क्यों लाभकारी है वृक्षासन ?

प्रवीण झा

वृक्षासन का अर्थ हैं – “पेड़ की मुद्रा”। इस आसन को वृक्षासन इसलिए कहा गया है क्योंकि जिस तरह से पेड़ एक जगह शान्ति से अपनी पूरा भार जड़ और तना की मदद से सम्भाले रहता है । ठीक उसी तरह जब हम यह आसन करते है तो हमारा पूरा भार पैरों पर होता हैं जिससे हमारी शरीर का बनावट पेड़ जैसा दिखाई देती है।

वृक्षासन करने की विधि :-

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले हमे किसी समतल जगह पर सावधान की स्थिति में खड़े हो जाना हैं । शरीर बिल्कुल तनी हुई रहे । फिर बाएं पैर को उठाएंगे और दाहिने पैर के जंघा के अन्तिम भाग पर रखेंगे। ध्यान रहे एड़ी ऊपर की ओर रहेगी। अब शरीर का पूरा भाग दाहिने पैर पर हैं । इस स्थिति में खुद को बैलेंस करेंगे । जब पूरी तरह शरीर का बैलेंस बन जाय । फिर धीरे-धीरे सांस भरते हुए दोनों हाथो को सर के ऊपर तक उठाएंगे प्रणाम मुद्रा बनाते हुए। ध्यान सामने की ओर किसी एक बिन्दु पर । फिर नॉर्मल सांस ले। उसी स्थिति में कुछ सेकंड या कुछ मिनट अपने शक्ति अनुसार रुके । फिर हाथों को धीरे-धीरे नीचे लायें , सांस छोड़ते हुए । दूसरे पैर से भी यही प्रक्रिया दुहराए । ऐसा करने के बाद आपका एक चक्र पूरा हुआ। आप इस क्रिया की समय को और बढ़ा सकते हैं, अपने शक्ति अनुसार।

वृक्षासन के लाभ :-

  • इससे पैरों की स्थिरता और मजबूती का विकास होता है।
  • यह स्नायुमण्डल का विकास कर पैरों को स्थिरता प्रदान करता है।
  • यह कमर और कुल्हों के आस पास जमीं अतिरिक्त चर्बी को हटाता है तथा दोनों ही अंग इससे मजबूत बने रहते हैं।
  • यह तोंद नहीं निकलने देता।
  • एकाग्रता शक्ति को बढ़ाता हैं। मन में चल रहे कई प्रकार के भटकाव को रोकता हैं।
  • तनाव को दूर करने में बहुत ही लाभप्रद हैं।
  • बढ़ते वजन को भी रोकने में कारगर साबित होता हैं।
  • बहुत से लोगो को फ्लैट पैर की प्रॉब्लम होती है उससे होने वाली प्रॉब्लम को कम कर देता है।
  • पैरो को मजबूत बनता हैं। तथा एड़ी दर्द , घुटने दर्द , गठिया के रोग को उत्पन्न नही होने देता ।शरीर में रक्त संचार को सुचारू रूप से चलाने में भी महत्त्वपूर्ण योगदान निभाता हैं।
  • जिन बच्चों की लम्बाई नही बढ़ती उन बच्चों के लिय यह आसन रामवाण का कार्य करती हैं।

वृक्षासन की सावधानियाँ :-

  • यह आसन उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति को नही करना चाहिए ।
  • जिनके घुटने , पंजे , कुल्हे में दर्द हो उनको यह आसन वर्जित हैं ।
  • मानसिक , अनिन्द्र रोगी को भी यह आसन नही करना चाहिए।

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