क्या बला है ‘सोशल मीडिया डे’ !

संदीप झा

 

आज यानि 30 जून सोशल मीडिया डे है। प्रसिद्ध वेबसाइट Mashable.com मशाएबल डॉट कॉम ने सन 2010 से सोशल मीडिया डे मनाने की परंपरा शुरू की।

 

शासन, प्रशासन और संवाद के लिए बेहतरीन मंच के तौर पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने में कुशल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को सोशल मीडिया डे की शुभकामना भी दी। प्रधानमंत्री ने ट्वीटर पर दिए अपने संदेश में कहा, “#SocialMediaDay की शुभकामना। सोशल मीडिया ने दुनिया भर के लाखों लोगों को अपने असंतोष को लोकतांत्रिक ढंग से सामने लाने, अपनी रचनात्मकता के प्रदर्शन एवं विचारों के प्रस्तुतिकरण के लिए मंच उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मैं खासतौर पर अपने नौजवान मित्रों को सोशल मीडिया के उनके रचनात्मक उपयोग के लिए बधाई देता हूं। राय व्यक्त करने की उनकी स्पष्ट शैली खास तौर पर प्रिय है। मैं युवाओं से आग्रह करता हूं कि वो इसी तरह खुल कर चर्चा करते रहें और अपनी बात रखें।”

 

 

ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैली है। संवाद की शैली, संवाद जो एकतरफा नहीं है… संवाद जिसके जरिए प्रधानमंत्री न केवल अपनी बात जन जन तक पहुंचाने में कामयाब रहते हैं बल्कि जन की भावना की भी थाह ले पाने में सफल रहते हैं।

 

याद कीजिए केंद्र में सत्तारूढ़ यूपीए सरकार के दौर को … जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार न केवल भ्रष्टाचार के बड़े संगीन आरोपों से घिरी थी बल्कि आम जनता में सरकार के काम नहीं करने की छवि लगातार गहरी होती जा रही थी। आम जन की बात दिल्ली में बैठे राजनेताओं तक पहुंचने का कोई रास्ता उस सरकार के पास नहीं था।

 

 

मई 2014 में ऐतिहासिक जनादेश के साथ प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी ने संभाली सत्ता की कमान। लिहाज़ा ‘कुछ नहीं हो सकता है’ के हालात से निकालकर सरकार और जनता के बीच संवाद के नए प्रतिमान गढ़े गए।

 

प्रतिमान ऐसे जिसकी कल्पना शासन प्रशासन के धारधार हथियार के रूप में शायद ही किसी ने इससे पहली की थी। पीएम मोदी युवाओं से उनकी ही शैली में मिले, ट्वीटर पर, फेसबुक पर, सोशल मीडिया के जरिए… उनसे बात की… उनकी समस्याओं को सुना समझा और रास्ता निकाला… रास्ता भी ऐसा जो लोगों को राहत दे…सरकार के कार्यों को लालफीताशाही से बाहर निकालकर सीधे जनता के पास पहुंचाने का
माध्यम भी बनाया। प्रधानमंत्री यहीं नहीं रूके, सोशल मीडिया की ताकत का उन्हें भान था लिहाजा सोशल मीडिया को उन्होंने समाज में नए सकारात्मक पहल का भी हथियार बनाया… कभी फीजिकल फीटनेस के चैलेंज को सोशल मीडिया पर वायरल कर स्वस्थ समाज की आवाज बुलंद करना या योग के महत्व को समझा कर उसे जनांदोलन के तौर पर खड़ा करना, ये प्रधानमंत्री के सपनों का न्यू इंडिया है।

 

 

आज प्रधानमंत्री को ट्वीटर हैंडल और फेसबुक अकाउंट पर तकरीबन नौ करोड़ लोग फॉलो करते हैं। नए माध्यम में सोशल मीडिया के जरिए ये दोतरफा संवाद के नए औजार हैं। यही नहीं प्रधानमंत्री के नमो एप को 50 लाख लोगों ने अपने अपने मोबाइल पर डाउनलोड कर रखा है। संवाद के ये हथियार सिर्फ प्रधानमंत्री इस्तेमाल करते हों ऐसा भी नहीं, विदेश मंत्री के तौर पर सुषमा स्वराज ने ट्वीटर पर मंत्रालय से जुड़ी आम आदमी की परेशानियों का हल ढूंढ़ने में कई मौके पर काफी तारीफें बटोरीं, रेल मंत्री के तौर पर सुरेश प्रभु रहें हों या अब के पीयुष गोयल हों सोशल मीडिया के माध्यम से लोकतंत्र को जनकल्याणकारी रूप देने में बढ़ चढ़ कर भूमिका निभाईं। विदेश मंत्रालय ने हाल ही में पासपोर्ट सेवा लांच किया और दो दिनों के भीतर ही एक लाख लोगों ने अपने-अपने मोबाइल पर इसको डाउनलोड भी कर लिया। ज़ाहिर है सरकार आपके द्वार की एक नई संकल्पना सामने आ रही है, सरकार अब आपके मोबाइल पर। नमो एप तो शासन की कमियों और खुबियों पर जनता की प्रतिक्रिया पाने के लिए एक धारधार मंच के तौर पर खड़ा है। किसानों के उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने के लिए ईमंडी को सरकार ने मोबाइल पर ही उपलब्ध कराया है।

 

 

लिहाजा आप भी आगे बढ़िए कम्युनिकेशन के इस नए अवतार के साथ आप भी जुड़िए और #SOCIALMEDIADAY को वायरल बनाइए… NewIndia चल चुका है नए रास्ते पर।

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