योगासनों का राजा है ‘शीर्षासन’

विजय झा

शीर्षासन संस्कृत के दो शब्दों शीर्ष और आसन से मिलकर बना है। शीर्ष का अर्थ सिर और आसन का अर्थ मुद्रा है। योग आसनों का राजा है शीर्ष आसन। मुद्रा में, शरीर उलटा रहता है और शरीर के वजन को अग्र भुजाओं पर संतुलित किया जाता है, जबकि सिर आराम से जमीन पर होता है। इस लेख में मैं आपको मैं शीर्षासन के अद्भुत फायदे, सही तरीका और अभ्यास के बारें में बताऊंगा।

शीर्षासन करने के दौरान शरीर के अंगों पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के दबाव उल्टा हो जाता है। यह अभ्यास शुरूआत में थोड़ा कठिन होता है। शीर्षासन का नाम सुनते ही अधिकांशतः लोग घबरा जाते हैं तथा इसे बहुत कठिन मानते हैं। परंतु वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। थोड़े से अभ्यास व सावधानी के साथ कुछ दिन निरंतर करते रहने से ही शीर्षासन सीखा जा सकता है। इसको करने के लिए अभ्यास में संयम रखने की आवश्यकता है। अभ्यास को हमे सुरक्षित बनाएं और अपने आप को सुरक्षित रखे। आसन की अवधि धीरे धीरे ही बढ़ाई जाए तथा अभ्यास में अति ना हो। ‘अति सर्वत्र वर्जयेत’। योग के विषय में भी यह उक्ति नितांत सत्य है।

शीर्षासन कैसे करें?

शीर्षासन करने के लिए योगा मैट या मोटा तौलिया बिछा लें। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा ले। दोनों हाथों के बीच में दोनों कंधों के बीच जितनी दूरी होनी चाहिए। अब दोनों हाथों के बीच में सर को कुशन पर रखें और कोहनीयों को जमीन पर आराम से रखें। सिर के ऊपर का हिस्सा कुशन पर रखकर घुटनों को जमीन पर आराम से रखें। अब गर्दन और कोहनी पर शरीर के वजन को नियंत्रित करते हुए, पैरों को जमीन के स्तर पर सीधा करें। अब एक घुटने को झुकाते हुए एक पैर को थोड़ा सा उठाएं। इसके बाद दूसरा पैर उठाएं। अब एक-एक करके पैरों को ऊपर सीधा उठाने का प्रयास करें, शुरुआत में जल्दबाजी ना करें जबकि धीरे-धीरे पैर सीधे करने का प्रयास करें। जब पैर सीधे होते हैं, तो शुरुआत में उनका संतुलन बनाने के लिए उन्हें थोड़ा आगे झुकाएँ अन्यथा आपके पीछे की ओर गिरने की संभावना होती है। कुछ देर अंतिम स्थिति में बने रहे और सामान्य रूप से सांसे लेते रहे। अगर आप थकावट महसूस कर रहे है तो शीर्षासन के तुरंत बाद कुछ देर शवासन करें या फिर सीधे खड़े हो जाएँ, ताकि मस्तिष्क की ओर बहने वाला रक्त का बहाव सामान्य हो जाएं।

शुरुआत में शीर्षासन का अभ्यास कैसे करें?

यदि आपको शीर्षासन करने में अधिक कठिनाई हो रही है तब आप दीवार के सहारे इसका अभ्यास कर सकते हैं। शीर्षासन करने के लिए दीवार के पास योग मैट बिछा लें। ऊपर बताए गए तरीके के अनुसार आरंभिक स्थिति में आ जाए। फिर किसी के सर्पोट से अपने एक पैर और दोनों पैरों को ऊपर दीवार के सहारे लगा ले। शरीर का वजह हाथों, कंधों और सर के ऊपर रहेगा। इस स्थिति में बन रहे। कुछ देर बाद वापस आ जाए। कुछ समय के लिए शवासन की मुद्रा में आराम करें। यदि आप इसे दीवार के सहारे भी नही कर पा रहे है तो शुरूआत में अर्ध शीर्षासन के साथ शुरूआत करे।

शीर्षासन कितने समय तक करना चाहिए?

