क्या गुल खिलाएगा तीस साल बाद शनि का राशि परिवर्तन ?

अतुल सहाय

अतुल सहाय की कलम से

  • २५ जनवरी २०२० को ३० वर्षों के बाद “शनि” का राशि परिवर्तन होगा
  • शनि “मकर” राशि में संचरण करने जा रहे हैं

बस अब २५ जनवरी २०२० में सिर्फ १४ दिन ही शेष हैं और शनि ३० वर्षों के बाद अपने (घर) स्वराशि “मकर” में संचरण करने जा रहे हैं । यह राशि परिवर्तन – कुछ राशि के जातकों के लिए तो बहुत ही शुभ होने वाला है।

मकर राशि में शनि कल्याणकारी अवस्था में रहेंगे तो कमोबेश हर राशि के जातकों के लिए कुछ ना कुछ अच्छा अवश्य करेंगे – बशर्ते – कुछ राशि के जातकों को महादेव / हनुमान और शनि की आराधना अगले लगभग तीन वर्षों तक करनी ही होगी !

हाँ – २५ जनवरी २०२० से अगले ३ वर्षों तक – मेष , वृष , तुला , मकर और मीन के लिए बहुत ही शुभ होगा और कन्या के लिए ८५ % मिथुन के लिए ७० %, कर्क के लिए ८० % !

यद्यपि वृश्चिक राशि की साढ़े साती समाप्त हो रही है फिर भी उनको कोई विशेष लाभ सिर्फ तब ही संभव है – यदि शनि मकर में हो – कुम्भ में हो – तुला का हो !

वृश्चिक राशि के जातकों का शनि मूल कुंडली में अगर शनि नीच का हो – शत्रु राशि में हो या फिर शनि सूर्य की दशा / अन्तर्दशा चल रही हो को यह ३० % से ४० % ही लाभ देगा – क्यों की जैसे ही शनि कुम्भ में राशि परिवर्तन करेगा – वृश्चिक राशि के जातकों के लिए फिर ढैया शुरू हो जाएगा !

कुछ लोगों के दुष्प्रचार या गलत भ्रांतियों की वजह से – शनि – राहु – केतु के नाम से ही जनसाधारण के मन में एक अकारण भय उत्पन्न हो जाता है – जबकि शनि से तो भयभीत होने का कोई कारण होना ही नहीं चाहिए ! हमें अपने हृग वेद , यजुर वेद , पुराणों और वैदिक ज्योतिष शास्त्र का आभारी होना चाहिए – जिसमे हर ग्रहों से सम्बंधित समस्या का समाधान वर्णित है !

हमने पहले के आलेखों में भी यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है की शनि – न्यायधीश हैं और अपने गोचर में (विषेशतः साढ़े साती – या ढैया में ) जातकों को उनके पूर्व कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं ! अपने कुछ मित्रों के आग्रह पर – यहां शनि को प्रसन्न रखने का एक और सरल उपाय प्रेषित करने का प्रयास करता हूँ !

वेदों के अनुसार – कष्टकारी शनि की दशा में या फिर हर राशि के जातक शनि की विशेष कृपा के लिए भी – अगर शनिवार से प्रारम्भ कर अगर प्रतिदिन सूर्यास्त के बाद इस मन्त्र का जाप करे तो शनि की विशेष कृपा होती है ! (प्रत्येक शनिवार को रुद्राक्ष की माला से १०८ बार और प्रतिदिन २७ बार बस रविवार को शनि के मन्त्रों का जप नहीं करना चाहिए)

कोणस्थ पिंगलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोन्तको यम: ! सौरि: शनैश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत: !!

उपरोक्त मन्त्र शनि के १० नामों का संग्रह है

(१ – कोणस्थ, २ – पिंगल, ३ – बभ्रु, ४ – कृष्ण, ५ – रौद्रान्तक, ६ – यम, ७ , सौरि, ८ – शनैश्चर, ९ – मंद व १० – पिप्पलाद। सिर्फ इन दस नामों से शनिदेव का स्मरण मात्र से ही सभी शनि दोष दूर हो जाते हैं )

नोट : वैसे मित्रों और सदस्यों से यह आग्रह है की अपनी मूल कुंडली का विश्लेषण किसी भी प्रबुद्ध ज्योतिष से अवश्य करा लें – क्यों की शनि के इस राशि परिवर्तन का प्रभाव बहुत ही महत्वपूर्ण होगा और तीन वर्षों के बाद भी शनि अपनी ही राशि “कुम्भ” में संचरण करेंगे – इस लिए वर्तमान में ही मूल कुंडली में शनि की स्थिति – दशा – अन्तर्दशा या आने वाले दशा का आँकलन -और कोई भी वैदिक उपाय लाभकारी होगा

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