क्यों खास है अपाचे ‘द लादेन किलर’

भास्कर की कलम से

आधुनिक युद्धकला के इतिहास में अपाचे हेलीकाप्टर को एक क्रांतिकारी विकास के रूप में देखा जाता है जिसने युद्ध की पूरी शक्ल-ओ-सूरत बदल कर रख दिया। ‘उड़ते विशालकाय टैंक” और “लादेन किलर” जैसे उपमा से नवाजे गए अपाचे के युद्ध मे किये गए वार को सहन करना और उससे बचना सम्भव ही नहीं इसलिए तो इसे “Terrifying Machine to Ground Forces” कहा जाता है। भारतीय वायुसेना को अत्याधुनिक तकनीक और हर चरम परिस्थितियों में उड़ान भरने में सक्षम अपाचे (AH-64 E (I)) के गार्डियन अटैक हेलीकॉप्टर की पहली खेप मिल गयी है। इससे वायुसेना के पुराने पड़ते हेलीकॉप्टर बेड़े को और मजबूती मिलेगी और भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज होगी। इसकी मारक क्षमता से, विषम भौगोलिक प्रदेशों में वायुसेना की व्यापक पहुंच और मिशन के दौरान परिष्कृत और गुप्त संचार प्रणाली के जरिये रियल टाइम वारफेयर और बेहतर बैटल मैनेजमेंट को भी नई दिशा मिलेगी।

क्यों अपाचे को कहते हैं ‘गेमचेंजर’

दो पायलट वाले इस लड़ाकू हेलीकाप्टर में कई ऐसी खूबियां है जो विश्व के किसी अन्य सैन्य अटैक हेलीकाप्टर में नहीं है,जो इसे बेहद खास और मारक बना देता है। अपाचे को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह दुश्‍मन की किलेबंदी को भेदकर और उसकी सीमा में घुसकर हमला कर सकुशल वापस लौटने में सक्षम है। यह अटैक हेलीकाप्टर युद्ध अथवा सीमित युद्ध के दौरान “गेम चेंजर “की भूमिका निभाएगा, इस बात पर बल इसलिए दिया जा रहा है भारत ने अमेरिका के साथ पहले चिनूक जैसे हैवी लिफ्ट हेलीकाप्टर औऱ बाद में अपाचे को खरीदने से पहले अमेरिका के साथ दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच परस्पर संबंध को बेहतर बनाने के लिए उच्च स्तरीय सैन्य प्लेटफॉर्मो के हस्तांतरण की अनुमति के लिए चार समझौतों में तीन पर दस्तखत किए है जिसमें सबसे पहले 2002 में सामान्य सुरक्षा सैन्य सूचना समझौता [General Security of Military Information Agreement(GSOMIA)],2016 में लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज ऑफ मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट [Logistic Exchange Memorandum of Agreement (LEMOA)] और हालिया [communication Compatibility and Security Agreement (COMCASA)] शामिल है। अंतिम समझौते के रूप के रूप में भू-स्थानिक सहयोग हेतु बुनियादी विनिमय और सहयोग समझौता [Basic Exchange and Cooperation Agreement For Geo Spatial Cooperation (BECA)] के मसौदे पर बातचीत जारी है। इन समझौतों की बात इसलिए कि जा रही है क्योंकि आने वाले दिनों में युद्ध स्वरूप बदल जायेगा जिसे स्पेक्ट्रम वारफेयर के रूप में देखा जाएगा और सशस्त्र बलों के लिए सारा दारोमदार इनके सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड संचार उपकरण जिसे High End secured Encrypted communication Equipment’s कहा जाता है, पर होगी।

भारतीय सैन्य बलों द्वारा अमेरिका से प्राप्त इन संचार उपकरणों को अमेरिकी प्लेटफॉर्म पर लगाया जाएगा जिसमे C -130 J super Hercules, भीमकाय C-17 ग्लोबमास्टर, समुद्र में लंबी निगरानी करने और पनडुब्बी रोधी वारफेयर में अव्वल Poisiden 8 I विमान, सुपर हैवी लिफ्टर हेलीकाप्टर चिनूक और अत्याधुनिक अपाचे हेलीकॉप्टर शामिल होंगे।

