क्यों, कब और कैसे करें वज्रासन

विजय झा

योग एवं आसन मन को शांत रखने का एक अपूर्व साधन है। आसन चित को एकाग्र और स्थिर बनाने का काम करता है। मानसिक रोग, शांति के साथ योग शारीरिक रूप से सबल बनाता है। आज लोग इसके महत्व को समझ रहे है। योग को युवा और बुजुर्ग दोनों ही अपनी जीवनशैली में अपना रहे है।

रोजाना योग करनेवालों साधकों को कभी रोग नही होता। दरअसल, योग एवं रोग का आंकड़ा छत्तीस का है। वजन घटाने से लेकर पुराने रोगों को ठीक करने में योग अंतिम उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

बीमारियों के होने का कारण हमारी छोटी-छोटी लापरवाही होती है। आमतौर पर योग और आसनों को करने के लिए नियम होते है। लेकिन एक आसन ऐसा है जो है तो बहुत ही साधारण और यह और जिसे खाने के तुरंत बाद ही कर सकते है। आज हम बात करेंगे वज्रासन के बारें में।

वज्रासन दो शब्दों से मिलकर बना है वज्र + आसन। वज्र का मतलब होता है कठोर अथवा मजबूत। इस आसन के अभ्यास से शरीर बलवान और मजबूत बनता है। यह एक साधनात्मक मुद्रा हैं। पाचनशक्ति, वीर्यशक्ति तथा स्नायुशक्ति भी ठीक रहती है। इस आसन को दिन या शाम दोनों वक्त कर सकते है।

कब्ज की समस्या हो या फिर हो रहे है बढ़ते हुए वजन का शिकार , मासिक धर्म मे अनियमितता ऐसे अनेक परेशानियों को खत्म करने का एकमात्र इलाज है वज्रासन। आइए जानते है कैसे और कब किया जाता है वज्रासन और इससे होने वाले अनेक लाभ क्या है ।

वज्रासन करने का तरीका

घुटनों को मोड़कर पैरों पर बैठकर किया जाने वाला आसन है वज्रासन। यह संस्कृत के शब्द ‘वज्र’ से बना है, जिसका अर्थ है आकाश में गरजने वाली बिजली। अंग्रेजी में इसे डायमंड पोज कहते है। प्राणायाम, कपालभाति व अनुलोम-विलोम वज्रासन में बैठकर कर सकते है।

कैसे करें

घुटनों के बल जमीन पर बैठ जाएं। दोनों पैरों के अंगुठों को साथ में मिलाएं और एड़ियों को अलग रखें। अंगुठों को एक दूसरे के ऊपर नही रखें। अब अपने नितंबों को एड़ियों से लगाए। हथेलियां को घुटनों पर रख दें। पीठ और सिर को सीधा रखें।

दोनों घुटनों को आपस में मिलाकर रखें। अब आंखें बंद कर लें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें। इस अवस्था में आप पांच से 10 मिनट कर सकते है।

एक बार करने के बाद इसे दोहराने की कोई आवश्यकता नही है। टखने, जांध, घुटने से लेकर कूल्हे के हिस्सों में खिचाव पड़ता है।

सावधानी

घुटनों में कोई समस्या है या हाल ही में घुटने की सर्जरी हुई है तो यह आसन न करें। गर्भवती महिलाएं इस आसन को करते हुए अपने घुटनों में थोड़ा अंतर बनाकर रखें ताकि पेट पर दबाव न पड़े। रीढ़ की हड्डी में कोई भी समस्या है तो न करें।

हर्निया, आंतों के अल्सर और छोटी बड़ी आंतों से पीड़ित करने से बचे या प्रशिक्षक की निगरानी में रहकर ही यह आसन करें।

शुरुआती टिप्स

टखनों, घुटनों और पिंडलियों पर मालिश करें। धीरे – धीरे इसकी समयसीमा को बढ़ा सकते है। आरंभ में आराम से करना चाहिए। जैसे ही आपकी पीठ का निचला हिस्सा इसका आदी हो जाएगा, तो उन्हें आसन करते समय सांस लेने में तकलीफ नहीं होगी।

वज्रासन के फायदे

पाचन ठीक रहता है और कब्ज की समस्या दूर होती है। बेहतर पाचन होने से एसिडिटी और अल्सर की समस्या से बचाव होता है। पीठ को मजबूत बनता है और पीठ के निचले हिस्से की समस्या और साइटिका की समस्या से राहत दिलाता है।

यह प्रसव पीड़ा को कम करने में मदद करता है और मासिक धर्म की ऐंठन को भी कम करता है। वज्रासन पेल्विक भाग में रक्त संचरण को दुरुस्त करता है। पैरों पर बैठने से पैरों पर रक्त प्रवाह कम पड़ता है और पाचन भाग में बढ़ता है, जिस कारण पाचन तंत्र ठीक से काम करता है। पेट और कमर की चर्बी घटती है। रक्तसंचार सुधरता है। अमलता और गैस की समस्या से निजात मिलती है। तनाव कम होता है तथा मन को शांति मिलती है। रीढ़ की हड्डी सीधी होती है। अंगों को शक्ति मिलती है और पेशाब की समस्या से निजात मिलती है।

यह फायदेमंद कितना है, इस बारे में तो आप जान ही चुके हैं। जांघो के आसपास की चर्बी को कम करना वजह कम करने में सहायक है। नियमित अभ्यास रीढ़ के नीचले भाग तथा पैरों के तनाव को दूर करता है। साइटिका में फायदा मिलता है। ज्वाइंट पेन, वेरिकोज वेन्स, गठिया आदि रोंग नहीं होते। आमाशय और गर्भाशय की मांसपेशियों को शक्ति प्रदान करता है। इसलिए यह आसन महिलाओं के शिशु जन्म में सहायक है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थो को निकालने में भी मददगार होता है।

वज्रासन से पहले करें ये आसन

अर्ध शलभासन
शलभासन

वज्रासन के बाद करें ये आसन

मक्रासन
बालासन
शवासन

वज्रासन मूड स्विंग स्थिति में लाभकारी है क्योंकि इसे करने से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट सही रहता है जो शरीर में अच्छे हॉर्मोन को उत्पन्न करने में सहायक होता है जो मूड को अच्छा रखते है। वज्रासन न केवल स्वास्थ्य संबंधित फायदे प्रदान करता है बल्कि यह त्वचा संबंधित समस्या में भी फ़ायदेमंद साबित होता है। इस आसन को रेगुलर करने से त्वचा कोमल और स्मूथ बनती है साथ ही साथ ग्लो करने लगती है।

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