शुरुआत में इसका अभ्यास 15 सेकंड के लिए करें और धीरे-धीरे आप इसे 5 – 10 मिनट कर सकते है। यदि आप शीर्षासन लंबे समय तक अभ्यास करना चाहते हैं तो आपको इसे विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए। नियमित इतने समय के लिए करने से आपको बहुत फायदा होगा।

शीर्षासन के लाभ

  • मस्तिष्क को शुद्ध रक्त मिलता है
  • आंख, कान, नाक निरोगी बनता है
  • पिट्यूटरी और पाइनल ग्रंथियों को स्वस्थ होती है
  • मस्तिष्क सक्रिय होता है
  • स्मृति, कुशाग्रता और एकाग्रता बढ़ाने में मददगार
  • पाचन तंत्र, पेट, आंतों और यकृत होता है सक्रिय
  • बढ़ती है पेट की पाचन शक्ति
  • अत्यधिक गैस बनने की समस्या और कब्ज में मिलेगी मुक्ति
  • आंतों, हर्निया, हिस्टीरिया, हाइड्रोसेल और वैरिकाज़ नसों के लिए लाभदायक
  • थायराइड ग्रंथि को करता है सक्रिय
  • मोटापे को करता है बॉय बॉय और कमजोरी को करता है कम
  • नपुंसकता और बांझपन में फायदेमंद
  • चेहरे पर चमक लाता है और जीवन शक्ति बढ़ती है
  • बालों के असामयिक रूप से गिरने, और समय से पहले सफ़ेद होने को रोकता है
  • दिमाग को देता है आराम और रखता है तनाव मुक्त
  • नियमित अभ्यास से आपके हाथ, कंधे, पैर और रीढ़ की हड्डी होती है मजबूत
  • बैलेंस की क्षमता का होता है विकास
  • कोर्टिसोल हार्मोन के बनने में काफी कमी आती है, जिससे आपको तनान होता है कम
  • हड़ियों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
  • पैंक्रियास को उत्तेजित करते हुए इन्सुलिन के स्राव में मदद करता है जिससे डायबिटीज के प्रबंधन में मिलती है मदद
  • दिमाग की करोड़ों कोशिकाओं में शुद्ध रक्त पहुंचता है। रक्त के साथ उपयुक्त पोषण एवं खनिज लवण मिलता है। कोशिकाओं और ऊतक का ठीक तरह से होती है देखभाल
  • सिरदर्द और माइग्रेन के दौरा सिर की कोशिकाओं का दबाब एवं संकोचन हो जाता है। इसे कम करके आपको माइग्रेन से दिलाता है राहत
  • सेक्सुअल समस्याओं में निजात दिलाने में है सहायक
  • पाइल्स और वैरिकोस नसों की समस्याओं से दिलाता है छुटकारा। पाइल्स और वैरिकोस नस खून का सही प्रवाह न होने के कारण होता है और शुद्द रक्त के पहुंचने से इसमें लाभ मिलता है।
  • लिवर को रखता है तंदरुस्त
  • नींद न आने की समस्या की समस्या पूरी तरह हो जाती है दूर ।

इन परिस्थितियों में शीर्षासन न करे

  • जो लोग कान दर्द और कान में स्राव से परेशान हैं
  • आंखे अनावश्यक लाल होंने पर
  • हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और पीठ दर्द
  • भारी व्यायाम या आसन करने के तुरंत न करे शीर्षासन
  • आसन के दौरान शरीर का तापमान सामान्य होना चाहिए
  • ठंड और जुकाम से पीड़ित होने पर
  • कमजोर, बीमार और बूढ़े व्यक्तियों को
  • गर्दन, कंधे और भारी सिर दर्द से पीड़ित होने पर
  • सिर में ब्लड हेमरेज की समस्या
  • किडनी का रोग और स्लिप डिस्क की समस्या
  • यदि आपका पेट पूरी तरह से भरा हो
  • शरीर में थकान हो, सिर दर्द या माइग्रेन की समस्या हो

शीर्षासन के बारे में भ्रांतियां

  • महिलाओं को शीर्षासन नहीं करना चाहिए। मासिक धर्म व गर्भावस्था के दौरान स्त्रियों के लिए यह आसन वर्जित है।
  • शीर्षासन केवल संन्यासियों के लिए है, गृहस्थ के लिये नहीं
  • शीर्षासन का अभ्यास पचास की आयु के बाद नहीं प्रारंभ करना चाहिए

शीर्षासन करने से पहले ये आसन करें

  • कर्नापीड़ासन, ऊर्ध्व पद्मासन, पिण्डासन, मत्स्यासन, उत्तान पादासन

शीर्षासन करने के बाद ये आसन करें

  • बालासन, बद्ध पद्मासन, योगमुद्रा, पद्मासन, उत्प्लुतिः या तुलासन

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