भारत के पास पहले से हो रूसी मूल के MI सीरीज के लड़ाकू कई अन्य हेलीकॉप्टर मौजूद है जिसमे सबसे घातक और मारक MI-35 को माना जाता है, जिनकी विश्वसनीयता पर कोई संदेह नहीं है। कुल मिलाकर देखा जाय तो अत्याधुनिक रूसी-अमेरिकी प्लेटफॉर्म , और भारतीय सैन्य बलों की अदम्य साहस उत्कृष्ट जिजीविषा, विपरीत परिस्थितियों में कार्य करने और सफल होने का माद्दा, मैन एंड मशीन में बेहतर समन्वय भी इन शूरवीरों को खास बना देती है।

इन तकनीकी प्लेटफॉर्म के जरिये हम अपनी रणनीतिक सूचनाओं को अत्यधिक कूटबद्ध कर सकेंगे जिसे डिकोड कर पाना नामुमकिन होगा, जो हमे युद्धकालीन वक्त पर ‘लीडिंग एज” प्रदान करता रहेगा। दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्राई सर्विसेज फोर्सेज के बीच समन्वय में उल्लेखनीय बढोत्तरी होगी। किसी भी भौगोलिक परिस्थितियों में कोई भी मिशन को इसके जरिये सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा सकेगा। इस प्रणाली की इन्हीं खूबियों की वजह से रक्षा विश्‍लेषक मानते है कि अपाचे युद्ध के समय ‘गेम चेंजर’ की भूमिका निभा सकता है।

इससे पूर्व भारत ने अमेरिका से तीन बिलियन डॉलर में 15 चिनूक हैवी लिफ्टर और 22 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर खरीदने का सौदा किया था। इस हेलीकॉप्टर से भारतीय वायुसेना में शामिल होने से इसकी की ताकत कई गुना तक बढ़ जाएगी। भारत, अभी तक रूस में बने एमआई-17 लिफ्ट हेलीकॉप्टर पर ही निर्भर है। इसके अलावा सेना के पास रूस में निर्मित एमआई-26 हेलीकॉप्टर भी मौजूद है। वहीं अगर अटैक हेलीकॉप्टर की बात करें तो भारतीय सेना की ताकत एमआई-35 पर ही निर्भर है जो मुख्य रूप से एक असाल्ट हेलीकॉप्टर है जिसका इस्तेमाल दुर्दांत आतंकियों के साथ मुठभेड़ में अपने विशेष बलों को पहुंचाने और अपने क्षेत्र को सुरक्षित रखने जैसे बहुआयामी कार्य में इस्तेमाल किया जाता है। यह काफी जांचा-परखा और बेहद भरोसेमंद है जिसका इस्तेमाल तत्कालीन सोवियत संघ द्वारा 1980 के दशक में अफगानिस्तान के ऑपरेशन के दौरान किया गया था।

अपाचे को खास तौर पर सिर्फ हमला करने में इस्तेमाल किया जाता है

भारतीय वायुसेना को अपाचे के रूप में ऐसा पहला हेलीकॉप्‍टर मिला है जो विशुद्ध रूप से हमले करने का काम करेगा। अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने भारतीय वायुसेना को 22 अपाचे गार्जियन लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में से पहला हेलीकॉप्टर सौंप दिया है। अरबों डॉलर का यह हेलीकॉप्टर सौदा लगभग साढ़े तीन साल पहले हुआ था। वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि एएच-64ई (आई) अपाचे हेलीकॉप्टर को शामिल करना बल के हेलीकॉप्टर बेडे़ के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

दुनिया का आधुनिकतम और घातक हेलीकॉप्टर माना जाता है अपाचे

अमेरिकी कंपनी बोइंग निर्मित AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्‍टर दुनिया के सबसे आधुनिक और घातक हेलीकॉप्‍टर माने जाते हैं। बोइंग AH-64E अमेरिकी सेना और अन्य देशो के सैन्य बलों के लिए अत्याधुनिक लड़ाकू हेलीकॉप्टर में एक है जो कि एक साथ कई कार्य करने में सक्षम है। इस हेलीकॉप्टर को अमेरिकी सेना के एडवांस्ड अटैक हेलीकॉप्टर प्रोग्राम के लिए बनाया गया था। इसने पहली उड़ान साल 1975 में भरी, लेकिन इसे अमेरिकी सेना में साल 1986 में शामिल किया गया।अमेरिकी बलों ने अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर को पनामा से लेकर अफगानिस्तान और इराक तक के साथ दुश्मनों से लोहा लेने में इस्तेमाल किया। इजरायल भी लेबनान और गाजापट्टी में अपने सैन्य ऑपरेशनों में इसी अटैक हेलिकॉप्टर के जरिये सफलतापूर्वक अंजाम देता रहता है।

