस्त
थकान से मिलेगी आजादी
रीढ़ की हड्डी को बनाता है मजबूत
तंत्रिका तंत्र को सुचारू बनाए रखने में सहायक
सांस की तकलीफ के लिए बेहद फायदेमंद
फेफड़े होंगे स्वस्थ व मजबूत

प्रिय या अप्रिय शब्दों की ध्वनि आपके मस्तिष्क को प्रभावित करती है। अप्रिय शब्दों से निकलने वाली ध्वनि से मस्तिष्क में काम, क्रोध, मोह, भय लोभ की भावना उत्पन्न करती है जिससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है और रक्त में ‘टॉक्सिक’ पदार्थ पैदा होने लगते हैं। इसी तरह प्रिय और मंगलमय शब्दों की ध्वनि मस्तिष्क, हृदय और रक्त पर सकारात्मक प्रभाव डालता है जो आपको खुश रखता है। इसका उच्चारण करने वाला और इसे सुनने वाला दोनों ही लाभान्वित होते हैं।

विजय झा

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