उत्तराखंड: 40 सालों से लंबित जमरानी बांध परियोजना को मिली पर्यावरण मंजूरी

देहरादून:

उत्तराखंड में 40 वर्षों से भी अधिक समय से लंबित जमरानी बांध परियोजना को आखिरकार केंद्र सरकार से पर्यावरण संबंधी अनुमति मिल गयी है। राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ये जानकारी दी।

मुख्यमंत्री रावत ने अपने ट्वीटर अकाउंट के जरिए इस सूचना को सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संबंधी मंजूरी मिलने के बाद अब इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के पूर्ण होने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। परियोजना के कार्यान्वयन में हुई प्रगति में केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों को रेखांकित करते हुए रावत ने कहा कि इससे भाबर क्षेत्र के निवासियों का बहुप्रतीक्षित सपना पूरा होगा।

भाबर हिमालय के निचले हिस्सों और शिवालिक के दक्षिण में स्थित है। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को बताया, “तराई भाबर क्षेत्र के लोगों को परियोजना से पानी मिलेगा और उससे उत्तराखंड की 5000 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई हो सकेगी।”

उन्होंने कहा कि 1970 में प्रस्तावित 2,584 करोड़ रुपए की इस परियोजना से उत्तराखंड के नैनीताल और उधम सिंह नगर को पेयजल और सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। साथ ही 14 मेगावाट बिजली पैदा होगी।

नैनीताल जिले की गोला नदी पर स्थित यह बांध नौ किमी लंबा, 130 मी चौड़ा और 485 मी ऊँचा होगा। परियोजना को इस वर्ष फरवरी में केंद्रीय जल आयोग से तकनीकी मंजूरी मिल गयी थी। वन विभाग ने परियोजना के लिए 351.49 हेक्टेयर भूमि प्रदान की है और राज्य सरकार ने 89 करोड़ रुपए की आरंभिक राशि आवंटित की है।

भाबर क्षेत्र के लोगों के लिए यह परियोजना जीवनरेखा के समान है।

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