अमेरिका के अलावा इजरायल, इजिप्ट और नीदरलैंड की सेनाएं भी इस अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करती हैं।  तकनीकी रूप से अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर में दो जनरल इलेक्ट्रिक T700 टर्बोशाफ़्ट इंजन हैं और आगे की तरफ एक सेंसर फिट है जिसकी वजह से यह रात के अंधेरे में भी उड़ान भर सकता है। यह 365 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरता है। अपनी तेज गति की वजह से यह दुश्मन के टैंकों के परखच्चे आसानी से उड़ा सकता है।

अपाचे की तकनीकी खूबियां

अगर इसमे लगे हथियारों की बात की जय तो अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर में हेलिफायर और स्ट्रिंगर मिसाइलें लगी हैं और दोनों तरफ 30mm की दो गन हैं। हेल फायर मिसाइल के रुप में हर एक मिसाइल अपने आप मे एक मिनिएचर एयरक्राफ्ट की भांति कार्य करता है, जिसका अपना गाइडेन्स सिस्टम, स्टीयरिंग कंट्रोल और प्रोपल्शन सिस्टम रहता है, साथ ही इसका पेलोड उच्च विस्फोटकों से लैस, जिसे कॉपर लाइन्ड चार्ज वारहेड कहते हैं, जो किसी भी भीमकाय टैंक को पूरी तरह नष्ट करने में सक्षम है। इन मिसाइलों का पेलोड इतने तीव्र विस्फोटकों से भरा होता है कि दुश्मन का बच निकलना नामुमकिन होता है। यह हेलीकॉप्टर अपने सॉफिस्टिकेटेड आर्म्ड सिस्टम के जरिये जमीन पर मौजूद व हरकत कर रही दुश्मन की कवचित रक्षा प्रणाली, बख़्तरबंद टैंक, बंकर को अपने विनाशकारी फायरिंग के जद में लाकर नेस्तनाबूद कर देती है।

हेलीकाप्टर का वजन लगभग 5,165 किलोग्राम है और इसमें पायलटों के बैठने के लिए दो सीटें होती हैं। इस हेलीकॉप्टर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह युद्ध क्षेत्र की हर परिस्थिति में टिका रह सके। अपाचे हेलीकॉप्टर का सबसे क्रांतिकारी फीचर है इसका हेल्मेट माउंटेड डिस्प्ले, इंटिग्रेटेड हेलमेट और डिस्प्ले साइटिंग सिस्टम (Integrated Helmet and Display Sighting System), जिसकी मदद से पायलट हेलीकॉप्टर में लगी ऑटोमैटिक M230 चेन गन को अपने दुश्मन पर टारगेट कर सकता है। किसी भी तरह का मौसम हो, कोई भी परिस्थिति हो, अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर उड़ान भर अपने मिशन को अंजाम दे सकता है ।

अपाचे एक स्टील्थ , वर्सेटाइल लड़ाकू हेलीकाप्टर है जो किसी भी अभियान को अंजाम देने में सक्षम है। इसमे अत्याधुनिक लेज़र और इंफ्रारेड सिस्टम लगे है जो इसे किसी भी मौसम में कार्य करने में सक्षम बनाते हैं। इस हेलीकॉप्टर की खूबियों और इसकी जरूरतों के बारे में रक्षा मंत्रालय ने कहा “The helicopter has been customized to suit IAF’s future requirements and would have significant capability in mountainous terrain. The helicopter has the capability to carry out precision attacks at standoff ranges and operate in hostile airspace with threats from ground. The ability of these helicopters, to transmit and receive the battlefield picture, to and from the weapon systems through data networking makes it a lethal acquisition”.

(लेखक रक्षा मामलों के जानकार हैं, फिलहाल डीडी न्यूज़ से संबंद्ध हैं)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *